दिल्ली से मैनचेस्टर जा रही थी इंडिगो फ्लाइट, अचानक अफ्रीका के आसमान से लेना पड़ा यू-टर्न; क्यों?
इंडिगो ने अपने बयान में यह भी कहा कि पश्चिम एशिया और उसके आसपास की बदलती स्थिति के कारण उसकी कुछ उड़ानों को लंबे मार्ग अपनाने पड़ सकते हैं या उड़ान के मार्ग में परिवर्तन करना पड़ सकता है।

इंडिगो की मैनचेस्टर जाने वाली एक उड़ान सोमवार को अफ्रीकी देश इरिट्रिया के हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने पर लगे कुछ प्रतिबंधों के कारण दिल्ली लौट आई। सूत्रों ने यह जानकारी दी है। यह उड़ान लीज पर लिए गए बोइंग 787 विमान से संचालित हो रही थी। विमानन कंपनी इंडिगो ने एक बयान में कहा, ''पश्चिम एशिया में मौजूदा स्थिति के कारण अंतिम समय में हवाई क्षेत्र पर लगाए गए प्रतिबंधों की वजह से नई दिल्ली से मैनचेस्टर जाने वाली हमारी उड़ान 6ई 033 को अपने मूल स्थान पर लौटना पड़ा। हम संबंधित अधिकारियों के साथ मिलकर यात्रा फिर से शुरू करने की संभावनाओं का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं।''
सूत्रों ने बताया कि इरिट्रिया के अधिकारियों से कुछ मंजूरी संबंधी समस्याएं थीं, और जोखिम मूल्यांकन के बाद यह निर्णय लिया गया कि उड़ान दिल्ली लाई जाए। यह एयरलाइन एथेंस को छोड़कर लंदन समेत अन्य यूरोपीय शहरों के लिए उड़ानें संचालित करती है और इसके लिए नॉर्वे की नॉर्स अटलांटिक एयरवेज से लीज पर लिए गए बोइंग 787-9 विमानों का इस्तेमाल करती है।
यूरोप में एंट्री से पहले कहां उड़ान
पश्चिम एशिया में संघर्ष के मद्देनजर नियामक 'यूरोपीय संघ विमानन सुरक्षा एजेंसी' (ईएएसए) ने अपने साथ पंजीकृत विमानों, जिनमें नॉर्स अटलांटिक के विमान भी शामिल हैं, को पश्चिम एशिया के कुछ हवाई क्षेत्रों, जिनमें सऊदी अरब भी शामिल है, में उपयोग से प्रतिबंधित कर दिया है। इसके परिणामस्वरूप, इंडिगो अब यूरोप में प्रवेश करने के लिए अफ्रीका के रास्ते लंबा उड़ान मार्ग अपना रही है। एयरलाइन की उड़ान यूरोप में प्रवेश करने से पहले अरब सागर, इथियोपिया, इरिट्रिया, लाल सागर और मिस्र के ऊपर से उड़ान भरती है।
उड़ानों को लंबे मार्ग अपनाने पड़ सकते हैं
एथेंस के लिए उड़ानें इंडिगो के ए321 एक्सएलआर विमानों द्वारा संचालित की जाती हैं। आम तौर पर भारतीय विमानन कंपनियां यूरोप के लिए उड़ानें संचालित करने के लिए सऊदी अरब सहित पश्चिम एशिया के हवाई क्षेत्रों का उपयोग करती हैं। इंडिगो ने अपने बयान में यह भी कहा कि पश्चिम एशिया और उसके आसपास की बदलती स्थिति के कारण उसकी कुछ उड़ानों को लंबे मार्ग अपनाने पड़ सकते हैं या उड़ान के मार्ग में परिवर्तन करना पड़ सकता है।
लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।


