मैप में क्यों बदलने जा रही दुनिया, UN में भारत की हां; लेकिन जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पर रखी एक शर्त

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UN में पारित इक्वल एरिया मैप प्रोजेक्शन को लेकर MEA ने रुख स्पष्ट किया है। मंत्रालय की तरफ से कहा गया कि यूएन में पारित हुआ यह प्रस्ताव केवल इक्वल एरिया प्रोजेक्शन के लिए है। यह अंतरराष्ट्रीय सीमाओं, विवादित क्षेत्रों के राजनीतिक मानचित्रण से संबंधित नहीं है।

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विदेश मंत्रालय

संयुक्त राष्ट्र संघ में दुनिया के मानचित्र को सही ढंग से दिखाने के लिए अफ्रीकी देश टोगो द्वारा 'इक्वल एरिया मैप प्रोजेक्शन' (बराबरी के क्षेत्रफल वाले नक्शे) का प्रस्ताव लाया गया था। वैश्विक नक्शे में होने वाले इस सुधार का 193 देशों में से भारत समेत 164 देशों ने समर्थन किया था। अब रविवार को विदेश मंत्रालय ने अपना स्पष्ट रुख जाहिर करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र की पहल पर प्रस्तावित विश्व मानचित्र में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को देश के आधिकारिक मानचित्र के अनुरूप दिखाया जाना चाहिए तथा इनका कोई भी ''गलत'' या ''भ्रामक'' चित्रण स्वीकार्य नहीं होगा।

अफ्रीकी देश टोगो की तरफ से पारित इस प्रस्ताव पर शुक्रवार को वोटिंग हुई। इसमें संयुक्त राष्ट्र के 193 देशों में से भारत समेत 164 देशों की 'हां' के साथ यह प्रस्ताव भारी बहुमत से पारित हो गया। नई दिल्ली के रुख को साफ करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि भारत ने इस बात पर जोर दिया है कि यह प्रस्ताव किसी विशेष मानचित्र, मानचित्रण पद्धति या राष्ट्रीय सीमाओं के किसी खास चित्रण का समर्थन नहीं करता।

प्रस्ताव केवल भू-भागों के क्षेत्रफल के अनुरूप वर्गीकरण किए जाने के लिए - विदेश मंत्रालय

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ''भारत ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया और मतदान पर अपने स्पष्टीकरण में 'इक्वल एरिया' (भूभागों के क्षेत्रफल का वास्तविक अनुपात बनाए रखने वाली) मानचित्रण पद्धतियों को बढ़ावा देने के मूल सिद्धांत पर जोर दिया। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख समेत भारत के संप्रभु क्षेत्र को भारत के आधिकारिक मानचित्र के अनुरूप दिखाया जाना चाहिए। कोई भी गलत या भ्रामक चित्रण स्वीकार्य नहीं है।'' उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर हमारा रुख स्पष्ट और अडिग है। इस पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

विवादित क्षेत्रों के संबंध में नहीं है यह प्रस्ताव- विदेश मंत्रालय

जायसवाल ने जोर देकर कहा कि संयुक्त राष्ट्र के इस प्रस्ताव का उद्देश्य एक ऐसी 'इक्वल एरिया' मानचित्रण पद्धतियों के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करना है, जिनमें महाद्वीपों के भूभागों के आपसी क्षेत्रफल का वास्तविक अनुपात बना रहता है। उन्होंने कहा, ''यह प्रस्ताव न तो किसी विशेष विश्व मानचित्र को अपनाता है और न ही उसे प्रमाणित करता है। यह अंतरराष्ट्रीय सीमाओं, विवादित क्षेत्रों या स्थानों के नाम समेत राजनीतिक मानचित्रण से भी संबंधित नहीं है।''

विश्व के मानचित्र को नए हिसाब से बनाने की मांग क्यों?

वर्तमान में हम जिस मानचित्र को वैश्विक मानचित्र मानकर उपयोग करते हैं, वह 16 सदी के मार्केटर मैप की एक कृति है। इसे यूरोपीय देशों द्वारा बनाया गया था। इसलिए इस मैप में ज्यादातर चीजें यूरोप को ही केंद्रित करके बनाई गई है। इसमें अफ्रीका महाद्वीप को ग्रीनलैंड के आकार का बताया गया है, जबकि असल में अफ्रीका महाद्वीप,इ ग्रीनलैंड से करीब 14 गुना बड़ा है।

मार्केटर मैप को सबसे पहले 1569 में यूरोपीय समुद्री यात्रियों की सहायता करने के लिए बनाया गया था। मर्केटर मैप में, पृथ्वी के घुमाव को ध्यान में रखते हुए भूमध्य रेखा (equator) के पास के देशों को उनके वास्तविक आकार से छोटा और ध्रुवों (poles) के पास के देशों को बड़ा दिखाया जाता है।

इस समस्या को दूर करने के लिए, 2018 में एक "इक्वल अर्थ" मैप बनाया गया और फरवरी 2026 में, अफ्रीकी यूनियन के सभी 54 देशों ने इस मैप को अपनाया था। क्योंकि यह "सभी महाद्वीपों, विशेष रूप से अफ्रीका का सटीक चित्रण" करता है। इस मैप को अफ्रीकी यूनियन के देशों के समर्थन से टोगो द्वारा संयुक्त राष्ट्र के सामने पेश किया गया था। इस पर संयुक्त राज्य के 193 देशों में से 164 देशों ने समर्थन किया है, जबकि एस्टोनिया, जॉर्जिया, लिथुआनिया, मोल्दोवा, सर्बिया और यूक्रेन ने मतदान में भाग नहीं लिया। वहीं, संयुक्त राज्य अमेरिका ने इसके खिलाफ एकमात्र मत दिया।

Upendra Thapak

लेखक के बारे में

Upendra Thapak

उपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।

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