आर्टिफिशियल वकील मत बनिए, AI का सोच-समझकर करिए इस्तेमाल; HC जजों की चेतावनी

Mar 10, 2026 12:47 pm ISTJagriti Kumari लाइव हिन्दुस्तान
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HC जजों ने कहा कि AI की गलतियों से कई समस्याएं पैदा हो रही हैं। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि एक याचिका में एक वकील ने एक केस का हवाला दिया, लेकिन जब उनसे उसका सिटेशन मांगा गया तो उनके पास कोई सिटेशन नहीं था।

आर्टिफिशियल वकील मत बनिए, AI का सोच-समझकर करिए इस्तेमाल; HC जजों की चेतावनी

भारत और ब्रिटेन-अमेरिका के कुछ वरिष्ठ जजों ने सोमवार को न्यायपालिका और अदालतों की कार्यवाही में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई है। इस दौरान जजों ने वकीलों को चेतावनी दी है कि अदालतों में AI टूल्स का इस्तेमाल बहुत सावधानी से किया जाना चाहिए। जजों ने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि ChatGPT जैसे टूल्स का इस्तेमाल करते समय जानकारी की सही तरीके से जांच करना बेहद जरूरी है। जजों की एक पैनल ने चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि अगर बिना जांच के AI पर भरोसा किया गया तो वकील ‘आर्टिफिशियल वकील’ बन जाएंगे।

यह कार्यक्रम चंडीगढ़ में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के पास स्थित ओपन हैंड मॉन्यूमेंट पर आयोजित किया गया था। इंडिया इंटरनेशनल डिस्प्यूट वीक 2026 के दौरान आयोजित पैनल डिस्कशन में राजस्थान हाईकोर्ट और पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के अलावा ब्रिटेन और अमेरिका के जज भी शामिल हुए।

सुप्रीम कोर्ट कर रहा गाइडलाइंस बनाने की तैयारी

चर्चा के दौरान राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस अरुण मोंगा ने कहा कि AI से तैयार सामग्री को हमेशा उसके मूल स्रोत से क्रॉस-चेक करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि हाल ही में एक मामले में ट्रायल कोर्ट के एक जज ने अपने आदेश में AI से बने केस लॉ का हवाला दे दिया था। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत AI के इस्तेमाल को लेकर कुछ गाइडलाइंस बनाने की तैयारी भी कर रहा है।

'सुनवाई टालने की कोशिश करते हैं वकील'

वहीं पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस विनोद भारद्वाज ने कहा कि टेक्नोलॉजी से न्यायिक प्रक्रिया में कई फायदे हुए हैं, लेकिन AI की गलतियों से समस्याएं भी पैदा हो रही हैं। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि एक याचिका में एक वकील ने एक केस का हवाला दिया, लेकिन जब उनसे उसका सिटेशन मांगा गया तो उनके पास कोई सिटेशन नहीं था। बाद में कोर्ट के रिसर्चर्स ने भी खोज की, लेकिन ऐसा कोई केस अस्तित्व में ही नहीं था। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में जजों का काम कई गुना बढ़ जाता है, क्योंकि उन्हें उन फैसलों को भी जांचना पड़ता है जो असल में मौजूद ही नहीं होते। जस्टिस भारद्वाज ने यह भी बताया कि कुछ वकील हाइब्रिड कोर्ट सिस्टम का गलत फायदा उठाकर मामलों की सुनवाई टालने की कोशिश करते हैं।

वहीं पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस हाकेश मनुजा ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया पूरी तरह AI को नहीं सौंपी जा सकती। उन्होंने कहा कि AI न्याय व्यवस्था की मदद जरूर कर सकता है, लेकिन फैसला करने की प्रक्रिया इंसानों के हाथ में ही रहनी चाहिए। जस्टिस मनुजा ने यह भी कहा कि केरल हाईकोर्ट में जजों के लिए एक AI टूल का इस्तेमाल हो रहा है, जो केस फाइल और दलीलों का सार तैयार कर देता है। इससे जजों को फैसले लिखने के लिए ज्यादा समय मिल सकता है। हालांकि उन्होंने कहा कि ऐसी जानकारी को भी जांचना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि AI की ट्रेनिंग सिर्फ युवाओं को ही नहीं, बल्कि जजों को भी दी जानी चाहिए।

क्या बोले ब्रिटिश और अमेरिकी जज?

ब्रिटेन के फर्स्ट टियर ट्रिब्यूनल जज सुखी गिल ने कहा कि अदालतों में कई बार AI से तैयार सामग्री के कारण वकीलों को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि AI से मिली जानकारी को कानून और केस लॉ से जरूर मिलान करना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि ब्रिटेन में टेक्नोलॉजी की मदद से कई अनावश्यक अपीलों को रोका जा रहा है। वहीं अमेरिका के टेक्सास स्थित हैरिस काउंटी सिविल कोर्ट की जज मनप्रीत मोनिका सिंह ने बताया कि अमेरिका में केस फाइलों का डिजिटलीकरण 2018 के बाद शुरू हुआ। उन्होंने कहा कि दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका में टेक्नोलॉजी सपोर्ट के लिए भारत की मदद ली जाती है। उन्होंने कहा कि अमेरिका में ज्यादातर मामलों की सुनवाई एक से डेढ़ साल के भीतर पूरी हो जाती है, लेकिन भारत में जजों के पास बहुत ज्यादा मामलों का बोझ होता है।

Jagriti Kumari

लेखक के बारे में

Jagriti Kumari

जागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।

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