हमारे ऊपर हमला किया... भारत में भिड़े ईरान और यूएई; रूस को करना पड़ा बीच-बचाव

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नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स बैठक में ईरान और यूएई के बीच '40 दिन के युद्ध' को लेकर तीखी बहस हुई। जानें ईरान ने यूएई पर क्या गंभीर आरोप लगाए, इज़राइल कनेक्शन क्या है और भारत का इस पर क्या रुख रहा।

हमारे ऊपर हमला किया... भारत में भिड़े ईरान और यूएई; रूस को करना पड़ा बीच-बचाव

नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भारी कूटनीतिक तनाव देखने को मिला है। हाल ही में मध्य पूर्व में हुए युद्ध को लेकर ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के प्रतिनिधि बैठक के दौरान आपस में ही भिड़ गए जिसके बाद रूस को बीच-बचाव करना पड़ा। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने गुरुवार को संयुक्त अरब अमीरात पर ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की मदद करने का आरोप लगाया। इसके बाद यूएई ने भी तीखा पलटवार किया।

किसने क्या आरोप लगाए?

यूएई का दावा: यूएई के प्रतिनिधियों का कहना है कि हालिया संघर्ष के दौरान ईरान ने उनके देश पर सीधे हमले किए और उन्हें निशाना बनाया। हाल के हफ्तों में यूएई में ऊर्जा ठिकानों पर हमलों को लेकर ईरान और यूएई के बीच तीखी बयानबाजी हुई है, जिसके परिणामस्वरूप ब्रिक्स पश्चिम एशिया संकट पर एक सर्वसम्मत बयान जारी करने में विफल रहा है।

ईरान का तीखा पलटवार: इसके जवाब में, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने यूएई पर ईरान के खिलाफ सैन्य आक्रामकता में सीधे तौर पर शामिल होने का आरोप लगाया। ईरान का कहना है कि यूएई ने अमेरिका और इजराइल को अपने सैन्य ठिकाने, हवाई क्षेत्र और खुफिया जानकारी उपलब्ध कराई। ईरान की तरफ से यह भी सफाई दी गई कि उसने यूएई पर हमला नहीं किया था, बल्कि अपनी आत्मरक्षा में यूएई की जमीन पर मौजूद सिर्फ 'अमेरिकी सैन्य ठिकानों' को निशाना बनाया था।

सम्मेलन के दो सत्रों में से एक के दौरान अराघची और संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मामलों के राज्य मंत्री खलीफा शाहीन अल मरार के बीच तीखी बहस हुई और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने स्थिति को शांत कराने के लिए हस्तक्षेप किया। ईरान-अमेरिका-इजराइल युद्ध को लेकर ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच तीखे मतभेदों ने पिछले महीने समूह के उप विदेश मंत्रियों और पश्चिम एशिया तथा उत्तरी अमेरिका के लिए विशेष दूतों की बैठक के दौरान संघर्ष पर आम सहमति बनाने के भारत के प्रयासों को रोक दिया।

संयुक्त अरब अमीरात और ईरान के बीच मतभेदों के कारण इस संघर्ष पर कोई सर्वसम्मत बयान जारी नहीं हो सका। हाल के हफ्तों में दोनों पड़ोसी देशों के बीच संयुक्त अरब अमीरात में ऊर्जा अवसंरचना पर ईरान के कथित हमलों को लेकर तीखी बहस हुई है।

क्या है '40 दिन का युद्ध' का पूरा मामला?

यह पूरा विवाद उस बड़े संघर्ष से जुड़ा है जिसकी शुरुआत 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों से हुई थी। इसके जवाब में, ईरान ने खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से भारी हमले किए थे। इसी लगभग 40 दिन चले संघर्ष ने पूरे क्षेत्र में भारी तबाही मचाई है, जिसमें ईरान का दावा है कि उनके हजारों नागरिक मारे गए हैं।

इजरायल से जुड़ा विवाद क्या है?

इस विवाद के भड़कने का एक बड़ा कारण इजरायल भी है। हाल ही में ऐसी रिपोर्ट्स सामने आई थीं कि इस युद्ध के चरम पर होने के दौरान, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुप्त रूप से यूएई के राष्ट्रपति से मुलाकात की थी। हालांकि यूएई ने इस बात का पूरी तरह से खंडन किया है, लेकिन ईरान इस बात को लेकर भड़का हुआ है। ईरान का मानना है कि यूएई इस युद्ध में तटस्थ नहीं था, बल्कि वह हमलावरों का एक सक्रिय साझीदार बन गया था।

भारत का रुख

इस अहम बैठक की मेजबानी भारत कर रहा था। इस तीखी बहस के बीच, भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कूटनीति और शांति पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की भलाई के लिए यह बहुत जरूरी है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर व्यापार सुरक्षित और बिना किसी रोकटोक के चलता रहे।

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Amit Kumar

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डिजिटल पत्रकारिता की बदलती लहरों के बीच समाचारों की तह तक जाने की ललक अमित कुमार को इस क्षेत्र में खींच लाई। समकालीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पैनी नजर रखने के साथ-साथ अमित को जटिल विषयों के गूढ़ विश्लेषण में गहरी रुचि है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले अमित को मीडिया जगत में एक दशक का अनुभव है। वे पिछले 4 वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।


अमित न केवल समाचारों के त्वरित प्रकाशन में माहिर हैं, बल्कि वे खबरों के पीछे छिपे 'क्यों' और 'कैसे' को विस्तार से समझाने वाले एक्सप्लेनर लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं। डिजिटल पत्रकारिता के नए आयामों, जैसे कि कीवर्ड रिसर्च, ट्रेंड एनालिसिस और एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन को वे बखूबी समझते हैं। उनकी पत्रकारिता की नींव 'फैक्ट-चेकिंग' और सत्यापन पर टिकी है। एक मल्टीमीडिया पत्रकार के तौर पर अमित का सफर देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ रहा है। उन्होंने अमर उजाला, वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे बड़े मीडिया घरानों के साथ काम किया है।


अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।

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