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मुनाफाखोरों के कारण भारत खरीदने लगा ज्यादा रूसी तेल, फिर बौखलाए डोनाल्ड ट्रंप के करीबी

मुनाफाखोरों के कारण भारत खरीदने लगा ज्यादा रूसी तेल, फिर बौखलाए डोनाल्ड ट्रंप के करीबी

संक्षेप:

पीटर नवारो ने दावा किया कि भारत पर लगाए गए 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क को हटाना 'बहुत आसान' है और इसके लिए नई दिल्ली को रूसी तेल खरीदना बंद करना होगा। उन्होंने कहा, 'अगर भारत रूसी तेल खरीदना और उनकी युद्ध मशीनरी की मदद करना बंद कर दे, तो उसे कल ही 25 प्रतिशत की छूट मिल सकती है।'

Fri, 29 Aug 2025 10:05 AMNisarg Dixit लाइव हिन्दुस्तान
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अमेरिका का रूसी तेल की खरीद को लेकर भारत को निशाना बनाना जारी है। अब वाइट हाउस सलाहकार पीटर नवारो ने आरोप लगाए हैं कि भारत अमेरिकी डॉलर का इस्तेमाल कर सस्ता रूसी कच्चा तेल खरीद रहा है। इस बार नवारो ने भारत के रूस से हथियार खरीदने पर भी सवाल उठाए हैं। एक दिन पहले ही उन्होंने यूक्रेन संघर्ष को 'मोदी का युद्ध' बताया था।

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एक के बाद एक कई पोस्ट में नवारो ने लिखा, 'भारतीय निर्यात पर राष्ट्रपति ट्रंप के 50 फीसदी टैरिफ अब प्रभावी हैं। यह सिर्फ भारत के अनुचित व्यापार के तरीके के बारे में नहीं है, बल्कि यह पुतिन की वॉर मशीन को मिल रही जीवन रेखा को खत्म करने के बारे में है, जो भारत ने उसे दे रखी है।' उन्होंने एक पोस्ट में लिखा, 'अमेरिकी उपभोक्ता भारतीय उत्पाद खरीदते हैं। जबकि, भारत ऊंची टैरिफ दर और नॉन टैरिफ बैरियर के जरिए भारतीय निर्यात को जगह नहीं देता। भारत हमारे डॉलर का इस्तेमाल रूसी कच्चा तेल खरीदने के लिए करता है।'

एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, 'यूक्रेन में रूस के आक्रमण करने से पहले भारतीय निर्यात में रूसी तेल की हिस्सेदारी 1 फीसदी से भी कम थी। आज 30 प्रतिशत या 15 लाख बैरल प्रतिदिन से भी ज्यादा है। यह इजाफा घरेलू मांग की वजह से नहीं है, बल्कि इसे भारतीय मुनाफाखोर चला रहे हैं और इसके लिए यूक्रेन में खून और तबाही की अतिरिक्त कीमत चुकानी पड़ रही है।'

उन्होंने लिखा, 'भारत की बड़ी तेल लॉबी ने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को बड़े रिफाइनिंग हब और क्रेमलिन के लिए ऑयल मनी लॉन्डरोमैट में बदल दिया है।' लॉन्डोमैट उस जगह को कहा जाता है, जहां वॉशिंग मशीनें मौजूद होती है और नागरिक सिक्के डालकर उनका इस्तेमाल करते हैं।

नवारो ने लिखा, 'अब भारत एक दिन में 10 लाख बैरल रिफाइन्ड पेट्रोलियम निर्यात करता है। यह रूस से आयात किए जाने वाले कच्चे तेल का आधे से ज्यादा हिस्सा है। इसका पैसा भारत में राजनीतिक रूप से जुड़े ऊर्जा क्षेत्र के बड़े खिलाड़ियों के पास और पुतिन के युद्ध में खर्च हो रहे खजाने में जाता है।'

उन्होंने लिखा, 'ये सब यहां खत्म नहीं होता। भारत का रूसी हथियार खरीदना जारी है। साथ ही मांग कर रहा है कि अमेरिकी कंपनियां संवेदनशील सैन्य तकनीक ट्रांसफर करें और भारत में प्लांट तैयार करें। यह रणनीतिक मुफ्तखोरी है।'

एक दिन पहले दिया था सुझाव

बुधवार को ब्लूमबर्ग से बातचीत में नवारो ने दावा किया कि भारत पर लगाए गए 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क को हटाना 'बहुत आसान' है और इसके लिए नई दिल्ली को रूसी तेल खरीदना बंद करना होगा। उन्होंने कहा, 'अगर भारत रूसी तेल खरीदना और उनकी युद्ध मशीनरी की मदद करना बंद कर दे, तो उसे कल ही 25 प्रतिशत की छूट मिल सकती है।'

Nisarg Dixit

लेखक के बारे में

Nisarg Dixit
निसर्ग दीक्षित एक डिजिटल क्षेत्र के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनकी राजनीति की गतिशीलता पर गहरी नजर है और वैश्विक और घरेलू राजनीति की जटिलताओं को उजागर करने का जुनून है। निसर्ग ने गहन विश्लेषण, जटिल राजनीतिक कथाओं को सम्मोहक कहानियों में बदलने की प्रतिष्ठा बनाई है। राजनीति के अलावा अपराध रिपोर्टिंग, अंतरराष्ट्रीय गतिविधियां और खेल भी उनके कार्यक्षेत्र का हिस्सा रहे हैं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म करने के बाद दैनिक भास्कर के साथ शुरुआत की और इनशॉर्ट्स, न्यूज18 जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम करने के बाद लाइव हिन्दुस्तान में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर काम कर रहे हैं। और पढ़ें
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