पुतिन से दोस्ती कर फंस गया भारत? अमेरिका ने बजाई खतरे की घंटी, 500% टैरिफ का डर
रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिका कड़े प्रतिबंध लगाने की तैयारी में है। ट्रंप प्रशासन और सीनेटरों के बीच नए कानून पर सहमति बन गई है, जिससे भारत की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों की मुश्किलें जल्द ही बढ़ सकती हैं। शुक्रवार को चार अमेरिकी सीनेटरों ने ऐलान किया कि रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने ट्रंप प्रशासन के साथ एक समझौता किया है। इसका सीधा असर भारत पर भी पड़ सकता है, क्योंकि भारत रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों में शामिल है। इस समझौते की घोषणा करने वालों में ट्रंप के करीबी माने जाने वाले सीनेटर लिंडसे ग्राहम समेत दो डेमोक्रेटिक और दो रिपब्लिकन नेता शामिल हैं।
क्या है अमेरिका का नया प्लान?
चारों सीनेटरों ने एक संयुक्त बयान में कहा, "हमें यह ऐलान करते हुए गर्व हो रहा है कि हमने अपने अपडेटेड रूस प्रतिबंध कानून को आगे बढ़ाने के लिए ट्रंप प्रशासन के साथ समझौता किया है।" सीनेटर लिंडसे ग्राहम के साथ रिपब्लिकन रोजर विकर, डेमोक्रेटिक रिचर्ड ब्लूमेंटल और जीन शाहीन ने बताया कि जल्द ही इस कानून को पेश किया जाएगा।
बयान के मुताबिक, सीनेटरों ने कहा कि रूस जिस तरह से आम नागरिकों पर हमले तेज कर रहा है, उसे देखते हुए रूसी तेल और प्राकृतिक गैस खरीदकर पुतिन की 'वॉर मशीन' को फंड करने वालों को इसकी भारी कीमत चुकानी होगी।
500% तक टैरिफ लगाने का था प्रावधान
ये चारों सीनेटर 'सैंक्शनिंग रशिया एक्ट 2025' के प्रमुख समर्थक रहे हैं। इस बिल में रूसी मूल के तेल, प्राकृतिक गैस, यूरेनियम और पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने वाले देशों के सामानों और सेवाओं के निर्यात पर अमेरिकी टैरिफ लगाने का प्रस्ताव है। शुरुआत में इस बिल में 500% तक अमेरिकी टैरिफ लगाने का प्रावधान था, जिसे सीनेटर ब्लूमेंटल ने "हड्डियां तोड़ देने वाला" करार दिया था।
हालांकि, इस प्रस्तावित बिल में अमेरिकी राष्ट्रपति को राष्ट्रीय सुरक्षा हितों को ध्यान में रखते हुए किसी भी देश को 180 दिनों की छूट देने का भी अधिकार है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब इस बिल में कुछ बदलाव किए गए हैं और टैरिफ के प्रावधानों को थोड़ा नरम किया गया है। फिलहाल बदले हुए कानून के सटीक विवरण का अभी इंतजार है।
इस बिल को अमेरिकी सीनेट में भारी समर्थन हासिल है और 84 सीनेटर इसके सह-प्रायोजक हैं। जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस को यूक्रेन युद्ध खत्म करने की बातचीत के लिए मजबूर करने के मकसद से इस बिल पर विचार करने की बात कही थी, तब यह काफी चर्चा में आया था। हालांकि, इसे पेश किए हुए एक साल से ज्यादा हो गया है, लेकिन अब तक यह पास नहीं हो सका है।
भारत के लिए क्यों है खतरे की घंटी?
इस नए कानून के स्पष्ट निशाने पर भारत भी है। जून 2025 में सीनेटर ग्राहम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर सीधे तौर पर चेतावनी देते हुए लिखा था, "चीन और भारत के लिए: यदि आप पुतिन की 'वॉर मशीन' को बढ़ावा देना जारी रखते हैं, तो इसके लिए आप खुद के अलावा किसी और को दोष नहीं दे पाएंगे।"
दरअसल, अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद अमेरिकी ट्रेजरी ने एक जनरल लाइसेंस जारी किया था, जिसके तहत बिना अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना किए रूसी ऊर्जा खरीदने की अनुमति दी गई थी। इस लाइसेंस के कारण ही भारत रूस से लगातार तेल खरीदता रहा। लेकिन, यह लाइसेंस 17 जून को समाप्त हो चुका है। ऐसे में अगर अमेरिका का नया प्रतिबंध कानून लागू होता है, तो भारत पर इसका सीधा दबाव देखने को मिल सकता है।
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अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।
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