ब्रह्मोस से लैस नेवी के युद्धपोतों की बढ़ेगी रफ्तार, इस देश से आ रही है घातक तकनीक
भारतीय नौसेना के नए मिसाइल जहाजों के लिए कोचीन शिपयार्ड और नॉर्वे की कोंग्सबर्ग के बीच बड़ा करार हुआ है। 18 वॉटरजेट सिस्टम की आपूर्ति से नेवी के युद्धपोतों की रफ्तार, स्टील्थ और मारक क्षमता में भारी इजाफा होगा। पूरी खबर पढ़ें।

नॉर्वे की प्रमुख कंपनी कोंग्सबर्ग मैरीटाइम को भारतीय नौसेना के 'नेक्स्ट-जेनरेशन मिसाइल वेसल' (NGMV) प्रोग्राम के लिए एक अहम कॉन्ट्रैक्ट मिला है। इस समझौते के तहत कंपनी भारतीय नौसेना को 18 बड़े और एडवांस 'कामेवा' वॉटरजेट प्रोपल्शन सिस्टम की सप्लाई करेगी। इस घातक तकनीक से ब्रह्मोस से लैस नेवी के युद्धपोतों की रफ्तार बढ़ेगी।
वॉटरजेट प्रोपल्शन सिस्टम की खासियत
पारंपरिक प्रोपेलर (पंखे) के विपरीत, वॉटरजेट तकनीक पानी को अंदर खींचकर, उसकी गति बढ़ाती है और फिर उसे बहुत तेज गति से बाहर निकालती है। यह तकनीक कई मायनों में पारंपरिक जहाजों से बेहतर है।
बेहतरीन स्टील्थ: रडार की पकड़ में आने की संभावना कम होती है।
तेज गति और एक्सीलरेशन: जहाज को तुरंत तेज गति पकड़ने में मदद मिलती है।
बेहतर पैंतरेबाजी: जहाज को मोड़ने और नियंत्रित करने में आसानी।
कम ड्राफ्ट: उथले (कम गहरे) पानी में भी जहाज आसानी से चल सकता है।
अधिक सुरक्षित: इसमें बाहर की तरफ कोई पंखा (प्रोपेलर) नहीं होता, जिससे इसके क्षतिग्रस्त होने का खतरा कम रहता है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, आधुनिक नौसैनिक जहाजों और विशेष रूप से मिसाइल वेसल्स के लिए ये क्षमताएं बेहद महत्वपूर्ण हैं, जिन्हें चुनौतीपूर्ण समुद्री वातावरण में फुर्ती और सटीकता की आवश्यकता होती है। यह कॉन्ट्रैक्ट कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) के सहयोग से दिया गया है, जहां वर्तमान में इन युद्धपोतों का निर्माण किया जा रहा है।
क्या है NGMV प्रोग्राम?
भारतीय नौसेना का NGMV (नेक्स्ट-जेनरेशन मिसाइल वेसल) प्रोग्राम 9,805 करोड़ रुपये की एक बड़ी पहल है। इसका उद्देश्य एंटी-सरफेस वॉरफेयर (समुद्री सतह पर युद्ध) के लिए छह एडवांस, हाई-स्पीड स्टील्थ कार्वेट (युद्धपोत) हासिल करना है।
समुद्र में दुश्मन के दबदबे को खत्म करने के लिए ये जहाज प्राथमिक स्ट्राइक प्लेटफॉर्म के रूप में काम करेंगे। ये जहाज इन हथियारों से लैस होंगे:
- 8 ब्रह्मोस मिसाइलें
- 24 वीएल-एसआरएसएएम मिसाइलें
- उन्नत रडार और निगरानी प्रणालियां
कंपनियों का बयान
कोचीन शिपयार्ड (CSL) के एक प्रवक्ता ने इस साझेदारी पर खुशी जताते हुए कहा कि कोंग्सबर्ग मैरीटाइम अतीत में कई कमर्शियल प्रोजेक्ट्स में CSL का एक मूल्यवान और विश्वसनीय भागीदार रहा है। यह साझेदारी मजबूत तकनीकी सहयोग और आपसी विश्वास का प्रतीक है। हम इस महत्वपूर्ण परियोजना के कड़े मानकों के अनुरूप कोंग्सबर्ग से एक उच्च गुणवत्ता वाले और विश्वसनीय सिस्टम की उम्मीद कर रहे हैं।
यह कॉन्ट्रैक्ट कोंग्सबर्ग के लिए अब तक का सबसे बड़ा सिंगल वॉटरजेट ऑर्डर है। यह पिछले एक दशक की शांति के बाद बड़े वॉटरजेट निर्माण क्षेत्र में कंपनी की मजबूत वापसी का संकेत है। कोंग्सबर्ग मैरीटाइम में हाई-स्पीड क्राफ्ट के उपाध्यक्ष, एंडर्स वाल्केनेन ने कहा- यह एक मील का पत्थर साबित होने वाला प्रोजेक्ट है और हमारी वॉटरजेट तकनीक पर जताए गए भरोसे का प्रमाण है। हमारे कामेवा वॉटरजेट इन उन्नत मिसाइल जहाजों के लिए जरूरी गति, फुर्ती और विश्वसनीयता प्रदान करेंगे।
लेखक के बारे में
Amit Kumarडिजिटल पत्रकारिता की बदलती लहरों के बीच समाचारों की तह तक जाने की ललक अमित कुमार को इस क्षेत्र में खींच लाई। समकालीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पैनी नजर रखने के साथ-साथ अमित को जटिल विषयों के गूढ़ विश्लेषण में गहरी रुचि है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले अमित को मीडिया जगत में एक दशक का अनुभव है। वे पिछले 4 वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
अमित न केवल समाचारों के त्वरित प्रकाशन में माहिर हैं, बल्कि वे खबरों के पीछे छिपे 'क्यों' और 'कैसे' को विस्तार से समझाने वाले एक्सप्लेनर लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं। डिजिटल पत्रकारिता के नए आयामों, जैसे कि कीवर्ड रिसर्च, ट्रेंड एनालिसिस और एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन को वे बखूबी समझते हैं। उनकी पत्रकारिता की नींव 'फैक्ट-चेकिंग' और सत्यापन पर टिकी है। एक मल्टीमीडिया पत्रकार के तौर पर अमित का सफर देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ रहा है। उन्होंने अमर उजाला, वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे बड़े मीडिया घरानों के साथ काम किया है।
अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।
और पढ़ें

