चीन ने अरुणाचल प्रदेश में स्थानों को दिए काल्पनिक नाम, भारत ने इस हरकत को सिरे किया खारिज

Niteesh Kumar भाषा
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रणधीर जायसवाल ने कहा, 'चीन की ओर से झूठे दावे पेश करने और निराधार विमर्श गढ़ने के प्रयास वास्तविकता को नहीं बदल सकते कि अरुणाचल प्रदेश सहित ये स्थान और क्षेत्र भारत का अभिन्न व अविभाज्य हिस्सा थे, हैं और हमेशा रहेंगे।'

चीन ने अरुणाचल प्रदेश में स्थानों को दिए काल्पनिक नाम, भारत ने इस हरकत को सिरे किया खारिज

भारत ने अरुणाचल प्रदेश में कुछ स्थानों का नाम बदलने के चीन के कदम को साफ तौर पर खारिज कर दिया। नई दिल्ली की ओर से कहा गया कि ऐसे दावे और निराधार विमर्श गढ़ने के प्रयास इस अकाट्य वास्तविकता को नहीं बदल सकते कि वे भारतीय क्षेत्र का हिस्सा हैं। इसमें कहा गया कि चीन को ऐसे कार्यों से बचना चाहिए, जो संबंधों में नकारात्मकता पैदा करते हैं और बेहतर समझ बनाने के प्रयासों को कमजोर करते हैं।

नई दिल्ली की प्रतिक्रिया बीजिंग की ओर से अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों के लिए चीनी नामों की घोषणा के जवाब में आई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, 'भारत, चीन की ओर से भारत की भूमि के अंतर्गत आने वाले स्थानों को मनगढ़ंत नाम देने के किसी भी शरारती प्रयास को स्पष्ट रूप से खारिज करता है।'

चीन के दावे को भारत ने सिरे से किया खारिज

रणधीर जायसवाल ने कहा, 'चीन की ओर से झूठे दावे पेश करने और निराधार विमर्श गढ़ने के ऐसे प्रयास इस निर्विवाद वास्तविकता को नहीं बदल सकते कि अरुणाचल प्रदेश सहित ये स्थान और क्षेत्र भारत का अभिन्न व अविभाज्य हिस्सा थे, हैं और हमेशा रहेंगे।' जायसवाल ने कहा कि चीनी पक्ष की ये कार्रवाइयां भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर और सामान्य बनाने के चल रहे प्रयासों से ध्यान भटकाती हैं।

चीन अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा करता है और इसे जंगनान या दक्षिणी तिब्बत कहकर अपना हिस्सा बताता है। वह 1914 की शिमला संधि और मैकमोहन रेखा को ब्रिटिश साम्राज्यवादी षड्यंत्र मानकर खारिज करता है, क्योंकि चीन के अनुसार तिब्बत स्वतंत्र नहीं था और यह रेखा अवैध है। चीन बार-बार इस क्षेत्र के स्थानों के चीनी नाम जारी करता है और इसे अपना प्राचीन तिब्बती क्षेत्र बताता है। 1914 की मैकमोहन रेखा ऐतिहासिक रूप से वैध है, जो ब्रिटिश भारत और तिब्बत के बीच सहमति से तय हुई और स्वतंत्र भारत ने इसे अपनी सीमा के रूप में अपनाया। क्षेत्र पर भारत का प्रशासनिक नियंत्रण दशकों से निरंतर है, स्थानीय जनता भारतीय नागरिक है और भारतीय पासपोर्ट का उपयोग करती है।

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पत्रकार नीतीश कुमार 8 साल से अधिक समय से मीडिया इंडस्ट्री में एक्टिव हैं। जनसत्ता डिजिटल से बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर शुरुआत हुई। लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ने से पहले टीवी9 भारतवर्ष और दैनिक भास्कर डिजिटल में भी काम कर चुके हैं। पत्रकार नीतीश कुमार को खबरें लिखने के साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग का शौक है। लाइव हिन्दुस्तान यूट्यूब चैनल के लिए लोकसभा चुनाव 2024, दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 और बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की कवरेज कर चुके हैं। फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान के लिए नेशनल और इंटरनेशनल सेक्शन की खबरें लिखते हैं। पत्रकार नीतीश कुमार को ब्रेकिंग न्यूज लिखने के साथ खबरों का गहराई से विश्लेषण करना पसंद है। राजनीति से जुड़ी खबरों पर मजबूत पकड़ और समझ रखते हैं। समसामयिक राजनीतिक मुद्दों पर कई सारे लंबे लेख लिख चुके हैं। पत्रकार नीतीश कुमार ने पत्रकारिता का पढ़ाई IIMC, दिल्ली (2016-17 बैच) से हुई। इससे पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी के महाराजा अग्रसेन कॉलेज से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन किया। पत्रकार नीतीश कुमार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के रहने वाले हैं। राजनीति, खेल के साथ सिनेमा में भी दिलचस्पी रखते हैं। फिल्में देखना और रिव्यू करना व उन पर चर्चा करना हॉबी है।

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