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एक-दो नहीं, इस साल 19 युद्धपोत शामिल करेगी नौसेना; चीन की चुनौती को भारत का जवाब

एक-दो नहीं, इस साल 19 युद्धपोत शामिल करेगी नौसेना; चीन की चुनौती को भारत का जवाब

संक्षेप:

इस लिस्ट में इक्षाक श्रेणी का सर्वे पोत और निस्तार श्रेणी का डाइविंग सपोर्ट पोत भी शामिल हैं। इतने बड़े पैमाने पर कमीशनिंग को संभव बनाने में ‘इंटीग्रेटेड कंस्ट्रक्शन’ पद्धति की अहम भूमिका है।

Jan 07, 2026 09:03 am ISTAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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भारतीय नौसेना अपने इतिहास की सबसे बड़ी वार्षिक वृद्धि की ओर अग्रसर है। इस वर्ष 2026 में नौसेना 19 युद्धपोतों को कमीशन करने जा रही है, जो एक वर्ष में सबसे बड़ी वृद्धि होगी। पिछले वर्ष 2025 में नौसेना ने 14 जहाजों को कमीशन किया था, जिसमें एक पनडुब्बी भी शामिल थी। सूत्रों के अनुसार, यह उत्पादन गति इतिहास में अभूतपूर्व है और यह स्वदेशी जहाज निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र की परिपक्वता को दर्शाती है।

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ट्रिब्यून ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि 2026 नौसेना के विस्तार का शिखर वर्ष रहेगा। इस दौरान नीलगिरी श्रेणी के मल्टी-रोल स्टेल्थ फ्रिगेट्स की संख्या में भी इजाफा होगा। इस श्रेणी का अग्रणी पोत जनवरी 2025 में सेवा में आया था, जिसके बाद अगस्त 2025 में आईएनएस हिमगिरि और आईएनएस उदयगिरि का कमीशनिंग हुआ। चालू वर्ष में इस श्रेणी के कम से कम दो और पोत नौसेना में शामिल होने की उम्मीद है।

इसके अलावा, सूची में इक्षाक श्रेणी का सर्वे पोत और निस्तार श्रेणी का डाइविंग सपोर्ट पोत भी शामिल हैं। इतने बड़े पैमाने पर कमीशनिंग को संभव बनाने में ‘इंटीग्रेटेड कंस्ट्रक्शन’ पद्धति की अहम भूमिका है। इस प्रक्रिया में जहाज के ढांचे, सुपर-स्ट्रक्चर और आंतरिक प्रणालियों को 250 टन के ब्लॉक्स में तैयार किया जाता है, जिन्हें बाद में जोड़ा जाता है।

इन ब्लॉक्स को इस तरह सटीकता से बनाया जाता है कि वेल्डिंग के बाद केबल और पाइपिंग सहज रूप से फिट हो सके। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से निर्माण के लिए ‘सीक्वेंस’ तैयार किया जाता है- जिसमें सामग्री की सोर्सिंग से लेकर उत्पादन समय-सीमा तक शामिल होती है। नए डिजाइन सॉफ्टवेयर, AI और आधुनिक निर्माण तकनीकों के चलते अब भारतीय शिपयार्ड्स छह साल में जहाज तैयार कर रहे हैं, जबकि पहले यह अवधि 8-9 साल होती थी। सॉफ्टवेयर मशीनरी के लेआउट, उपकरणों और फ्लुइड डायनेमिक्स तक का पूर्वानुमान लगाता है।

बताया जाता है कि रक्षा मंत्रालय ने 10-12 वर्ष पहले युद्धपोतों के लिए इंटीग्रेटेड कंस्ट्रक्शन को अपनाया था, जिसके अब ठोस नतीजे सामने आ रहे हैं।

रणनीतिक स्तर पर, भारत के लक्ष्य चीनी नौसैनिक विस्तार का सामना करना, महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर नैविगेशन की स्वतंत्रता बनाए रखना, क्वॉड और ASEAN के साझेदारों का समर्थन करना और इंडो-पैसिफिक में शक्ति-प्रक्षेपण को सुदृढ़ करना है।

Indian Navy

हालांकि, नौसेना का यह विस्तार अभी भी चीन से कम है। बीजिंग नए जहाजों के आंकड़े सार्वजनिक नहीं करता, लेकिन अमेरिका के पूर्व आकलन के अनुसार, चीन की नौसेना के पास 2025 के अंत तक 395 जहाज और पनडुब्बियां हो सकती हैं- जो पिछले अनुमान 370 से लगभग 25 अधिक हैं।

मई 2025 की एक अमेरिकी रिपोर्ट- चाइना नेवल मॉडर्नाइजेशन: इम्प्लिकेशंस फॉर यूएस नेवी कैपेबिलिटीज, बैकग्राउंड एंड इश्यूज फॉर यूएस कांग्रेस- में कहा गया है कि चीन की नौसेना की कुल बल शक्ति 2025 तक 395 जहाजों तक बढ़ेगी और 2030 तक 435 जहाजों तक पहुंच जाएगी। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि रिकॉर्ड कमीशनिंग और तकनीकी उन्नति के साथ भारतीय नौसेना गुणात्मक बढ़त पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन में भारत की भूमिका और मजबूत होगी।

Amit Kumar

लेखक के बारे में

Amit Kumar
अमित कुमार एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया इंडस्ट्री में नौ वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। हिन्दुस्तान डिजिटल के साथ जुड़ने से पहले अमित ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया है। अमित ने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला (डिजिटल) से की। इसके अलावा उन्होंने वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे मीडिया हाउस में काम किया है, जहां उन्होंने न्यूज रिपोर्टिंग व कंटेंट क्रिएशन में अपनी स्किल्स को निखारा। अमित ने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा और गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी, हिसार से मास कम्युनिकेशन में मास्टर (MA) किया है। अपने पूरे करियर के दौरान, अमित ने डिजिटल मीडिया में विभिन्न बीट्स पर काम किया है। अमित की एक्सपर्टीज पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेट रिपोर्टिंग और मल्टीमीडिया स्टोरीटेलिंग सहित विभिन्न क्षेत्रों में फैली हुई है। अमित नई मीडिया तकनीकों और पत्रकारिता पर उनके प्रभाव को लेकर काफी जुनूनी हैं। और पढ़ें
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