
चुप्पी खतरों को कम नहीं करती, बल्कि... अमेरिकी हमले की आशंका के बीच भारत से बोला ईरान
भारत में ईरान के दूतावास ने कहा कि देशों की चुप्पी और निष्क्रियता इन खतरों को कम नहीं करती, बल्कि वे उन्हें और बढ़ाती हैं। ये नीतियां देर-सवेर सभी देशों को प्रभावित करेंगी, चाहे उनका आकार या आर्थिक शक्ति कुछ भी हो।
ईरान में महीनेभर से चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच तेहरान पर अमेरिकी हमले का खतरा मंडराने लगा है। ईरान ने भी खुली चेतावनी दी है कि यदि हमला होता है तो वह भी अमेरिकी ठिकानों पर कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। इस बीच, भारत में मौजूद ईरान दूतावास ने अहम टिप्पणी की है। उसने कहा है कि अमेरिका लगातार टैरिफ से लेकर अन्य मामलों में नियमों को तोड़ता रहा है। इस पर देशों की चुप्पी से खतरा कम नहीं होता, बल्कि और बढ़ता ही है।
भारत में ईरान के दूतावास ने एक्स पर लिखा, ''मौजूदा ग्लोबल ऑर्डर के खिलाफ अमेरिका की एकतरफा कार्रवाइयों - जिसमें गलत टैरिफ लगाना और 66 इंटरनेशनल संस्थानों से पीछे हटना शामिल है - ने दुनिया को ग्लोबल नियमों के टूटने की तरफ धकेल दिया है। देशों की चुप्पी और निष्क्रियता इन खतरों को कम नहीं करती, बल्कि वे उन्हें और बढ़ाती हैं। ये नीतियां देर-सवेर सभी देशों को प्रभावित करेंगी, चाहे उनका आकार या आर्थिक शक्ति कुछ भी हो।"
बता दें कि अमेरिका ने भारत समेत कई देशों पर टैरिफ लगाया है। भारत पर पहले 25 फीसदी टैरिफ लगाया गया, जिसके बाद इसे बढ़ाकर 50 फीसदी कर दिया गया। इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले हफ्ते एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किए, जिसमें 66 ऑर्गनाइजेशन, एजेंसियों और कमीशन के लिए अमेरिकी सपोर्ट को सस्पेंड कर दिया गया है। यह फैसला उनके एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा सभी इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन, जिनमें यूनाइटेड नेशंस से जुड़े ऑर्गनाइजेशन भी शामिल हैं, में भागीदारी और फंडिंग की समीक्षा के बाद लिया गया है। इसमें खास इंटरनेशनल सोलर अलायंस भी है, जिसका नेतृत्व भारत और फ्रांस कर रहे हैं।
अमेरिकी हमले का जवाब दे सकता है ईरान
यदि अमेरिका आने वाले समय में ईरान पर हमला करता है तो वह अमेरिकी बेस पर हमला करके जवाब दे सकता है। ऐसे में एक अमेरिकी अधिकारी ने बुधवार को कहा कि अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपने बेस से कुछ लोगों को हटा रहा है। यह बात तब सामने आई जब एक सीनियर ईरानी अधिकारी ने कहा कि तेहरान ने पड़ोसी देशों को चेतावनी दी है कि अगर वॉशिंगटन हमला करता है तो वह अमेरिकी बेस पर हमला करेगा। ईरानी मुद्रा रियाल के रिकॉर्ड निचले स्तर पर गिरने के बाद पिछले महीने तेहरान में प्रदर्शन शुरू हुए। तब से ये प्रदर्शन सभी 31 प्रांतों में फैल चुके हैं, और आर्थिक संकट के खिलाफ आंदोलन से शुरू होकर राजनीतिक परिवर्तन की मांग में तब्दील हो गए हैं।

लेखक के बारे में
Madan Tiwariलखनऊ के रहने वाले मदन तिवारी को मीडिया में एक दशक से भी ज्यादा का अनुभव है। वर्तमान में हिन्दुस्तान अखबार की न्यूज वेबसाइट लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स डिजिटल) में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से पत्रकारिता की पढ़ाई की। कक्षा 12वीं के बाद से ही दैनिक जागरण, अमर उजाला, जनसत्ता समेत तमाम अखबारों में संपादकीय पृष्ठ पर लिखना शुरू किया। महज दो सालों में विभिन्न राष्ट्रीय और क्षेत्रियों अखबारों में दो सौ से अधिक आलेख प्रकाशित हुए। ग्रेजुएशन करते समय ही मीडिया में नौकरी की शुरुआत की। लाइव हिन्दुस्तान में अभी दूसरी पारी है और दोनों पारियों को मिलाकर यहां आठ साल से ज्यादा हो चुके हैं। मदन आजतक जैसे अन्य संस्थानों में भी काम कर चुके हैं।
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