डॉलर की नहीं, पाकिस्तान के मुकाबले भी गिरा भारत का रुपया? जानिए पिछले 10 साल का हाल
क्या सच में भारतीय रुपया पाकिस्तान, चीन और बांग्लादेश की करेंसी के मुकाबले गिर गया है? जानिए पिछले 10 साल में रुपये की ऐतिहासिक गिरावट का असली सच और इसके मुख्य कारण।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का सीधा असर भारतीय करंसी पर पड़ रहा है। मंगलवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 18 पैसे टूटकर 96.38 के नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया। इस गिरावट ने बाजार के सेंटिमेंट पर भी दबाव बढ़ा दिया है।
लगातार कमजोर हो रहा है रुपया
5% से ज्यादा की गिरावट: फरवरी के अंत में ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक रुपये की वैल्यू में 5% से अधिक की गिरावट आ चुकी है। वहीं, सिर्फ पिछले एक हफ्ते में इसमें 2.2% की कमी दर्ज की गई है।
पिछले सत्र का हाल: इससे पहले सोमवार को रुपया 96.19 के स्तर पर खुला था और दिन के कारोबार में फिसलकर 96.39 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया था।
96 का स्तर हुआ पार: पिछले हफ्ते शुक्रवार को ही भारतीय मुद्रा ने डॉलर के मुकाबले 96 का अहम स्तर पार किया था और यह 95.81 पर बंद हुआ था।
क्या पाकिस्तान के मुकाबले भी गिरा भारत का रुपया?
सोशल मीडिया और कुछ मंचों पर यह दावा किया जा रहा है कि भारतीय रुपया सिर्फ डॉलर ही नहीं, बल्कि पड़ोसी देश पाकिस्तान की करेंसी (PKR) के मुकाबले भी कमजोर हुआ है? अगर हम पिछले 10 साल (2016 से 2026) के ताजा आंकड़ों पर नजर डालें, तो तस्वीर इस दावे से बिल्कुल उलट नजर आती है, हालांकि हालिया महीनों के कुछ आंकड़े जरूर ध्यान खींचने वाले हैं। यानी पिछले करीब एक साल में भारत का रुपया पाकिस्तान के मुकाबले कमजोर हुआ है।
पिछले 10 सालों का सच: भारतीय रुपये का मजबूत दबदबा
लंबे समय के आंकड़ों की बात करें तो यह धारणा पूरी तरह से गलत है कि पिछले एक दशक में भारतीय रुपया पाकिस्तानी करेंसी के मुकाबले कमजोर हुआ है। हकीकत यह है कि बीते 10 सालों में पाकिस्तानी रुपये के मुकाबले भारतीय करेंसी ने भारी मजबूती दर्ज की है।
2016 की स्थिति: साल 2016 में 1 भारतीय रुपया लगभग 1.56 पाकिस्तानी रुपये के बराबर था। पाकिस्तान में जारी राजनीतिक अस्थिरता, घटते विदेशी मुद्रा भंडार और बेकाबू महंगाई के कारण पाकिस्तानी रुपया पिछले एक दशक में लगातार टूटता गया, जबकि भारतीय अर्थव्यवस्था ने तेजी से विकास किया।
उच्चतम स्तर: यह अंतर इतना बढ़ा कि साल 2023-2024 के दौरान 1 भारतीय रुपये की कीमत 3.36 PKR तक पहुंच गई थी। इसका सीधा अर्थ यह है कि पिछले 10 सालों के सफर में भारतीय रुपये ने पाकिस्तानी रुपये के मुकाबले अपनी वैल्यू को लगभग दोगुना कर लिया है।
आंकड़ों की जुबानी: पिछले 10 साल का सफर
नीचे दी गई टेबल में आप साफ देख सकते हैं कि किस तरह 2016 से भारतीय रुपये का ग्राफ पाकिस्तानी रुपये के मुकाबले ऊपर की तरफ गया है:
| साल | 1 भारतीय रुपया (INR) = पाकिस्तानी रुपया (PKR) |
|---|---|
| 2016 | 1.56 PKR |
| 2018 | 1.99 PKR |
| 2020 | 2.19 PKR |
| 2022 | 2.74 PKR |
| 2024 | 3.34 PKR |
| 2026 | 2.89 PKR |
तो फिर रुपये के गिरने की बात क्यों हो रही है?
