US-ईरान सीजफायर में PAK की भूमिका, कांग्रेस बोली- पापा ने वॉर रुकवा दी का क्या हुआ
रमेश ने एक अन्य पोस्ट में कहा कि पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल तथा ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम का पूरी दुनिया सतर्कतापूर्वक स्वागत करेगी। यह संघर्ष 28 फरवरी को ईरान में शासन के शीर्षस्थ अधिकारियों की लक्षित हत्याओं के साथ शुरू हुआ था।

कांग्रेस ने अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्धविराम में पाकिस्तान की मध्यस्थ की भूमिका को लेकर बुधवार को प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा और कटाक्ष करते सवाल किया कि ''पापा ने वॉर रुकवा दी'' का क्या हुआ। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह दावा भी किया कि मोदी सरकार विश्व मंच पर पाकिस्तान को अलग-थलग करने और आतंकवाद के प्रति उसके समर्थन को उजागर करने में नाकाम रही। रमेश ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''भारत के प्रधानमंत्री, जो अमेरिका, इजरायल, ईरान और खाड़ी देशों के साथ बहुत विशेष मित्रता का दावा करते हैं और जिनके पास इस वर्ष ब्रिक्स+ की अध्यक्षता भी है, युद्धविराम वार्ता के दौरान तस्वीर में क्यों नहीं हैं? युद्धविराम की बात के दौरान भारत कैसे और क्यों निर्णायक नहीं रहा?'' उन्होंने कटाक्ष करते हुए सवाल किया, ''पापा ने वॉर रुकवा दी का क्या हुआ?''
''पापा ने वॉर रुकवा दी'' एक चर्चित राजनीतिक मीम है, जिसका उपयोग विपक्षी दल कई बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा पर निशाना साधने के लिए करते हैं। करीब चार साल पहले रूस-यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के समय भारतीय नागरिकों को यूक्रेन से सुरक्षित निकालने के सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए जारी वीडियो में एक लड़की ने इस वाक्य का उपयोग किया था। इसके बाद यह धीरे-धीरे एक चर्चित मीम बन गया। रमेश ने एक अन्य पोस्ट में कहा, ''पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल तथा ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम का पूरी दुनिया सतर्कतापूर्वक स्वागत करेगी। यह संघर्ष 28 फरवरी को ईरान में शासन के शीर्षस्थ अधिकारियों की लक्षित हत्याओं के साथ शुरू हुआ था। यह प्रधानमंत्री मोदी की अपनी बहुप्रचारित इज़राइल यात्रा पूरी करने के ठीक दो दिन बाद शुरू हुआ था, एक ऐसी यात्रा जिसने भारत के वैश्विक कद और प्रतिष्ठा को कम कर दिया था।"
रमेश ने दावा किया, "युद्धविराम में पाकिस्तान द्वॉरा निभाई गई भूमिका प्रधानमंत्री मोदी की अत्यधिक व्यक्तिगत स्तर वाली कूटनीति के ''सार और शैली'' दोनों के लिए एक गंभीर झटका है।" उनका कहना है कि मोदी सरकार की यह विदेश नीति जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को लगातार समर्थन देने के लिए पाकिस्तान को अलग-थलग करने और दुनिया को यह विश्वास दिलाने में सफल नहीं हुई कि पाकिस्तान स्पष्ट रूप विफल राष्ट्र है। उनके मुताबिक, वर्ष 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों के बाद डॉ. मनमोहन सिंह ने पाकिस्तान को अलग- थलग करने में सफलता हासिल की थी।
रमेश ने कहा, "पूरी तरह से बाहरी दानदाताओं की उदारता पर निर्भर, एक दिवालिया अर्थव्यवस्था वाला और कई मायनों में टूटा हुआ देश पाकिस्तान ऐसी भूमिका निभाने में सक्षम हुआ, जो प्रधानमंत्री मोदी की सहभागिता और विमर्श प्रबंधन की रणनीति पर सवाल उठाता है। उन्होंने या उनकी टीम ने यह भी कभी नहीं बताया कि 10 मई, 2025 को ऑपरेशन सिन्दूर को अचानक क्यों रोक दिया गया था - जिसकी पहली घोषणा अमेरिकी विदेश मंत्री की ओर से हुई थी और जिसके लिए अमेरिकी राष्ट्रपति तब से लगभग सौ बार श्रेय ले चुके हैं। " उन्होंने दावा किया, “विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तान को दलाल कहकर खारिज कर दिया था, लेकिन अब स्वयंभू विश्वगुरु पूरी तरह बेनकाब हो गए हैं, उनकी स्वघोषित 56 इंच की छाती सिकुड़ गई है। उनकी कायरता न केवल इज़राइल की आक्रामकता, बल्कि व्हाइट हाउस में उनके अच्छे दोस्त द्वॉरा इस्तेमाल की जा रही पूरी तरह से अस्वीकार्य और अपमानजनक भाषा पर उनकी चुप्पी से प्रदर्शित होती है।”
कांग्रेस के विदेश मामलों के विभाग के प्रमुख सलमान खुर्शीद ने एक बयान में दावा किया कि भाजपा सरकार के गलत कदमों के कारण पाकिस्तान को युद्धरत पक्षों के बीच मध्यस्थता में भूमिका निभाने का मौका मिला जबकि भारत एक विश्वसनीय वॉर्ताकार के रूप में बेहतर स्थिति में था। उन्होंने कहा, ''यह न केवल पाकिस्तान को कूटनीतिक रूप से अलग-थलग करने के लगातार भारतीय सरकारों के निरंतर प्रयासों को कमजोर करता है, बल्कि इस्लामाबाद को विश्व मंच पर खुद को फिर से स्थापित करने के लिए जगह भी देता है।'' कांग्रेस नेता ने भारत सरकार से आग्रह किया कि वह विपक्ष को विश्वास में ले और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति स्थापित करने में भारत की अब तक रही ऐतिहासिक भूमिका की बहाली के लिए एकजुटता वाला रुख अपनाए।
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