नेपाल को रोज 18 घंटे बिजली देगा भारत, बाढ़ से हाहाकार के बाद दिखाया बड़ा दिल
नेपाल में आई बाढ़ से 7 बड़ी हाइड्रोपावर परियोजनाओं और 5 सौर संयंत्रों को नुकसान पहुंचा है। इससे कुल मिलाकर लगभग 275 मेगावाट बिजली आपूर्ति में रुकावट आ गई है। अब भारत संकट की घड़ी में सामने आया है।

पड़ोसी देश नेपाल बीते महीने देश में आई भीषण बाढ़ से उबरने की कोशिश कर रहा है। सैकड़ों की मौत, अनजान लाशें, हजारों लापता लोग और अथाह मलबा, नेपाल फिलहाल इन सब से जूझ रहा है। इस बीच बाढ़ में देश की कई बिजली परियाजनाओं के बर्बाद हो जाने के बाद अब भारत नेपाल की मदद के लिए आगे आया है। भारत अब नेपाल को हर दिन करीब 18 घंटे की बिजली सप्लाई करेगा।
यह मदद तत्काल प्रभाव से लागू होगी। बिजली मंत्रालय की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक भारत की ओर से दी गई यह मदद 13 सितंबर से शुरू होकर 31 दिसंबर 2026 तक लागू रहेगी। इसके तहत नेपाल को हर दिन मध्यरात्रि रात 12 बजे से लेकर शाम 6 बजे तक बिजली दी जाएगी।
नेपाल को कहां से मिलेगी बिजली?
सोमवार को भारतीय दूतावास के सूत्रों ने भारत के बिजली मंत्रालय के एक नोटिस का हवाला देते हुए बताया कि मुजफ्फरपुर-ढलकेबार 400 केवी लाइन के जरिये 600 मेगावाट तक और टनकपुर-महेंद्रनगर 132 किलोवाट पारेषण लाइन के जरिये 54 मेगावाट तक बिजली निर्यात की जाएगी। एक बयान में कहा गया, ''इस मंजूरी से नेपाल को इस मुश्किल समय में अपनी बिजली की जरूरतें पूरी करने में मदद मिलेगी और भारत और नेपाल के बीच गहरे और लंबे समय से चले आ रहे ऊर्जा सहयोग को और मजबूती मिलेगी।''
बयान में आगे कहा गया, ''भारत नेपाल का समर्थन करने और ऊर्जा क्षेत्र में आपसी सहयोग को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।'’ बता दें कि सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 26 अगस्त को नेपाल में भोटेकोशी-त्रिशूली नदी में आई बाढ़ से नेपाल की कई चालू पनबिजली परियोजनाओं और पांच सौर संयंत्रों को नुकसान पहुंचा है। इससे कुल मिलाकर लगभग 275 मेगावाट बिजली आपूर्ति में रुकावट आई है।
क्या रही है स्थिति?
नेपाल आमतौर पर गर्मियों में जरूरत से ज्यादा बिजली पैदा करता है और भारत को निर्यात करता है। वहीं सर्दियों में नदियों का जलस्तर घटने के कारण वह भारत से बिजली आयात करता है। आंकड़ों के मुताबिक 2025-26 में भारत ने नेपाल से 3,299 मिलियन यूनिट बिजली आयात की थी, जबकि नेपाल को 1,451 मिलियन यूनिट बिजली निर्यात की गई थी। अब इस आपदा ने नेपाल की मुसीबत बढ़ा दी है। नेपाल के कई प्रमुख हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स पूरी तरह तबाह हो गए हैं और उसे समय से पहले ही भारत पर निर्भर होना पड़ा है।
1,300 से ज्यादा मौतें
गौरतलब है कि बीते 26 अगस्त को नेपाल में भीषण बाढ़ आ गई थी। हिमालयी क्षेत्र में विशालकाय ग्लेशियर टूटने से बनी झीलों के फटने के बाद तिब्बत सीमा के पास घाटियों और बस्तियों में बेहिसाब पानी और मलबा बह आया। आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,344 हो गई है, जबकि सैकड़ों बच्चे और नागरिक अभी भी लापता हैं। वहीं हजारों लोग बेघर हो चुके हैं। फिलहाल राहत कार्य जारी है।