लॉन्ग टर्म (10 साल) में भले ही भारत का रुपया बहुत मजबूत स्थिति में हो, लेकिन अगर हम केवल पिछले 1 से 1.5 साल के आंकड़ों का विश्लेषण करें, तो स्थिति थोड़ी बदलती हुई दिखती है। रुपये के कमजोर होने की अफवाहों को यहीं से हवा मिली है।
हालिया गिरावट, कितना बदलाव?
2024 के मध्य में 1 रुपये की कीमत 3.34 PKR के आसपास थी, जो मई 2026 में घटकर लगभग 2.89 PKR पर आ गई है। पिछले एक साल के दौरान (मई 2025 से मई 2026), भारतीय रुपये ने पाकिस्तानी रुपये के मुकाबले लगभग 12% की गिरावट दर्ज की है। सरल शब्दों में कहें तो, हां- पिछले एक साल में पाकिस्तान के मुकाबले भारत का रुपया गिरा है।
इस शॉर्ट-टर्म बदलाव के पीछे कई कारण हैं। पाकिस्तान द्वारा आईएमएफ (IMF) से बेलआउट पैकेज हासिल करना और कड़े आर्थिक कदम उठाकर अपनी अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के शुरुआती प्रयास इसका एक बड़ा कारण हैं। वहीं दूसरी तरफ, ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता और डॉलर की मजबूती ने दुनिया भर की करेंसीज (जिसमें भारतीय रुपया भी शामिल है) पर दबाव बनाया है।
रुपया- एशिया की सबसे कमजोर करेंसी?
मई 2026 तक के ताजा आर्थिक और विदेशी मुद्रा बाजार के आंकड़ों के अनुसार, यह सच है कि भारतीय रुपये ने अपने एशियाई पड़ोसियों के मुकाबले काफी कमजोर प्रदर्शन किया है। ग्लोबल फाइनेंशियल रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय रुपया 2025 और 2026 में अब तक एशियाई करेंसियों में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली करेंसी रहा है। चीन (CNY), मलेशिया (MYR) और सिंगापुर (SGD) जैसे देशों की अर्थव्यवस्थाओं ने अपनी करेंसी को मजबूती दी है, जिसके चलते इन देशों की मुद्राओं के सामने भी भारतीय रुपया 6% से 9% तक कमजोर हुआ है। वहीं, इंडोनेशियाई रुपिया (IDR) के सामने रुपये को "लगभग स्थिर" है, जो कि मार्केट ट्रेंड्स से मेल खाता है।
आखिर क्यों टूट रहा है रुपया?
फॉरेक्स (विदेशी मुद्रा) ट्रेडर्स के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव की वजह से ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत जैसी उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं की मुश्किलें बढ़ा रही हैं। तेल महंगा होने से भारत का आयात खर्च बढ़ रहा है, जिससे डॉलर की निकासी तेज हो गई है। इसके साथ ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) का दबाव भी रुपये को कमजोर कर रहा है।
हालांकि, अगर रिजर्व बैंक (RBI) दखल देता है और सोने-चांदी के आयात पर कुछ पाबंदियां लागू होती हैं, तो निचले स्तर पर रुपये को सपोर्ट मिल सकता है। आने वाले दिनों में USD-INR स्पॉट प्राइस 96 से 96.60 के दायरे में ट्रेड करने की उम्मीद है। रुपये में भले ही कमजोरी है, लेकिन दलाल स्ट्रीट पर मंगलवार को कारोबार की शुरुआत पॉजिटिव नोट पर हुई। शुरुआती कारोबार में बेंचमार्क इंडेक्स 0.3% की बढ़त के साथ खुले।
अगर 10 साल के नजरिए से देखा जाए, तो "भारतीय रुपये के पाकिस्तान के मुकाबले गिरने" की बात तथ्यों के आधार पर पूरी तरह निराधार है। भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत फंडामेंटल्स के चलते लंबी अवधि में INR ने PKR को काफी पीछे छोड़ दिया है। यह जरूर है कि पिछले एक साल में पाकिस्तानी करेंसी ने अपने ऐतिहासिक निचले स्तर से थोड़ी रिकवरी की है, जिससे दोनों के बीच का फासला थोड़ा कम हुआ है, लेकिन 10 साल की इस आर्थिक दौड़ में भारत का रुपया ही निर्विवाद रूप से विजेता है।
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अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।
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