ऐसी हरकत दोबारा की तो बर्दाश्त नहीं करेंगे, अरुणाचल को लेकर भारत ने चीन को चेताया
चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग के इस सप्ताह ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत आने की संभावना है। इस दौरान जिनपिंग और पीएम मोदी की मुलाकात हो सकती है। इससे पहले भारत ने सख्त रुख अपनाया है।

अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों की कथित घुसपैठ की खबरों के बीच भारत ने चीन को चेतावनी दे दी है। भारत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि उसकी सेना की ऐसी हरकतें कतई स्वीकार्य नहीं हैं। साथ ही भारत ने यह भी चेताया है कि भविष्य में इस तरह की हरकतें दोबारा ना हो।
इससे पहले इस मुद्दे पर रविवार को दोनों देशों के शीर्ष सैन्य कमांडरों की अहम बैठक हुई। इसमें पूर्वी क्षेत्र में LAC से जुड़े अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक देर रात तक जारी रही। सूत्रों के मुताबिक अरुणाचल के ऊपरी सुबनसिरी जिले के टाकसिंग में हाल में चीनी सैनिकों के घुसने की सूचना के बाद यह बैठक अहम मानी जा रही है। अरुणाचल में भारत की तरफ वाचा-दमाई बैठक बिंदु पर हुई वार्ता में भारतीय सेना की तीसरी कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कालिया ने भारत का नेतृत्व किया। वहीं चीन की ओर से भी समान रैंक के अधिकारी शामिल हुए।
क्यों अहम यह बैठक?
एनएसए अजीत डोभाल की पिछले माह बीजिंग यात्रा के बाद सैन्य कमांडरों की यह बैठक अहम है। डोभाल ने चीनी विदेश मंत्री संग विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता में एलएसी समेत कई मुद्दों पर चर्चा की थी। वहीं पूर्वी क्षेत्र के कमांडरों की यह पहली बैठक थी।
जिनपिंग आ सकते हैं भारत
भारत ने चीन को लेकर यह सख्त रुख ऐसे समय में दिखाया है जब चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग के इस सप्ताह ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत आने की संभावना है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी और जिनपिंग की संभावित द्विपक्षीय बैठक से पहले हुई इस सैन्य वार्ता को अहम माना जा रहा है।
‘संबंधों को केवल सीमा विवाद तक सीमित न रखा जाए’
इससे पहले बीते सप्ताह एक कार्यक्रम में पूर्व प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (CDS) अनिल चौहान ने कहा है कि पड़ोसी देश के साथ सीमा विवाद अब भी सुलझा नहीं है और वास्तविक नियंत्रण रेखा की स्थिति को लेकर भी पूरी तरह परस्पर सहमति नहीं है लेकिन दोनों देशों के बीच संबंधों को केवल सीमा विवाद के मुद्दे तक सीमित नहीं रखा जा सकता।
पूर्व सीडीएस ने कहा, ''सीमा का मुद्दा अब भी सुलझा नहीं है और यहां तक कि एलएसी की कोई पारस्परिक रूप से सहमत परिभाषा भी नहीं है। चीन और भारत एशिया की दो प्रमुख शक्तियां, बड़ी अर्थव्यवस्थाएं और प्राचीन सभ्यताओं वाले देश हैं। दोनों देशों के संबंधों को केवल सीमा विवाद के मुद्दे तक सीमित नहीं रखा जा सकता।” जनरल (सेवानिवृत्त) चौहान ने कहा कि क्योंकि दोनों देश एक-दूसरे के साथ सहयोग भी करते हैं और प्रतिस्पर्धा भी, और क्षेत्रीय और वैश्विक व्यवस्था को लेकर उनके विचार अलग-अलग हैं इसलिए चीन के साथ संवाद और संपर्क बनाए रखना आवश्यक है।


