समुद्र के रास्ते पाकिस्तान पर हमला करने वाली ही थी नौसेना, तभी... ऑपरेशन सिंदूर पर बड़ा खुलासा
ऑपरेशन सिंदूर में नौसेना की भूमिका के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि अब यह कोई छिपी हुई बात नहीं है कि हम समुद्र के रास्ते पाकिस्तान पर हमला करने से बस कुछ ही मिनट दूर थे, तभी उन्होंने हमले रोकने का अनुरोध किया।

लगभग सालभर पहले पाकिस्तान के खिलाफ हुए ऑपरेशन सिंदूर पर नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने कहा है कि भारतीय नौसेना समुद्र के रास्ते पाकिस्तान पर हमला करने से बस कुछ ही मिनट दूर थी, तभी पाकिस्तान ने हमले रोकने का अनुरोध किया। वह नौसेना के अलंकरण समारोह में बोल रहे थे, जहां उन्होंने पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले के बाद चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी विशिष्ट सेवा के लिए दो शीर्ष नौसेना अधिकारियों को 'युद्ध सेवा पदक' से सम्मानित किया।
नौसेना की भूमिका के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, "अब यह कोई छिपी हुई बात नहीं है कि हम समुद्र के रास्ते पाकिस्तान पर हमला करने से बस कुछ ही मिनट दूर थे, तभी उन्होंने हमले रोकने का अनुरोध किया।" बता दें कि पिछले साल 22 अप्रैल को पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला किया था, जिसमें कई भारतीय पर्यटकों की जान चली गई थी। उनका धर्म पूछकर गोली मारी गई थी। इससे पूरे देश में पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा फूट पड़ा था।
भारत ने सात मई आधी रात पाकिस्तान पर ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत की और पीओके व पाकिस्तान के कई इलाकों में एयर स्ट्राइक करके 100 से अधिक लश्कर व जैश के आतंकियों को ढेर कर दिया था। इससे दोनों देशों में तनाव बढ़ गया और पाकिस्तान ने भी भारत पर हमला करने की कोशिश की। हालांकि, इन हमलों को भारत ने विफल कर दिया और फिर पाकिस्तान के कई एयरबेस को निशाना बनाया, जिसमें उसकी सेना को काफी नुकसान पहुंचा। चार दिन बाद पाकिस्तान के गिड़गिड़ाने के बाद दोनों देशों के बीच सीजफायर पर सहमति बन गई।
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि जब से अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्ध शुरू हुआ है, तब से इस क्षेत्र में 20 से ज्यादा व्यापारिक जहाजों पर हमले हुए हैं। उन्होंने बताया कि इस शत्रुतापूर्ण माहौल के बीच लगभग 1,900 जहाज फंसे हुए हैं। उन्होंने आगे कहा कि होर्मुज स्ट्रेट से होने वाला दैनिक यातायात तेजी से घटकर छह-सात जहाजों तक रह गया है, जबकि संघर्ष से पहले इसका औसत लगभग 130 जहाज था।
एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने आगे कहा, "साथ ही, विकसित होती तकनीक और रणनीतियों ने न केवल इस बात को नया रूप दिया है कि संघर्षों की योजना कैसे बनाई जाती है, उन्हें कैसे शुरू किया जाता है और कैसे जारी रखा जाता है, बल्कि उन्होंने गैर-पारंपरिक चुनौतियों को और भी अधिक जटिल बना दिया है, और उनका मुकाबला करना कम अनुमानित हो गया है। परिणामस्वरूप, मौजूदा समुद्री वातावरण में इन चीजों के सावधानीपूर्वक तालमेल की आवश्यकता है। संगठनात्मक स्तर पर फुर्ती और दूरदर्शिता, यूनिट स्तर पर युद्ध की तैयारी और परिचालन प्रभावशीलता और व्यक्तिगत स्तर पर साहस और सही निर्णय लेने की क्षमता पर आधारित पेशेवर उत्कृष्टता। आज, मैं यहां अत्यंत गर्व और प्रसन्नता के साथ यह कहने के लिए खड़ा हूं कि भारतीय नौसेना ने इन सभी आयामों पर लगातार बेहतरीन प्रदर्शन किया है।''
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