Hindi NewsIndia NewsInternational Solar Alliance to remain focused on its objectives despite US withdrawal, Government Sources
US को जहां जाना है जाए, हम कायम; भारत के नेतृत्व वाले अलायंस छोड़ने पर सरकारी सूत्रों की दो टूक

US को जहां जाना है जाए, हम कायम; भारत के नेतृत्व वाले अलायंस छोड़ने पर सरकारी सूत्रों की दो टूक

संक्षेप:

सूत्रों के अनुसार, US के इस फैसले से ISA की कार्यप्रणाली या उसके दीर्घकालिक लक्ष्यों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। ISA में इस समय 125 सदस्य और हस्ताक्षरकर्ता देश हैं। यह संगठन स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में वैश्विक सहयोग को बढ़ाता रहेगा।

Jan 08, 2026 07:18 pm ISTPramod Praveen एएनआई, नई दिल्ली
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र के कई निकायों और भारत-फ्रांस के नेतृत्व वाले अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) समेत 60 से अधिक अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अमेरिका को बाहर निकालने का फैसला किया है। ट्रंप ने इन संस्थाओं को अनावश्यक और अमेरिका के हितों के खिलाफ बताया है। ट्रंप प्रशासन ने 'अमेरिका फर्स्ट' नीति को आगे रखते हुए भारत और फ्रांस के नेतृत्व वाले इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) सहित 66 वैश्विक संस्थाओं से बुधवार को हटने का ऐलान किया है।

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अमेरिका के इस कदम पर भारत सरकार के सूत्रों ने गुरुवार को बताया कि सरकार ने उन मीडिया रिपोर्टों पर ध्यान दिया है, जिनमें अमेरिका के इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) सहित 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों से हटने के फैसले का जिक्र है, और कहा कि यह अलायंस अपने सदस्य देशों को उनकी जरूरतों के हिसाब से सौर ऊर्जा को बढ़ाने में मदद करने के अपने उद्देश्य पर केंद्रित और कायम है। सरकारी सूत्रों ने कहा कि ISA अपने सदस्य देशों को उनकी जरूरतों के अनुसार सौर ऊर्जा विस्तार में सहयोग देता रहेगा।

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मीडिया रिपोर्ट्स पर सरकार की प्रतिक्रिया

सरकारी सूत्रों के अनुसार, अमेरिका के इस फैसले से ISA की कार्यप्रणाली या उसके दीर्घकालिक लक्ष्यों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। ISA में इस समय 125 सदस्य और हस्ताक्षरकर्ता देश शामिल हैं, और यह संगठन स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में वैश्विक सहयोग को आगे बढ़ाता रहेगा।

LDC और द्वीपीय देशों पर रहेगा खास फोकस

सूत्रों ने बताया कि इंटरनेशनल सोलर एलायंस आगे भी अल्पविकसित देशों (LDCs), छोटे द्वीपीय विकासशील देशों (SIDS) के साथ सहयोग को प्राथमिकता देगा, ताकि इन क्षेत्रों में सौर ऊर्जा परियोजनाओं का विकास और विस्तार किया जा सके। सूत्रों ने कहा कि ISA का फोकस सोलर परियोजनाओं के लिए वित्त जुटाने, क्षमता निर्माण (Capacity Building) करने और सौर ऊर्जा से जुड़े जोखिमों की धारणा को कम करने पर बना रहेगा, जिससे वैश्विक स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा की ओर संक्रमण तेज हो सके।

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अमेरिका ने क्यों लिया यह फैसला?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को एक राष्ट्रपति ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, जिसमें ISA सहित 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों, सम्मेलनों और संधियों से हटने का निर्देश दिया गया है, जिन्हें उनके प्रशासन ने "संयुक्त राज्य अमेरिका के हितों के विपरीत" पाया है। ज्ञापन में कहा गया है कि यह फैसला 4 फरवरी, 2025 को जारी कार्यकारी आदेश 14199 के तहत किए गए एक व्यापक समीक्षा के बाद लिया गया है, जिसमें अमेरिकी सदस्यता, फंडिंग या समर्थन से जुड़े सभी अंतरराष्ट्रीय अंतर-सरकारी संगठनों, सम्मेलनों और संधियों का मूल्यांकन अनिवार्य किया गया था।

ज्ञापन के अनुसार, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने संयुक्त राष्ट्र में संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रतिनिधि के साथ परामर्श करके एक रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें उन संगठनों और समझौतों की पहचान की गई जो "अमेरिकी हितों के साथ असंगत पाए गए"। निष्कर्षों की समीक्षा करने और कैबिनेट सदस्यों से परामर्श करने के बाद, राष्ट्रपति ने निष्कर्ष निकाला कि संयुक्त राष्ट्र और गैर-संयुक्त राष्ट्र निकायों दोनों में कुछ निकायों में निरंतर भागीदारी अब देश के हित में नहीं है।

ISA भारत और फ्रांस की एक संयुक्त पहल

बता दें कि ISA भारत और फ्रांस की एक संयुक्त पहल है जो सौर ऊर्जा समाधानों को बढ़ावा देने और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए देशों को एक साथ लाती है। ISA वेबसाइट के अनुसार, यह आइडिया 2015 में पेरिस में COP21 क्लाइमेट कॉन्फ्रेंस के दौरान आया था। 2020 में इसके फ्रेमवर्क एग्रीमेंट में संशोधन के बाद, सदस्यता सभी संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों के लिए खोल दी गई। इस अलायंस का लक्ष्य 2030 तक सोलर टेक्नोलॉजी और फाइनेंसिंग की लागत को कम करते हुए सोलर इन्वेस्टमेंट में 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर जुटाना है।

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen
भूगोल में पीएचडी और पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर उपाधि धारक। ईटीवी से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार पत्रकारिता करियर की शुरुआत। कई हिंदी न्यूज़ चैनलों (इंडिया न्यूज, फोकस टीवी, साधना न्यूज) की लॉन्चिंग टीम का सदस्य और बतौर प्रोड्यूसर, सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में काम करने के बाद डिजिटल पत्रकारिता में एक दशक से लंबे समय का कार्यानुभव। जनसत्ता, एनडीटीवी के बाद संप्रति हिन्दुस्तान लाइव में कार्यरत। समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक जगत के अंदर की खबरों पर चिंतन-मंथन और लेखन समेत कुल डेढ़ दशक की पत्रकारिता में बहुआयामी भूमिका। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और संपादन। और पढ़ें
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