इसी महीने दौड़ेगी देश की दूसरी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन, जानें क्या होगा रूट
पहली बार ट्रेन में बोल्स्टरलेस बोगियों (कोच) का इस्तेमाल हुआ है, जो 160 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार पर भी चाय का कप टेबल से नहीं गिरने देंगी। हवाई जहाज की तर्ज पर इसमें बायो-वैक्यूम टॉयलेट्स और टच-फ्री नल दिए गए हैं।

Vande Bharat Sleeper Train: देश की दूसरी वंदे भारत स्लीपर मार्च में पटरियों पर होगी। इसका रूट अभी तय नहीं हुआ है, लेकिन जानकारों का कहना है कि यह ट्रेन दिल्ली-हावड़ा, दिल्ली-मुंबई, चेन्नई-बेंगलुरु-मुंबई में से किसी एक रूट पर चलाई जा सकती है।
रेलवे बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वर्ष 2026 में कुल 12 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों को चलाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रत्येक ट्रेन पहले की ट्रेन से तकनीक व सुविधाओं के मामले में उन्नत होगी। वंदे भारत स्लीपर को भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (बीईएमएल) ने इस तरह डिजाइन किया है कि रेल यात्रियों को सफर के दौरान विमान-पांच सितारा होटल जैसा अनुभव होगा। ट्रेन के कोच के गलियारों में स्मार्ट सेंसर लाइट्स लगी हैं, जो केवल यात्री के चलने पर जलेंगी।
बोल्स्टरलेस कोच का इस्तेमाल
पहली बार ट्रेन में बोल्स्टरलेस बोगियों (कोच) का इस्तेमाल हुआ है, जो 160 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार पर भी चाय का कप टेबल से नहीं गिरने देंगी। हवाई जहाज की तर्ज पर इसमें बायो-वैक्यूम टॉयलेट्स और टच-फ्री नल दिए गए हैं। नई डिजाइन की उन्नत वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में स्मार्ट सेंसर लाइट्स, वैक्यूम टॉयलेट्स, बोल्स्टरलेस कोच और ब्रांडेड कैटरिंग की खूबियां होंगी।
वंदे भारत स्लीपर में भी वीआईपी कोटा
आपको बता दें कि रेलवे बोर्ड ने हाल ही में अमृत भारत और वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के नियमों में एक बड़ा बदलाव किया है। नौ फरवरी को जारी नए आदेश में उक्त प्रीमियम ट्रेनों में भी इमरजेंसी कोटा (वाईआईपी कोटा) की सुविधा बहाल कर दी गई है। रेलवे बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि शुरुआत में (जनवरी 2026 के नियमों के अनुसार) इन ट्रेनों में केवल लेडीज, सीनियर सिटीजन और दिव्यांग कोटा ही रखा गया था ताकि टिकट प्रणाली पारदर्शी रहे। लेकिन, यात्रियों की भारी मांग और आपातकालीन जरूरतों (जैसे मेडिकल इमरजेंसी या सरकारी ड्यूटी) को देखते हुए अब इसे लागू कर दिया गया है।
उन्होंने बताया कि अलग-अलग ट्रेनों और श्रेणियों के लिए बर्थ की संख्या तय की गई है। अमृत भारत एक्सप्रेस में यह कोटा उन ट्रेनों में लागू होगा जिनमें सात या उससे अधिक स्लीपर कोच हैं। इनमें स्लीपर क्लास में प्रति ट्रेन 24 बर्थ इमरजेंसी कोटा के लिए आरक्षित की गई हैं। वहीं, वंदे भारत स्लीपर में कोच की श्रेणी के आधार पर बर्थ के आवंटन की व्यवस्था है। इसमें सामान्य दिनों और सप्ताहांत के आधार पर कोटे की बर्थ का प्रावधान है। वंदे भारत स्लीपर में एसी-1 में 4 से 6 बर्थ, एसी-2 में 20 से 30 बर्थ, एसी-3 में 24 से 42 बर्थ आरक्षित होंगी।
ये सीटें तब तक खाली रहती हैं जब तक चार्ट तैयार नहीं हो जाता। यदि कोई इमरजेंसी रिक्वेस्ट नहीं आती, तो ये सीटें वेटिंग लिस्ट वाले सामान्य यात्रियों को आवंटित कर दी जाती हैं। इस कोटे की बर्थ को मेडिकल इमरजेंसी (गंभीर बीमारी या अस्पताल जाने के लिए यात्रा), पारिवारिक कारण (परिवार में किसी की मृत्यु या अन्य कोई आकस्मिक घटना), सरकारी ड्यूटी (सांसद, मंत्री, हाईकोर्ट-सुप्रीम कोर्ट के जज और ड्यूटी पर तैनात सरकारी अधिकारी) और अन्य नौकरी के इंटरव्यू या बहुत ही महत्वपूर्ण आधिकारिक कार्य के तहत दी जाती हैं।
लेखक के बारे में
Himanshu Jhaबिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।
एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।
हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।
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