ना अमेरिका से डर और ना दबाव में रिश्ते, ब्रिक्स से भारत ने दुनिया को दे दिया बड़ा संदेश

हिन्दुस्तान टाइम्स
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भारत ने ब्रिक्स के जरिए बता दिया है कि ना तो हम किसी के डर से और ना ही दबाव में किसी के साथ रिश्ते बना या खराब कर सकते हैं। भारत ने अपनी कूटनीतिक स्वतंत्रता का सीधा संदेश दिया है।

BRICS Summit
ब्रिक्स के जरिए भारत ने दे दिया कूटनीतिक स्वतंत्रता का संदेश

पंकज कुमार पांडेय

बार-बार कहा जा रहा है कि दुनिया का ऑर्डर यानी व्यवस्था बदल रही है। शक्ति संतुलन नए सिरे से परिभाषित होने की प्रक्रिया में है और आने वाला दौर पहले की तुलना में कहीं अधिक बहुध्रुवीय हो सकता है। ऐसे में भारत को महाशक्तियों के बीच रणनीतिक संबंधों, व्यापारिक हितों और राष्ट्रीय हितों के बीच संतुलन साधना है। ब्रिक्स की बैठक ने भारत के इसी संतुलन और उसकी कूटनीतिक स्वतंत्रता को दुनिया के सामने एक बार फिर स्पष्ट किया है।

भारत ने रूस और ईरान के साथ-साथ चीन से भी अपने रिश्तों को पुनर्परिभाषित करते हुए स्पष्ट किया कि राष्ट्र प्रथम ही भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिप्लोमेसी और पर्सनल केमिस्ट्री का केंद्र बिंदु है। ब्रिक्स में रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान सहित अन्य द्विपक्षीय वार्ताओं से यह संदेश भी निकलता दिख रहा है कि वैश्विक संस्थाओं की जवाबदेही और प्रतिनिधित्व को नए सिरे से तय करने का समय आ गया है। बदलती आर्थिक व सामरिक वास्तविकताओं के अनुरूप शक्ति के नए केंद्रों को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका मिलनी चाहिए।

भारत की भूमिका इस पूरी तस्वीर में खास है। एक तरफ अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी, क्वाड और हिंद-प्रशांत से जुड़े विभिन्न मंचों पर भारत की सक्रियता है, तो वहीं रूस, चीन, ईरान और ग्लोबल साउथ के साथ ब्रिक्स जैसे मजबूत बहुपक्षीय मंच पर भारत की मौजूदगी है। पहली नजर में ये अलग-अलग दिशाएं लग सकती हैं, लेकिन वास्तव में यही भारत की रणनीतिक स्वायत्तता है। भारत अपने राष्ट्रीय हितों को गति दे रहा है।

लगातार बदल रहे वैश्विक समीकरण

कोविड महामारी के बाद चीन पर वैश्विक आपूर्ति शृंखला की अत्यधिक निर्भरता को लेकर दुनिया में चिंता बढ़ी थी। उस दौर में भारत को एक बड़े विकल्प के रूप में देखा गया। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति ने उन समीकरणों को भी प्रभावित किया।

दुनिया को बड़ा संदेश

ब्रिक्स की बैठक का महत्व केवल इस बात में नहीं है कि इसमें कितने देश शामिल हैं या कितनी आर्थिक ताकत इसका हिस्सा है। इसका बड़ा महत्व उस बदलती वैश्विक सोच में है, जिसमें दुनिया की पुरानी शक्ति संरचना को चुनौती मिल रही है और नए शक्ति केंद्र अपनी भूमिका की मांग कर रहे हैं।

रूस के साथ रिश्ते और मजबूत हुए

पश्चिमी देशों के दबाव और रूस को लेकर अंतरराष्ट्रीय मतभेदों के बावजूद भारत ने रूस से रणनीतिक संबंध कमजोर नहीं होने दिए। रक्षा और ऊर्जा से आगे बढ़कर दोनों देशों के बीच व्यापार, उद्योग, तकनीक और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की कोशिश हो रही है।

फैसला भारत के हित में

अमेरिका के साथ साझेदारी अपनी जगह व क्वाड अपनी जगह है। रूस के साथ रणनीतिक संबंध, चीन के साथ प्रतिस्पर्धा और सहयोग दोनों की गुंजाइश अपनी जगह है। इजरायल के साथ दोस्ती है तो ईरान के साथ संवाद भी जारी है।

भारत का संदेश साफ है कि न तो वह अमेरिका के दबाव में रूस से अपने संबंध तय करेगा, न चीन के साथ संबंध किसी दूसरे देश के कहने पर बनाएगा या बिगाड़ेगा। भारत अपने राष्ट्रीय और रणनीतिक हितों के आधार पर संबंध तय करने के लिए स्वतंत्र है।

Ankit Ojha

लेखक के बारे में

Ankit Ojha

विद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।


राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।


अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।

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