16 साल सेना में रहा, फिर चुरा लिया हथियारों का जखीरा; पकड़ा गया डकैती का मास्टरमाइंड
तेलंगाना में सेना की आर्मरी से AK-203 राइफल, INSAS, पिस्टल और कारतूस चोरी करने के आरोप में रिटायर्ड हवलदार गिरफ्तार हुआ है। पुलिस ने चोरी के सभी हथियार बरामद कर लिए। जांच में रिटायरमेंट से नाराजगी समेत कई एंगल सामने आए हैं।

तेलंगाना पुलिस ने सेना की एक आर्मरी से बड़ी संख्या में हथियार और कारतूस चोरी होने के मामले में रिटायर्ड हवलदार को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, चोरी की यह वारदात 30 और 31 अगस्त की दरम्यानी रात सिकंदराबाद कैंटोनमेंट स्थित 20 बटालियन मद्रास रेजिमेंट के मुख्यालय के ‘बेल ऑफ आर्म्स’ से हुई थी। आरोपी की पहचान 37 वर्षीय उप्पुथोल्ला मल्लेश के रूप में हुई है। पुलिस ने उसके पास से चोरी किए गए सभी हथियार और गोला-बारूद बरामद कर लिए हैं।
कौन-कौन से हथियार चोरी हुए थे?
पुलिस के अनुसार, चोरी किए गए हथियारों में शामिल थे-
- चार AK-203 राइफल
- एक 5.56 एमएम INSAS राइफल
- छह 9 एमएम पिस्टल
- एक नागरिक 6.35-बोर पिस्टल
- 9 एमएम के 1,156 राउंड
- AK-203 के 720 राउंड और INSAS के कारतूस
- मैगजीन और अन्य उपकरण
- एक पैसिव नाइट-विजन बाइनोकुलर
पुलिस ने इन सभी हथियारों और गोला-बारूद को बरामद कर लिया है।
सेना में 16 साल रहा, जून में हुई थी अनिवार्य रिटायरमेंट
पुलिस के मुताबिक मल्लेश ने 2010 में भारतीय सेना जॉइन की थी और 20 बटालियन मद्रास रेजिमेंट में हवलदार के तौर पर 16 साल तक सेवा की। उसे इसी साल 30 जून को स्वास्थ्य संबंधी कारणों और अनुशासनहीनता के आरोपों के चलते अनिवार्य रिटायरमेंट दी गई थी।
तेलंगाना के डीजीपी सीवी आनंद ने कहा कि शुरुआती जांच में हथियार चोरी के पीछे कोई मजबूत मकसद सामने नहीं आया है। हालांकि, ऐसा प्रतीत होता है कि मल्लेश समय से पहले रिटायरमेंट के लिए अधिकारियों से नाराज था। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि कहीं उसके किसी राष्ट्रविरोधी या असामाजिक संगठन से संबंध तो नहीं हैं। सैन्य खुफिया एजेंसियां भी मामले की समानांतर जांच करेंगी।
रात 11 बजे बाइक से आर्मरी पहुंचा
पुलिस ने बताया कि 30 अगस्त की रात करीब 11 बजे मल्लेश अपनी दोपहिया गाड़ी से मद्रास रेजिमेंट के कोटे और बटालियन मैगजीन यानी हथियार एवं गोला-बारूद रखने वाली जगह पर पहुंचा। वह वहां पहले काम कर चुका था, इसलिए गेट पर मौजूद सुरक्षाकर्मी ने उसे देखकर कोई संदेह नहीं किया।
पुलिस के अनुसार, मल्लेश पहले हथियार इकाई में दाखिल हुआ और हथियारों के साथ उनमें इस्तेमाल होने वाला गोला-बारूद तथा नाइट-विजन बाइनोकुलर भी चुरा लिया। उसने सामान अपनी गाड़ी पर रखा और पास के एक मंदिर तक गया, जहां उसे उतार दिया। इसके बाद वह दोबारा आर्मरी में पहुंचा और ‘बेल ऑफ आर्म्स’ के दूसरे हिस्से में जाकर वहां से मैगजीन चोरी कर लीं।
कार में हथियार रखकर यात्रियों को बैठाया
पुलिस के मुताबिक, आर्मरी से चोरी करने के बाद मल्लेश अपनी बाइक से कुछ किलोमीटर आगे गया और चोरी का सामान अपनी मारुति ब्रेजा कार में रख लिया। वह इस कार से यात्रियों को ले जाकर अपनी रोजी-रोटी कमाता था। इसके बाद वह श्रीशैलम रोड की तरफ बढ़ा और रास्ते में यात्रियों को कार में बैठाया, ताकि उस पर किसी को शक न हो। यात्रियों को रास्ते में उतारने के बाद वह अपने पैतृक गांव अमराबाद पहुंचा।
सुबह आर्मरी में हथियार गायब मिले
