भारत ने 2025 में सेना पर खर्च किए रिकॉर्ड 90 अरब डॉलर, इससे ऊपर सिर्फ 4 देश
रिपोर्ट में पिछले साल भारत और पाकिस्तान के बीच हुए गंभीर सैन्य गतिरोध का भी विशेष जिक्र किया गया है, जिसे सिपरी ने एक असाधारण रूप से गंभीर सैन्य संकट करार दिया है।

पाकिस्तान जैसा दुश्मन देश और चालबाज चीन से मिल रही चुनौतियों के बीच भारत सरकार के नाम एक और उलब्धि हासिल हुई है। यह उपलब्धि रक्षा के क्षेत्र में है। वैश्विक स्तर पर हथियारों और सैन्य खर्चों पर नजर रखने वाली स्वीडन की मशहूर संस्था सिपरी (SIPRI) ने अपनी इयरबुक 2026 जारी कर दी है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने साल 2025 में अपने सैन्य आधुनिकीकरण और सुरक्षा पर 92.1 अरब डॉलर खर्च किए हैं। इसके साथ ही भारत दुनिया में सैन्य साजो-सामान पर खर्च करने वाला पांचवां सबसे बड़ा देश बन गया है। भारत का यह रक्षा खर्च पिछले साल यानी कि 2024 की तुलना में 8.9 प्रतिशत अधिक है।
रिपोर्ट में पिछले साल भारत और पाकिस्तान के बीच हुए गंभीर सैन्य गतिरोध का भी विशेष जिक्र किया गया है, जिसे सिपरी ने एक असाधारण रूप से गंभीर सैन्य संकट करार दिया है।
सिपरी के मुताबिक, दुनिया भर में भू-राजनीतिक तनाव और युद्धों के कारण वैश्विक सैन्य खर्च लगातार 11वें साल बढ़ा है। साल 2025 में दुनिया के तमाम देशों ने मिलकर रिकॉर्ड 2.9 ट्रिलियन डॉलर अपनी सेनाओं पर खर्च किए, जो पूरी दुनिया की कुल जीडीपी का 2.5 प्रतिशत है। सिपरी के इतिहास में यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है।
सेना पर खर्च करने वाले शीर्ष 5 देशों की लिस्ट
1. अमेरिका: 954 अरब डॉलर (दुनिया के कुल खर्च का करीब एक-तिहाई, हालांकि यह 2024 से 7.5% कम है)
2. चीन: 336 अरब डॉलर
3. रूस: 190 अरब डॉलर
4. जर्मनी: तेजी से बढ़ते सैन्य बजट के साथ चौथे स्थान पर
5. भारत: 92.1 अरब
रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के शीर्ष 15 देशों का वैश्विक सैन्य खर्च में 80 प्रतिशत हिस्सा है, जिनमें से कई देश गाजा और यूक्रेन में चल रहे युद्धों में सीधे या परोक्ष रूप से शामिल रहे हैं।
भारत-पाक संकट पर सिपरी के चौंकाने वाले खुलासे
सिपरी ने मई 2025 में हुए भारत-पाकिस्तान टकराव को साल के सबसे खतरनाक घटनाक्रमों में सूचीबद्ध किया है। रिपोर्ट की टाइमलाइन के अनुसार, 7 से 10 मई 2025 के बीच दोनों देशों के बीच सीमा पर भीषण गोलीबारी हुई थी। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस संघर्ष के दौरान भारत ने पाकिस्तान के उन हवाई और मिसाइल ठिकानों पर हमले किए थे, जिनकी परमाणु भूमिका होने की आशंका थी। हालांकि, दोनों पक्षों ने समझदारी दिखाते हुए तनाव को और ज्यादा बढ़ने से रोकने के कदम उठाए।
इतिहास में यह पहली बार हुआ जब भारत और पाकिस्तान ने किसी सशस्त्र संघर्ष के दौरान एक-दूसरे के खिलाफ खुले तौर पर साइबर हमलों का इस्तेमाल किया।
भारत के पास 190, पाकिस्तान के पास 170 वॉरहेड्स
रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2026 की शुरुआत तक दुनिया के 9 परमाणु संपन्न देशों अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, भारत, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और इजरायल के पास कुल मिलाकर करीब 12,187 परमाणु हथियार हैं। भारत और पाकिस्तान के परमाणु आधुनिकीकरण पर रिपोर्ट में कहा गया है कि जनवरी 2026 तक भारत के पास परमाणु वॉरहेड्स की संख्या बढ़कर लगभग 190 हो गई है। भारत तेजी से ऐसी लंबी दूरी की मिसाइलों को विकसित कर रहा है जिनकी जद में पूरा चीन आ सके, हालांकि उसका ध्यान पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान पर भी बना हुआ है।
पाकिस्तान के पास अनुमानित 170 परमाणु वॉरहेड्स हैं। वह भी नई मिसाइल प्रणालियों और परमाणु सामग्री का तेजी से भंडार बढ़ा रहा है, जिससे संकेत मिलते हैं कि अगले दशक में उसका परमाणु जखीरा और बड़ा हो सकता है।
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि परमाणु हथियारों की कुल संख्या में मामूली गिरावट केवल अमेरिका और रूस द्वारा अपने पुराने, सेवानिवृत्त हथियारों को नष्ट करने के कारण है। असलियत यह है कि वैश्विक ताकतें परमाणु हथियारों को राष्ट्रीय शक्ति के प्रतीक के रूप में देख रही हैं, जिससे गलतफहमी या किसी अप्रत्याशित परमाणु युद्ध का खतरा बढ़ गया है।
दुनिया के सबसे बड़े हथियार खरीदारों में भारत शामिल
सिपरी के आंकड़ों के अनुसार, साल 2021 से 2025 के बीच भारत दुनिया के शीर्ष 5 सबसे बड़े हथियार खरीदार देशों में शामिल रहा है। इस सूची में भारत के साथ यूक्रेन, सऊदी अरब, कतर और पाकिस्तान शामिल हैं। वैश्विक स्तर पर होने वाले कुल हथियारों के आयात में इन पांच देशों की हिस्सेदारी अकेले 35 प्रतिशत रही है।
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लेखक के बारे में
Himanshu Jhaबिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।
एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।
हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।
काम के इतर, हिमांशु को सिनेमा का विशेष शौक है। वे विशेष रूप से सियासी और क्राइम बेस्ड वेब सीरीज़ देखना पसंद करते हैं, जो कहीं न कहीं समाज और सत्ता के समीकरणों को समझने की उनकी जिज्ञासा को भी प्रदर्शित करता है।
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