भारत को नहीं है अमेरिकी पाबंदियों की परवाह, रूस से खरीदेगा कच्चा तेल

Himanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान
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आपको बता दें कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ट्रंप सरकार द्वारा लगाए गए टैरिफ को खत्म कर चुका है। यह भारत या दुनिया के उन सभी देशों के लिए राहत की बात है जो रूस से तेल खरीद पर टैरिफ का सामना कर रहे थे।

भारत को नहीं है अमेरिकी पाबंदियों की परवाह, रूस से खरीदेगा कच्चा तेल

अमेरिका द्वारा दी गई रूस से तेल खरीद में छूट की मियाद 19 अप्रैल को खत्म हो रही है, लेकिन इसे नजरंदाज कर भारत तेल की खरीद जारी रखेगा। सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों ने यह जानकारी दी। सूत्रों के अनुसार, रूस से तेल खरीद को लेकर जब अमेरिका ने भारत पर 25 फीसदी का अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया था, तब भी यह खरीद बंद नहीं की गई थी। हालांकि उस दौरान खरीद में कमी जरूर आई थी, लेकिन उसके दूसरे कारण थे।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें 64 डालर प्रति बैरल तक आ चुकी थी, जबकि रूस से 60 डालर प्रति बैरल के हिसाब से तेल की खरीद हो रही थी, लेकिन अरब देशों से 64 और रूस से 60 डालर की खरीद देश को बराबर पड़ती है, क्योंकि रूस से लाने का खर्च ज्यादा होता है।

सूत्रों ने कहा कि भारत पहले भी अमेरिका को स्पष्ट कर चुका था कि तेल की खरीद वह अपने देश की 1.4 अरब की आबादी के हितों, बाजार की स्थितियों एवं समग्र ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखकर करेगा। इसी नीति पर भारत आगे भी कायम रहेगा। इसलिए अमेरिकी छूट की मियाद खत्म होने का भारत पर कोई प्रभाव नहीं होगा।

आपको बता दें कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ट्रंप सरकार द्वारा लगाए गए टैरिफ को खत्म कर चुका है। यह भारत या दुनिया के उन सभी देशों के लिए राहत की बात है जो रूस से तेल खरीद पर टैरिफ का सामना कर रहे थे। भारत कच्चे तेल की खरीद प्रक्रिया में आमूलचूल परिवर्तन करेगा। उन्होंने कहा कि मूलत: रूसी तेल की खरीद पर प्रतिबंध नहीं है, बल्कि उन कंपनियों पर प्रतिबंध होते हैं जो इसमें संलग्न होती हैं। इसलिए ऐसी प्रतिबंधित कंपनियों के जरिये भारत खरीद नहीं करेगा तथा इसके नए विकल्प तलाश कर रहा है।

38% कच्चा तेल मंगा रहा

पिछले साल भारत रूस से प्रतिदिन औसतन 26 लाख बैरल कच्चा तेल खरीद रहा था, जो इस साल फरवरी में घटकर 10 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया। मार्च में यह बढ़कर 15 लाख बैरल प्रतिदिन हो गया, अप्रैल में 20 लाख बैरल प्रतिदिन की खरीददारी हो रही है। भारत रूस से 38 फीसदी कच्चा तेल खरीद रहा है, 51 फीसदी के साथ चीन ही सिर्फ भारत से आगे है।

होर्मुज में निर्बाध तरीके से हो आवागमन : पर्वतनेनी

भारत ने पश्चिम एशिया में संघर्ष के दौरान वाणिज्यिक पोतों को निशाना बनाए जाने को निंदनीय बताते हुए होर्मुज में निर्बाध नौवहन एवं वैश्विक व्यापार को जल्द बहाल करने की मांग की है। संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने गुरुवार को राष्ट्र महासभा में पश्चिम एशिया की स्थिति पर वीटो पहल के तहत हुई बहस के दौरान ये बात कही। भारत के लिए होर्मुज से होकर गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाज चिंता का कारण हैं।

Himanshu Jha

लेखक के बारे में

Himanshu Jha

बिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।


एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।


हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।


काम के इतर, हिमांशु को सिनेमा का विशेष शौक है। वे विशेष रूप से सियासी और क्राइम बेस्ड वेब सीरीज़ देखना पसंद करते हैं, जो कहीं न कहीं समाज और सत्ता के समीकरणों को समझने की उनकी जिज्ञासा को भी प्रदर्शित करता है।

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