शेख हसीना को बांग्लादेश को सौंपेगा भारत? फांसी की सजा पर क्या बोली सरकार

शेख हसीना को बांग्लादेश को सौंपेगा भारत? फांसी की सजा पर क्या बोली सरकार

संक्षेप:

बांग्लादेश में शेख हसीना को फांसी की सजा पर भारत सरकार का बयान आ गया है। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि भारत ने बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल के फैसले का संज्ञान लिया है।

Nov 17, 2025 07:19 pm ISTDeepak लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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बांग्लादेश में एक विशेष न्यायाधिकरण द्वारा अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को मौत की सजा सुनाए जाने के कुछ घंटों बाद, भारत ने सोमवार को कहा कि उसने फैसले पर गौर किया है और वह पड़ोसी देश में शांति, लोकतंत्र और स्थिरता को ध्यान में रखते हुए सभी हितधारकों के साथ रचनात्मक रूप से बातचीत करेगा। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत लोगों के सर्वोत्तम हितों के लिए प्रतिबद्ध है। हसीना को देश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी) द्वारा मानवता के विरुद्ध अपराध का दोषी पाया गया तथा मौत की सजा सुनाई गई।

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अवामी लीग की नेता पिछले साल पांच अगस्त को बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों के कारण बांग्लादेश से भागने के बाद भारत में रह रही हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के संबंध में ‘बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण’ द्वारा सुनाए गए फैसले पर गौर किया है। बयान में कहा गया कि एक करीबी पड़ोसी के रूप में भारत बांग्लादेश के लोगों के सर्वोत्तम हितों के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें उस देश में शांति, लोकतंत्र, समावेशिता और स्थिरता शामिल है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि हम इस दिशा में सभी हितधारकों के साथ सदैव रचनात्मक रूप से जुड़े रहेंगे।

गौरतलब है कि बांग्लादेश ने भारत से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को प्रत्यर्पित करने का आग्रह किया है। दोनों को पिछले साल एक छात्र विद्रोह के खिलाफ कार्रवाई में उनकी भूमिका के लिए मौत की सजा सुनाई गई है। बांग्लादेश की तरफ से कहा गया कि प्रत्यर्पण संधि के तहत भारत ऐसा करने के लिए बाध्य है। पिछले साल हिंसक छात्र विरोध प्रदर्शनों के बाद भागी शेख हसीना तब से भारत में हैं।

गौरतलब है कि बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को पिछले वर्ष जुलाई में उनकी सरकार के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शनों के दौरान किए गए मानवता के विरुद्ध अपराधों के लिए सोमवार को एक विशेष न्यायाधिकरण द्वारा उनकी अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई गई। महीनों तक चले मुकदमे के बाद अपने फैसले में बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी) ने 78 वर्षीय अवामी लीग नेता को हिंसक दमन का ‘मास्टरमाइंड और प्रमुख सूत्रधार’ बताया, जिसमें सैकड़ों प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई थी।

पिछले वर्ष पांच अगस्त को बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों के कारण बांग्लादेश से भागने के बाद से हसीना भारत में रह रही हैं। इससे पहले अदालत ने उन्हें भगोड़ा घोषित किया था। अपनी प्रतिक्रिया में हसीना ने कहा कि यह फैसला एक गैरअधिकृत न्यायाधिकरण द्वारा दिया गया है, जिसकी स्थापना और अध्यक्षता एक अनिर्वाचित सरकार द्वारा की गई है, जिसके पास कोई लोकतांत्रिक जनादेश नहीं है।

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