ईरान के राष्ट्रपति ने हिंदू संत के पैर छूकर लिया आशीर्वाद, BRICS समिट के दौरान किससे मिले
ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान अध्यात्मिक संवाद के कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। इसमें पहुंचे ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने हिंदू धर्मगुरु जगद्गुरु सतीशाचार्य के पैर छूकर आशीर्वाद लिया।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने ना केवल अपने देश का पक्ष मजबूती से रखा बल्कि उन्होंने धर्म और आस्था को भी पूरा सम्मान दिया। उन्होंने धर्मगुरुओं, कारोबारियों और बुद्धिजीवियों से भी मुलाकात की। एक खास संवाद कार्यक्रम में उन्होंने हिंदू धर्मगुरु जगद्गुरु सतीशाचार्य से मुलाकात की। उनका वीडियो भी वायरल हो रहा है जिसमें पेजेश्कियन को जगद्गुरु सतीशाचार्य के पैर छूकर आशीर्वाद लेते हुए देखा जा सकताहै।
वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि वह जगद्गुरु सतीशाचार्य से मिलकर कुछ बात करते हैं और फिर झुककर पैर छूकर आशीर्वाद लेते हैं। इस मौके पर जगद्गुरु सतीशाचार्य ने धर्म पर वक्तव्य भी दिया। धर्म संसद के अध्यक्ष महामंडलेश्वर गोस्वामी सुशील जी महाराज एवं पतंजलि योग पीठ के आचार्य बालकृष्ण भी मौजूद थे।
इस कार्यक्रम में आध्यात्मिक मूल्यों को लेकर भी चर्चा की गई। जगद्गुरु सतीशाचार्य ने कहा कि सनातन पूरी दुनिया को मानवता संदेश देता है और सबको एक परिवार के रूप में देखता है। वहीं ईरान के राष्ट्रपति ने कार्यक्रम में संबोधन के दौरान कहा कि धर्म और धार्मिक शिक्षाओं उद्देश्य मानवता की रक्षा और न्याय व्यवस्था स्थापित करना है।
प्राणियों में सद्भावना का संदेश
जगद्गुरु सतीशाचार्य ने इस कार्यक्रम में कहा, धर्म बताता है कि आप सब एक रहें। सनातन धर्म इसलिए दुनिया का सबसे पौराणिक धर्म है क्योंकि यह धर्म की जय कहता है। यह नहीं कहता कि किस धर्म की जय हो। प्राणियों में सद्भावना हो। यानी जिन लोगों में भी प्राण है उनमें सद्भावना का संदेश देता है।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर यहां अबू धाबी के युवराज खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ बैठक की। पिछले कुछ महीनों में ईरान द्वारा अमेरिकी हमलों के जवाब में यूएई में कई अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाए जाने के बाद दोनों पक्षों के संबंधों में तनाव आने के बाद यह बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया पर कहा, ''ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की।''


