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ट्रंप टैरिफ के बीच भारत ने US से की एक और डील, नेवी के लिए 7995 करोड़ के सौदे पर हुए साइन

ट्रंप टैरिफ के बीच भारत ने US से की एक और डील, नेवी के लिए 7995 करोड़ के सौदे पर हुए साइन

संक्षेप:

यह सौदा हिंद महासागर क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ भारत की समुद्री शक्ति को मजबूत करेगा। एमएच-60आर हेलीकॉप्टरों की क्षमता से नौसेना को सबमरीन शिकार और सतह-से-सतह हमलों में बढ़त मिलेगी।

Nov 29, 2025 11:58 am ISTAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ के साए में भी भारत-अमेरिका संबंधों को नई मजबूती मिल रही है। शुक्रवार को दोनों देशों ने भारतीय नौसेना के एमएच-60आर 'सीहॉक' हेलीकॉप्टर बेड़े के रखरखाव के लिए 7,995 करोड़ रुपये का महत्वपूर्ण रक्षा समझौता किया। यह सौदा न केवल नौसेना की परिचालन क्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि व्यापारिक तनाव के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने का संकेत भी देता है। इससे पहले वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि साल के अंत तक व्यापार समझौता होने की संभावना है, जो टैरिफों को कम करने का रास्ता खोलेगा।

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MH-60R हेलीकॉप्टरों को मिलेगा पांच साल का 'कवच'

यह समझौता पांच साल के फॉलो-ऑन सपोर्ट और फॉलो-ऑन सप्लाई सपोर्ट के तहत किया गया है। भारतीय नौसेना ने इन अपग्रेडेड मल्टी-रोल हेलीकॉप्टरों के 24 यूनिट अमेरिकी सरकार से फॉरेन मिलिट्री सेल्स (FMS) कार्यक्रम के तहत 2020 में लगभग 2.4 अरब अमेरिकी डॉलर में खरीदे थे। इनमें से 15 हेलीकॉप्टर अब तक नौसेना में शामिल किए जा चुके हैं। MH-60R हेलीकॉप्टर लॉकहीड मार्टिन द्वारा निर्मित हैं और इन्हें एडवांस एंटी-सबमरीन वॉरफेयर सहित कई आधुनिक सैन्य भूमिकाओं के लिए जाना जाता है।

हालिया दिनों में तीसरा बड़ा रक्षा सौदा

यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका के डिफेंस सिक्योरिटी कोऑपरेशन एजेंसी (DSCA) ने कुछ ही दिन पहले भारत को दो बड़े हथियार पैकेजों की संभावित बिक्री को मंजूरी दी है। इसमें शामिल हैं:

  1. एक्सकैलिबर प्रिसिजन गाइडेड प्रोजेक्टाइल और संबंधित उपकरण- अनुमानित लागत 47.1 मिलियन डॉलर
  2. जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम और संबंधित उपकरण- अनुमानित लागत 45.7 मिलियन डॉलर

आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, नए LOAs पर हस्ताक्षर रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में हुए। मंत्रालय ने बताया कि यह सपोर्ट पैकेज एक व्यापक व्यवस्था है, जिसमें शामिल हैं-

  • स्पेयर पार्ट्स और सपोर्ट इक्विपमेंट की उपलब्धता
  • प्रोडक्ट सपोर्ट व प्रशिक्षण
  • तकनीकी सहायता
  • रिपेयर और कंपोनेंट रीप्लेनिशमेंट
  • भारत में ‘इंटरमीडिएट लेवल’ रिपेयर सुविधाओं और पीरियॉडिक मेंटेनेंस इंस्पेक्शन सेटअप की स्थापना

मंत्रालय ने कहा कि भारत में इन सुविधाओं के विकास से लंबे समय में स्वदेशी क्षमता निर्माण होगा और अमेरिका पर निर्भरता कम होगी, जो सरकार के आत्मनिर्भर भारत विजन के अनुरूप है। इससे भारतीय MSMEs और अन्य घरेलू कंपनियों को भी रक्षा विनिर्माण और सेवाओं में नए अवसर मिलेंगे।

