
‘डोनाल्ड ट्रंप के आगे सिर झुका लिया’, ट्रेड डील पर क्यों भड़के किसान? खेती और डेयरी पर छिड़ी जंग
भारत और अमेरिका के बीच हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते के बाद सियासत गरमा गई है। जहां सरकार इसे MSMEs के लिए वरदान बता रही है, वहीं संयुक्त किसान मोर्चा ने इसे किसानों के साथ विश्वासघात करार दिया है। जानें इस डील के बारे में पूरी जानकारी।
प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा व्यापार समझौते की घोषणा के एक दिन बाद, भारत सरकार ने आश्वस्त किया है कि देश के संवेदनशील क्षेत्रों जैसे कृषि और डेयरी के हितों की पूरी रक्षा की गई है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, यह सौदा भारतीय अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों के लिए गेम-चेंजर साबित होगा। हालांकि इसके बावजूद विपक्ष समेत कुछ हलकों में विरोध देखा जा रह है।
भारत और अमेरिका के बीच समझौते की घोषणा पर संयुक्त किसान मोर्चा ने जताया आक्रोश
विभिन्न किसान यूनियन के संगठन संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने भारत और अमेरिका के बीच समझौते की घोषणा को किसानों के साथ ऐतिहासिक विश्वासघात करार दिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर डोनाल्ड ट्रंप के फरमानों के आगे बेशर्मीपूर्वक सिर झुकाने का आरोप लगाया। एसकेएम ने एक बयान में प्रधानमंत्री को पिछले साल स्वतंत्रता दिवस पर दिए गए भाषण की याद दिलाई और कहा कि मोदी ने लाल किले की प्राचीर से ऐलान किया था कि वह किसानों के हितों की रक्षा के लिए व्यक्तिगत रूप से भारी कीमत चुकाने के लिए तैयार हैं।
संगठन ने दावा किया कि इस समझौते से अमेरिका को अपने अत्यधिक सब्सिडी वाले कृषि उत्पादों से भारतीय बाजारों को भरने का मौका मिलेगा, जिससे देश का कृषि क्षेत्र बर्बाद हो जाएगा। साल 2020-2021 में किसानों के आंदोलन का नेतृत्व करने वाले एसकेएम ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा- एसकेएम अमेरिकी वस्तुओं पर शून्य प्रतिशत आयात शुल्क की अनुमति देकर जनता, खासकर किसानों, के साथ किए गए विश्वासघात को लेकर मोदी सरकार की कड़ी निंदा करता है। सरकार अमेरिकी साम्राज्यवाद के दबाव के आगे झुक गई है। संगठन ने कहा- इस व्यापार समझौते के कारण भारतीय बाजार अत्यधिक सब्सिडी प्राप्त अमेरिकी कृषि उत्पादों से भर जाएंगे, जिससे भारत के पूरे किसान वर्ग पर विनाशकारी असर पड़ेगा।
बता दें कि भारत और अमेरिका ने सोमवार को एक व्यापार समझौते पर सहमति जताई थी, जिसके तहत अमेरिका भारतीय सामान पर लगाए गए जवाबी टैरिफ को मौजूदा 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करेगा। इससे भारतीय MSMEs और निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में बड़ी राहत मिलेगी। यह घोषणा करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि भारत अमेरिका पर लगने वाले शुल्क को शून्य तक ले जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत ऊर्जा समेत 500 अरब डॉलर से अधिक का अमेरिकी सामान खरीदेगा।
कृषि क्षेत्रों की रक्षा होगी?
अनाज, मक्का, सोयाबीन और जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) भोजन को इस द्विपक्षीय व्यापार समझौते से बाहर रखा जा सकता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसानों और पशुपालन से जुड़े लोगों के हितों पर कोई समझौता नहीं किया गया है। कपड़ा, चमड़ा, समुद्री उत्पाद और रत्न एवं आभूषण जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को इस सौदे से सीधा लाभ मिलेगा।
आयात और निवेश का गणित
राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि भारत अमेरिका से तेल, कोयला, तकनीक और कृषि उत्पादों के रूप में लगभग $500 बिलियन का आयात करेगा। हालांकि, आंकड़ों के लिहाज से यह काफी चौंकाने वाला है क्योंकि वर्ष 2024-25 में भारत का कुल वस्तु आयात $721 बिलियन था। विशेषज्ञों के अनुसार, अगले पांच वर्षों में अमेरिका से वस्तु आयात सालाना $100 बिलियन रहने का अनुमान है (जो पिछले साल $46 बिलियन था)। भारत मुख्य रूप से कच्चे तेल, LNG, हाई-वैल्यू चिप्स, डेटा सेंटर उपकरण, विमान और उसके पुर्जे तथा परमाणु उपकरणों के आयात को बढ़ावा देगा।
अमेरिका को दी जाने वाली कुछ टैरिफ रियायतें चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएंगी। कुछ वस्तुओं को 'आयात कोटा' के माध्यम से अनुमति दी जाएगी, जैसा कि भारत ने हाल ही में यूरोपीय संघ (EU), न्यूजीलैंड और ब्रिटेन के साथ किए गए समझौतों में किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उम्मीद जताई है कि पिछले साल अमेरिका द्वारा लगाए गए कड़े टैरिफ के कारण प्रभावित हुए भारतीय निर्यात में अब तेजी आएगी। उन्होंने कहा कि भारतीय उत्पादों ने पहले ही नए बाजार तलाश लिए हैं और अब अमेरिकी बाजार में दोबारा पहुंच मिलने से निर्यात को और मजबूती मिलेगी। फिलहाल दोनों देशों के अधिकारी वर्तमान में एक संयुक्त बयान तैयार कर रहे हैं, जिसे अगले कुछ दिनों में अंतिम रूप दे दिया जाएगा। यह समझौता आने वाले हफ्तों में पूरी तरह से लागू होने की उम्मीद है।





