भारत ने जियाउर रहमान के 1971 के रेडियो प्रसारण को किया याद, पीएम तारिक को क्या संदेश
रेडियो प्रसारण का प्रभाव स्थानीय स्तर से आगे बढ़कर अंतरराष्ट्रीय हो गया। जापानी जहाज ने इसे बंगाल की खाड़ी में सुना और बीबीसी व रेडियो ऑस्ट्रेलिया ने इसे विश्व स्तर पर प्रसारित किया। इससे विश्व समुदाय को बांग्लादेश संकट की जानकारी मिली।

भारत ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के पिता जियाउर रहमान के 1971 के रेडियो प्रसारण को याद किया है। 30 मई 2026 को जियाउर रहमान की 45वीं शहादत वर्षगांठ पर ढाका में भारतीय उच्चायोग ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। जियाउर रहमान को बांग्लादेश मुक्ति संग्राम का नायक माना जाता है। उन्होंने 27 मार्च 1971 को चटगांव से स्वाधीन बांग्ला बेतार केंद्र से प्रसारण किया था। उन्होंने शेख मुजीबुर रहमान की ओर से बांग्लादेश की स्वतंत्रता की घोषणा की। यह प्रसारण अत्यंत प्रेरणादायक था, जिसने पूरे बांग्लादेश में पाकिस्तानी सेना के अत्याचार के खिलाफ प्रतिरोध की लहर पैदा कर दी।
भारतीय उच्चायोग के बयान में इसे इलेक्ट्रिफाइंग बताया गया और कहा गया कि भारत आज भी बांग्लादेश के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। उस घटनाक्रम का जिक्र बेहद अहम माना जा रहा है। 25 मार्च 1971 को पाकिस्तान के ऑपरेशन सर्चलाइट के तहत बंगाली लोगों काफी अत्याचार हुआ। लोगों में भय और अव्यवस्था फैल गई थी। ऐसे में मेजर जियाउर रहमान का रेडियो संदेश एक मनोवैज्ञानिक बल बना। इसने न केवल सशस्त्र विद्रोह को संगठित किया बल्कि विभिन्न गुटों को एक स्वतंत्रता आंदोलन के तहत जोड़ा।
दुनिया को हुई बांग्लादेश संकट की जानकारी
रेडियो प्रसारण का प्रभाव स्थानीय स्तर से आगे बढ़कर अंतरराष्ट्रीय हो गया। जापानी जहाज ने इसे बंगाल की खाड़ी में सुना और बीबीसी व रेडियो ऑस्ट्रेलिया ने इसे विश्व स्तर पर प्रसारित किया। इससे विश्व समुदाय को बांग्लादेश संकट की जानकारी मिली और भारत की सैन्य व कूटनीतिक भागीदारी को बल मिला। यह प्रसारण बांग्लादेश मुक्ति युद्ध की नींव साबित हुआ।
रेडियो प्रसारण को याद करने के क्या मायने
आज इस प्रसारण को याद करने का कूटनीतिक महत्व भी गहरा है। फरवरी 2026 के चुनावों के बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी सत्ता में वापस आई है। जियाउर रहमान के बेटे तारिक रहमान प्रधानमंत्री बने हैं। भारत और बीएनपी के बीच पहले तनावपूर्ण संबंध रहे हैं क्योंकि बीएनपी को चीन और पाकिस्तान के करीब माना जाता था। ऐसे में जियाउर रहमान को मुक्ति संग्राम का नायक मानकर भारत नई सरकार के साथ विश्वास का पुल बनाने की कोशिश कर रहा है। उच्चायोग के बयान में साझा बलिदान और प्रगति की यात्रा पर जोर दिया गया है। यह कदम दोनों देशों के बीच स्थिर सहयोग बनाए रखने का संकेत है।
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लेखक के बारे में
Niteesh Kumarपत्रकार नीतीश कुमार 8 साल से अधिक समय से मीडिया इंडस्ट्री में एक्टिव हैं। जनसत्ता डिजिटल से बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर शुरुआत हुई। लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ने से पहले टीवी9 भारतवर्ष और दैनिक भास्कर डिजिटल में भी काम कर चुके हैं। पत्रकार नीतीश कुमार को खबरें लिखने के साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग का शौक है। लाइव हिन्दुस्तान यूट्यूब चैनल के लिए लोकसभा चुनाव 2024, दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 और बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की कवरेज कर चुके हैं। फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान के लिए नेशनल और इंटरनेशनल सेक्शन की खबरें लिखते हैं। पत्रकार नीतीश कुमार को ब्रेकिंग न्यूज लिखने के साथ खबरों का गहराई से विश्लेषण करना पसंद है। राजनीति से जुड़ी खबरों पर मजबूत पकड़ और समझ रखते हैं। समसामयिक राजनीतिक मुद्दों पर कई सारे लंबे लेख लिख चुके हैं। पत्रकार नीतीश कुमार ने पत्रकारिता का पढ़ाई IIMC, दिल्ली (2016-17 बैच) से हुई। इससे पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी के महाराजा अग्रसेन कॉलेज से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन किया। पत्रकार नीतीश कुमार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के रहने वाले हैं। राजनीति, खेल के साथ सिनेमा में भी दिलचस्पी रखते हैं। फिल्में देखना और रिव्यू करना व उन पर चर्चा करना हॉबी है।
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