परिचालन क्षमता में होगा बड़ा इजाफा

मंत्रालय ने यह भी कहा कि यह सतत समर्थन पैकेज MH-60R हेलीकॉप्टरों की ऑपरेशनल उपलब्धता और मेंटेनबिलिटी को और अधिक मजबूत करेगा। ये हेलीकॉप्टर हर मौसम में उपयोग योग्य हैं और दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने व उन्हें निशाना बनाने की अत्याधुनिक क्षमता रखते हैं।

इस नए समझौते के साथ, भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग एक नए स्तर पर पहुंच गया है, और भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा क्षमता और अधिक सुदृढ़ होने जा रही है।

बता दें कि यह बेड़ा फरवरी 2020 में 15,157 करोड़ रुपये के मूल समझौते के तहत खरीदा गया था। पहली तीन इकाइयां 2021 में डिलीवर हुईं, और मार्च 2024 में कोच्चि के आईएनएस गरुड़ पर INAS 334 स्क्वाड्रन के रूप में पूरी तरह तैनात हो गया। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह सौदा लंबे समय में करोड़ों डॉलर की बचत करेगा, क्योंकि भारत में रखरखाव सुविधाओं का विकास होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सौदा हिंद महासागर क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ भारत की समुद्री शक्ति को मजबूत करेगा। एमएच-60आर हेलीकॉप्टरों की क्षमता से नौसेना को सबमरीन शिकार और सतह-से-सतह हमलों में बढ़त मिलेगी।

व्यापारिक तनाव के बीच सकारात्मक संकेत

यह रक्षा सौदा ऐसे समय में आया है जब अगस्त 2025 के अंत में ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिए थे। इसमें 25 प्रतिशत 'जवाबी' टैरिफ और अतिरिक्त 25 प्रतिशत 'पेनल्टी' (रूस से तेल आयात जारी रखने के कारण) शामिल हैं। ट्रंप ने इसे भारत की 'रूस के साथ निकटता' और पाकिस्तान-भारत तनाव में मध्यस्थता अस्वीकार करने से जोड़ा। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इसे 'अनुचित' बताते हुए कहा कि रूसी तेल आयात वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच 1.4 अरब नागरिकों के लिए आवश्यक है। हालांकि ट्रंप ने हाल ही में कहा कि भारत के साथ सौदा बहुत करीब है। रूसी तेल बंद होने से टैरिफ कम होंगे। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ भारतीय अधिकारी ने पुष्टि की कि साल के अंत तक व्यापार समझौता हो सकता है। इसमें भारत अमेरिकी ऊर्जा आयात बढ़ाएगा, जबकि अमेरिका कृषि उत्पादों (मकई, सोयाबीन) पर छूट देगा। संभावित रूप से टैरिफ 15-20 प्रतिशत तक गिर सकते हैं।

Amit Kumar

लेखक के बारे में

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अमित कुमार एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया इंडस्ट्री में नौ वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। हिन्दुस्तान डिजिटल के साथ जुड़ने से पहले अमित ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया है। अमित ने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला (डिजिटल) से की। इसके अलावा उन्होंने वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे मीडिया हाउस में काम किया है, जहां उन्होंने न्यूज रिपोर्टिंग व कंटेंट क्रिएशन में अपनी स्किल्स को निखारा। अमित ने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा और गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी, हिसार से मास कम्युनिकेशन में मास्टर (MA) किया है। अपने पूरे करियर के दौरान, अमित ने डिजिटल मीडिया में विभिन्न बीट्स पर काम किया है। अमित की एक्सपर्टीज पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेट रिपोर्टिंग और मल्टीमीडिया स्टोरीटेलिंग सहित विभिन्न क्षेत्रों में फैली हुई है। अमित नई मीडिया तकनीकों और पत्रकारिता पर उनके प्रभाव को लेकर काफी जुनूनी हैं। और पढ़ें
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