भारत में बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन नहीं करेगी सरकार, लेकिन इस्तेमाल की कड़ी शर्तें
हाल ही में आंध्र प्रदेश ने 13 वर्ष से कम और कर्नाटक ने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नियम से चिंतित है।

डिजिटल दुनिया में बच्चों की सुरक्षा को लेकर चल रही बहस के बीच भारत सरकार ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। शीर्ष सरकारी सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के पक्ष में नहीं है। इसके बजाय, सरकार 18 वर्ष से कम उम्र के किशोरों के लिए एक नुआंस्ड और ग्रेडेड (बारीक और श्रेणीबद्ध) दृष्टिकोण अपनाने पर विचार कर रही है, जिसमें उम्र के हिसाब से अलग-अलग पाबंदियां तय की जाएंगी।
इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी एक रिपोर्ट में एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के हवाले से कहा है कि सरकार इस मुद्दे पर एक नया कानून लाने की तैयारी में है, जिसे संसद के आगामी मानसून सत्र में पेश किया जा सकता है।
प्रस्तावित नियमों के तहत बच्चों को तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है:
8 से 12 वर्ष: सबसे अधिक प्रतिबंधात्मक नियम।
12 से 16 वर्ष: मध्यम स्तर की निगरानी और सीमाएं।
16 से 18 वर्ष: अधिक स्वतंत्रता, लेकिन सुरक्षा मानकों के साथ।
सरकार का मानना है कि आज की पीढ़ी पिछली पीढ़ियों की तुलना में अधिक जागरूक और परिपक्व है, इसलिए प्रतिबंध जैसा कठोर कदम उठाने के बजाय नियमों को तर्कसंगत बनाना बेहतर होगा।
आईटी मंत्रालय के भीतर चल रही चर्चाओं में 'टाइम-बेस्ड लिमिट' (समय सीमा) का विकल्प सबसे ऊपर है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार कुछ ऐसे प्रावधानों पर विचार कर रही है जिनमें बच्चों को शाम या रात के समय सोशल मीडिया लॉग-इन करने की अनुमति न हो। दिन भर में सोशल मीडिया के उपयोग के लिए एक निश्चित समय (जैसे एक घंटा) निर्धारित किया जाए। किसी भी प्लेटफॉर्म पर पहुंच के लिए माता-पिता की अनिवार्य सहमति को तकनीकी रूप से लिंक किया जाए।
यह मॉडल काफी हद तक चीन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के हालिया कदमों से प्रेरित नजर आता है, जहां ऑनलाइन गेमिंग और सोशल मीडिया पर कड़े समय प्रतिबंध लागू किए गए हैं।
राज्यों के अलग-अलग सुर
हाल ही में आंध्र प्रदेश ने 13 वर्ष से कम और कर्नाटक ने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नियम से चिंतित है। कंपनियों का तर्क है कि अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग उम्र सीमा होने से तकनीकी रूप से इसे लागू करना बेहद जटिल होगा।
यही कारण है कि केंद्र सरकार एक समान केंद्रीय कानून की दिशा में बढ़ रही है, ताकि पूरे देश में एक जैसे मानक लागू हों। फेसबुक जैसी दिग्गज कंपनियों ने भी स्पष्ट किया है कि वे नियमों का पालन करेंगी, लेकिन नियम सभी ऐप्स पर समान रूप से लागू होने चाहिए ताकि किशोर असुरक्षित या अनियंत्रित साइटों की ओर न मुड़ें।
क्या हैं चिंताएं?
इस कानून की आवश्यकता के पीछे डिजिटल एडिक्शन (लत) और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं सबसे प्रमुख हैं। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में भी बच्चों के लिए उम्र-आधारित सीमाएं तय करने और उन पर लक्षित विज्ञापनों को रोकने की सिफारिश की गई थी। सर्वेक्षण में बच्चों के लिए साधारण फोन या केवल शिक्षा के लिए टैबलेट को बढ़ावा देने की बात भी कही गई थी।
हालांकि, इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन (IFF) जैसे नागरिक अधिकार समूहों ने चेतावनी दी है कि पूर्ण प्रतिबंध जैसे कदम डिजिटल जेंडर गैप को और बढ़ा सकते हैं। भारत जैसे समाज में सुरक्षा के नाम पर लगाए गए प्रतिबंध अक्सर लड़कियों की इंटरनेट तक पहुंच को स्थायी रूप से खत्म करने का हथियार बन जाते हैं।
लेखक के बारे में
Himanshu Jhaबिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।
एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।
हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।
काम के इतर, हिमांशु को सिनेमा का विशेष शौक है। वे विशेष रूप से सियासी और क्राइम बेस्ड वेब सीरीज़ देखना पसंद करते हैं, जो कहीं न कहीं समाज और सत्ता के समीकरणों को समझने की उनकी जिज्ञासा को भी प्रदर्शित करता है।
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