सिंधु जल समझौता नहीं होगा लागू, भारत ने पाकिस्तान को फिर दिखाया आईना
समझौता दोबारा करवाने के लिए पाकिस्तान बेकरार है। इसके लिए वह कई वैश्विक मंचों पर रो चुका है। वहीं कई बार भारत को युद्ध की धमकी तक दे चुका है। लेकिन भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को आईना दिखाया है।

पाकिस्तान चाहे कितना भी छटपटा ले, सिंधु जल समझौता अब लागू नहीं होगा। भारत ने सोमवार को एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है। इस दौरान भारत ने पाकिस्तान को आईना भी दिखाया है। भारतीय अधिकारियों ने एक बयान में कहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों पुराना सिंधु जल समझौता अपने मौजूदा स्वरूप में अब दोबारा लागू नहीं होगा। बता दें कि अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने इस समझौते को निलंबित कर दिया था। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद पर पूरी तरह से रोक नहीं लगाता, तब तक इस फैसले की समीक्षा का कोई सवाल ही नहीं उठता। फिलहाल ऐसा कोई संकेत नहीं है कि पाकिस्तान ने आतंकवाद के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाया हो।
हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक सूत्रों का कहना है कि 1960 में जब इस समझौते पर दस्तखत किए गए थे, तब से लेकर अब तक स्थिति काफी बदल चुकी है। 1950 के दशक के बाद से अब तक जलवायु परिवर्तन, जनसांख्यिकी और तकनीक में बड़े बदलाव आए हैं। ऐसे में नदियों के पानी के बंटवारे से जुड़े प्रावधानों पर फिर से विचार करने की जरूरत है। इसके अलावा पाकिस्तान की काली करतूतों ने भारत को यह कदम उठाने पर मजबूर किया है।
आतंकवाद पर पाकिस्तान का दोहरा रवैया
भारतीय सूत्रों ने आगे कहा कि पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद के खिलाफ कोई भरोसेमंद कदम नहीं उठाए गए हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा प्रतिबंधित आतंकी समूह और व्यक्ति आज भी पाकिस्तान में सार्वजनिक कार्यक्रमों में दिख रहे हैं और उन्हें अपनी बात रखने का मंच दिया जा रहा है। LoC के पास आतंकी गतिविधियों में कोई कमी नहीं आई है और न ही उन्हें रोकने का कोई कोशिश दिखती है।
बातचीत की कोशिश
भारत कोई भी फैसला यू हीं नहीं लेता। समझौता निलंबित करने से पहले भारत ने 2023 से 2025 तक पाकिस्तान को औपचारिक रूप से चार बार चिट्ठी लिखकर समझौते पर फिर से चर्चा करने का प्रस्ताव दिया था। भारत ने यहां तक कहा था कि बातचीत पाकिस्तान की पसंद की किसी भी जगह पर हो सकती है। हालांकि, 8 मई 2025 को पाकिस्तान ने सिर्फ इंडस वाटर कमिश्नर्स के स्तर पर बात करने की पेशकश की, जबकि भारत का मानना था कि यह चर्चा दोनों देशों की सरकारों के स्तर पर होनी चाहिए।
कितना बर्दाश्त करे भारत?
सितंबर 1960 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति मोहम्मद अयूब खान के बीच हुए इस समझौते में भारत ने बड़ा दिल दिखाया था। भारत ने कुल नदी के पानी का करीब 81 फीसदी हिस्सा पाकिस्तान को देने पर सहमति जताई थी ताकि दोनों देशों के बीच विवाद सुलझ सकें। हालांकि, पाकिस्तान के अड़ियल रवैये और भारत की जल परियोजनाओं में लगातार अड़ंगा डालने की वजह से समझौते की मूल भावना यानी गुडविल और फ्रेंडशिप पूरी तरह खत्म हो गई। पाकिस्तान यह झूठा दावा करके विक्टिम कार्ड खेलने की कोशिश कर रहा है कि भारत उसका पानी रोकने वाला है। सच यह है कि पाकिस्तान को मिलने वाले 140 मिलियन एकड़ फीट (MAF) पानी में से वह लगभग 35 MAF पानी समुद्र में बहाकर बर्बाद कर देता है, जो कि भारत के कुल हिस्से से भी ज्यादा है।
बार-बार उल्लंघन
वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता से हुए इस समझौते में पूर्वी नदियों (रावी, व्यास, सतलुज) का अधिकार भारत को और पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम, चिनाब) का अधिकार पाकिस्तान को दिया गया था। विवाद सुलझाने के लिए एक तय प्रक्रिया बनाई गई थी, लेकिन पाकिस्तान ने इसका भी उल्लंघन किया। 2015 में किशनगंगा और रतले परियोजनाओं पर आपत्ति जताते हुए पाकिस्तान ने पहले न्यूट्रल एक्सपर्ट की मांग की, लेकिन 2016 में खुद ही पीछे हटकर 'कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन' की मांग करने लगा। वर्ल्ड बैंक ने दोनों का गठन कर दिया, लेकिन भारत ने कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन की कार्यवाही का कभी समर्थन नहीं किया और न ही इसमें भाग लिया, क्योंकि यह समझौते के नियमों के ही खिलाफ था।
पाकिस्तान को नहीं मिलेगा एक बूंद पानी
समझौता निलंबित होने के बाद से भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर में पानी के प्रबंधन और बिजली उत्पादन से जुड़ी परियोजनाओं पर काम तेज कर दिया है। पिछले 6 दशकों में जम्मू-कश्मीर में 3,300 मेगावाट हाइड्रोपावर क्षमता तैयार की गई थी, जबकि अगले कुछ सालों में ही इसमें 3,500 मेगावाट का इजाफा होगा। कीरू और पकल दुल हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स इसी साल शुरू हो जाएंगे। इसके अलावा क्वार और रतले परियोजनाओं के 2028 तक चालू होने की उम्मीद है।
लेखक के बारे में
Jagriti Kumariजागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।
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