ईरान जंग के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में युद्धपोत भेजेगा भारत, क्या है सरकार का प्लान?
ईरान युद्ध के कारण रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कई जहाज फंस गए हैं, जिससे वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति पर असर पड़ा है। ऐसे में भारत अपने जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नौसेना के युद्धपोत भेजने के विकल्प पर विचार कर रहा है।

ईरान युद्ध के कारण रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कई जहाज फंस गए हैं, जिससे वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति पर असर पड़ा है। ऐसे में भारत अपने जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नौसेना के युद्धपोत भेजने के विकल्प पर विचार कर रहा है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने जहाजरानी महानिदेशालय (क्रू ब्रांच) के कैप्टन पीसी मीना के हवाले से बताया कि भारतीय जहाज मालिकों द्वारा नौसैनिक सुरक्षा की मांग किए जाने के बाद सरकार इस विकल्प पर विचार कर रही है। बता दें कि पाकिस्तान पहले ही अपने दो जहाजों को वापस लाने के लिए नौसेना का इस्तेमाल कर रही है।
द हिंदू अखबार ने भी रविवार को अपनी रिपोर्ट में बताया कि भारतीय नौसेना के युद्धपोतों को वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षित वापस लाने के लिए मार्गदर्शन और सुरक्षा प्रदान करने के लिए भेजा जा सकता है। रिपोर्ट में वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि फारस की खाड़ी में फंसे जहाजों को नौसैनिक एस्कॉर्ट देने की योजना पर विचार किया जा रहा है और इस पर अगले दो दिनों में फैसला हो सकता है।
दरअसल, 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों के बाद ईरान ने फारस की खाड़ी में स्थित रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य को अवरुद्ध कर दिया है। यह संघर्ष अब 11वें दिन में प्रवेश कर चुका है और इसके कारण कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो रही है। ब्रोकरेज फर्म जेफरीज के अनुसार, भारत के कच्चे तेल की लगभग 55 प्रतिशत आपूर्ति मध्य पूर्व से होती है, जबकि देश के कुल तेल आयात का करीब 35 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है।
भारत अपनी एलपीजी की लगभग दो-तिहाई जरूरत आयात के माध्यम से पूरी करता है। इसका अधिकांश हिस्सा संयुक्त अरब अमीरात, कतर, सऊदी अरब और कुवैत जैसे खाड़ी देशों से आता है। भारत के एलपीजी आयात का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा इसी रणनीतिक जलमार्ग से होकर गुजरता है।
कितने भारतीय जहाज फंसे हैं?
टाइम्स ऑफ इंडिया की 4 मार्च की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान युद्ध के कारण फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में भारतीय ध्वज वाले लगभग 38 वाणिज्यिक जहाज फंसे हुए हैं, जिन पर 1100 से अधिक नाविक सवार हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय जहाजरानी मंत्री सरबानंद सोनोवाल ने डीजी शिपिंग समेत संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक की और उन्हें भारतीय नाविकों की सुरक्षा तथा समुद्री संपत्तियों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। इन फंसे हुए जहाजों में तेल और पीएनजी ले जाने वाले टैंकर भी शामिल हैं, जो गोलीबारी के खतरे के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य पार नहीं कर पा रहे हैं।
लेखक के बारे में
Devendra Kasyapदेवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।
देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।
मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।
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