घुसपैठियों भारत छोड़ो; शुभेंदु अधिकारी के 3-D फैसले से हड़कंप, बांग्लादेश बॉर्डर पर उमड़ा हुजूम

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यहां भगदड़ और अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। आपको बता दें कि शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने महज 48 घंटे पहले ही मालदा और मुर्शिदाबाद जिलों में अवैध प्रवासियों को रखने के लिए दो होल्डिंग सेंटर्स शुरू किए हैं।

घुसपैठियों भारत छोड़ो; शुभेंदु अधिकारी के 3-D फैसले से हड़कंप, बांग्लादेश बॉर्डर पर उमड़ा हुजूम

Suvendu Adhikari: पश्चिम बंगाल में सरकार बदलते ही अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गई है। शुभेंदु अधिकारी ने इसके लिए 3-D नीति (डिटेक्ट, डिलीट और डिपॉर्ट) अपनाई है। इसका मतलब है कि पहचान करो, हटाओ और देश निकाला दो। नई सरकार की इस नई नीति का अब जमीनी असर दिखने लगा है। राज्य सरकार की सख्ती और ताबड़तोड़ फैसलों के बाद मंगलवार को बिना वैध दस्तावेजों के भारत में रह रहे सैकड़ों बांग्लादेशी नागरिक वापस अपने देश लौटने के लिए उत्तर 24 परगना जिले के बिथारी-हाकिमपुर सीमा के पास पहुंच गए।

यहां भगदड़ और अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। आपको बता दें कि शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने महज 48 घंटे पहले ही मालदा और मुर्शिदाबाद जिलों में अवैध प्रवासियों को रखने के लिए दो होल्डिंग सेंटर्स शुरू किए हैं।

एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सभी घुसपैठियों को कड़ा और सीधा संदेश दिया। उन्होंने बेहद सख्त लहजे में कहा, "जल्दी-जल्दी भागो, नहीं तो जो करना है सरकार करेगी। अवैध प्रवासियों को जेलों में रखकर उन्हें मुफ्त भोजन, कपड़े और दवाइयां देने का कोई औचित्य नहीं है।"

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को हिरासत में लिए गए अवैध प्रवासियों को वापस भेजने की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने साफ किया कि कानून हमेशा से था, लेकिन पूर्ववर्ती सरकारों ने राजनीतिक हितों के कारण इसे लागू नहीं किया। मगर वर्तमान सरकार देश और राज्य के हित में इस कानून को पूरी सख्ती से लागू कर रही है।

जेल भेजने के बजाय सीधे BSF को सौंपेगी पुलिस

अवैध प्रवासियों को वापस भेजने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है। उन्होंने कहा कि अब संदिग्ध बांग्लादेशी घुसपैठियों को अदालत भेजने की लंबी प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत नहीं है। कानून में ऐसे प्रावधान हैं जिसके तहत पुलिस उन्हें सीधे सीमा सुरक्षा बल (BSF) को सौंप सकती है। भारत और बांग्लादेश के बीच हुए समझौते के तहत, बीएसएफ उनकी राष्ट्रीयता स्थापित करेगी और फिर उन्हें बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) के हवाले कर दिया जाएगा।

होल्डिंग सेंटर जाने का डर

स्वरूपनगर के पास सीमा पर पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के बड़े-बड़े हुजूम को देखकर सुरक्षाबल भी मुस्तैद दिखे। सीमा पर पहुंचे अधिकांश लोग कोलकाता और उसके आसपास के इलाकों में निर्माण स्थलों, होटलों, मत्स्य पालन और घरेलू सहायकों के रूप में काम कर रहे थे।

टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए बांग्लादश लौट रही तक्लीमा खातून ने कहा, "मैं दो साल पहले घोझाडांगा बॉर्डर के रास्ते भारत आई थी और घरेलू सहायिका का काम करती थी। मैं किसी होल्डिंग सेंटर में बंद नहीं होना चाहती और न ही जबरन धकेला जाना चाहती हूं, इसलिए मैं अपनी मर्जी से वतन लौट रही हूं।" वहीं, शाहिदुल गाजी ने कहा, "मैं तीन साल पहले एक दलाल की मदद से स्वरूपनगर सीमा से भारत में घुसा था और राजमिस्त्री का काम करता था। मेरे पास नागरिकता का कोई दस्तावेज नहीं है, इसलिए सैकड़ों दूसरों लोगों की तरह मैं भी जाने को मजबूर हूं।"

48 घंटे में तैयार हुए होल्डिंग सेंटर्स

राज्य सरकार के आदेश के बाद सभी जिलाधिकारियों ने अवैध प्रवासियों को रखने के लिए तेजी से सुविधाओं की व्यवस्था की। मालदा और मुर्शिदाबाद में बने पहले दो होल्डिंग सेंटर्स के शुरू होते ही सोमवार शाम तक वहां पकड़े गए 12 संदिग्ध बांग्लादेशियों को शिफ्ट भी कर दिया गया था।

क्या है वापसी की कानूनी प्रक्रिया?

एक वरिष्ठ बीएसएफ अधिकारी ने बताया कि जब भी किसी घुसपैठिए को हिरासत में लिया जाता है तो पहले पूछताछ के जरिए उनकी पहचान और पृष्ठभूमि की पुष्टि की जाती है। इसके बाद उनके उंगलियों के निशान और तस्वीरें ली जाती हैं। यह पूरा डेटा तैयार होने के बाद बीएसएफ औपचारिक प्रत्यर्पण के लिए बांग्लादेशी सीमा सुरक्षा बल (BGB) से संपर्क करती है और तय प्रक्रिया के तहत उन्हें सीमा पार सौंपा जाता है।

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Himanshu Jha

लेखक के बारे में

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बिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।


एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।


हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।


काम के इतर, हिमांशु को सिनेमा का विशेष शौक है। वे विशेष रूप से सियासी और क्राइम बेस्ड वेब सीरीज़ देखना पसंद करते हैं, जो कहीं न कहीं समाज और सत्ता के समीकरणों को समझने की उनकी जिज्ञासा को भी प्रदर्शित करता है।

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