31 अगस्त की सुबह हथियार केंद्र के प्रभारी विनोद कुमार नाइक ने हथियारों के गायब होने की जानकारी दी और शिकायत दर्ज कराई। सेना की शिकायत के आधार पर बोलारम पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। मामले की जांच में हैदराबाद टास्क फोर्स, स्पेशल ऑपरेशंस टीम (SOT), कानून-व्यवस्था पुलिस और खुफिया अधिकारियों को शामिल किया गया। शुरुआती जांच में पुलिस को शक था कि चोरी में किसी अंदरूनी व्यक्ति की भूमिका हो सकती है और बाहरी व्यक्ति की संलिप्तता की संभावना को खारिज किया गया था।
54 छुट्टी पर गए जवानों से भी पूछताछ
जांच के दौरान पुलिस ने उन लोगों के बारे में जानकारी जुटाई, जिन्हें ‘बेल ऑफ आर्म्स’ तक पहुंच हासिल थी। हथियार स्टोर के प्रभारी विनोद कुमार और गोला-बारूद स्टोर के प्रभारी बल्ली मधु से भी पूछताछ की गई। हालांकि, पुलिस को दोनों के चोरी से जुड़े होने का कोई सबूत नहीं मिला।
जांचकर्ताओं ने उन 16 जवानों की भी पहचान की, जो नियमित रूप से इन आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल करते थे। इसके अलावा सैन्य खुफिया अधिकारियों से मिली जानकारी के आधार पर छुट्टी पर गए 54 सैन्यकर्मियों से भी पूछताछ की गई। पुलिस ने सात पेंशन प्राप्त पूर्व सैन्यकर्मियों से भी पूछताछ की। साथ ही यह भी जांच की गई कि चोरी का किसी ड्रग माफिया या संगठित अपराध से संबंध तो नहीं है।
फोन रिकॉर्ड और WhatsApp चैट ने बढ़ाया शक
जांच में पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के साथ डॉग स्क्वॉड और फिंगरप्रिंट विश्लेषण का भी इस्तेमाल किया। दो पूर्व सैन्यकर्मियों से पूछताछ हुई, जो पहले हवलदार के तौर पर काम कर चुके थे। इनमें प्रकाशम जिले के टीपीएस राव और नागरकुर्नूल जिले के मल्लेश उर्फ राजू शामिल थे। जांच के दौरान मल्लेश की गतिविधियों पर पुलिस का ध्यान गया। 7 सितंबर को टास्क फोर्स और खुफिया अधिकारियों की टीम नागरकुर्नूल जिले पहुंची और आगे की जांच की।
पुलिस के मुताबिक, मल्लेश ने शुरुआत में अपनी गतिविधियों के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी और जब उसे पहली बार पूछताछ के लिए बुलाया गया तो उसने प्रतिक्रिया नहीं दी। उसके फोन कॉल रिकॉर्ड और WhatsApp चैट भी डिलीट मिले। पूछताछ के दौरान वह घबराया हुआ नजर आया, जिससे पुलिस का शक और गहरा गया।
पत्नी के सामने पूछताछ में कबूल की चोरी
डीजीपी सीवी आनंद के मुताबिक, इसके बाद पुलिस ने मल्लेश की पत्नी को मामले की गंभीरता समझाई और उसकी मौजूदगी में मल्लेश से पूछताछ की। पुलिस का कहना है कि पत्नी की लगातार पूछताछ के बाद मल्लेश ने कथित तौर पर चोरी की बात कबूल कर ली।
पूछताछ में सामने आया कि मल्लेश चोरी किए गए हथियारों को अपने पैतृक गांव ले गया था। शुरुआत में उसने हथियारों को घास के ढेर में छिपाया। बाद में एक दोस्त की मदद से 6 सितंबर को उन्हें दूसरे घास के ढेर से निकालकर गांव के एक घर में रखा गया। पुलिस के अनुसार, 8 सितंबर को हथियारों को फिर दूसरी जगह ले जाया गया।
आतंकी कनेक्शन से लेकर ड्रग माफिया एंगल तक जांच
डीजीपी ने कहा कि पुलिस मामले की कई कोणों से जांच कर रही है। इसमें संभावित आतंकी गतिविधि और ड्रग माफिया से जुड़े एंगल की भी जांच शामिल है। हालांकि, फिलहाल पुलिस को ऐसा लगता है कि मल्लेश ने समय से पहले सेवानिवृत्ति से नाराज होकर अकेले ही चोरी को अंजाम दिया।
मल्लेश के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 331(4) यानी रात में चोरी के लिए घर में सेंध लगाने और धारा 305 यानी सार्वजनिक संपत्ति की चोरी के गंभीर रूप के तहत मामला दर्ज किया गया है। उसे स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।


