पाकिस्तान से बातचीत को लेकर भारत में उठ रही आवाज, RSS नेता के समर्थन में पूर्व सेना प्रमुख

Amit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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भारत-पाकिस्तान बातचीत पर बड़ी खबर! RSS नेता दत्तात्रेय होसबाले, पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे और पूर्व RAW चीफ ने पाकिस्तान से बातचीत के दरवाजे खोलने का समर्थन किया है। जानिए इस पर पाकिस्तान विदेश मंत्रालय का क्या जवाब आया है। पूरी खबर पढ़ें।

पाकिस्तान से बातचीत को लेकर भारत में उठ रही आवाज, RSS नेता के समर्थन में पूर्व सेना प्रमुख

पिछले कुछ सालों से भारत और पाकिस्तान के बीच राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत पूरी तरह से ठप है। लेकिन, मई 2026 के ताजा घटनाक्रमों में भारत के भीतर से ही कुछ बेहद प्रभावशाली और महत्वपूर्ण चेहरों ने पाकिस्तान के साथ फिर से बातचीत शुरू करने की वकालत की है। इनमें RSS नेता से लेकर पूर्व सेना प्रमुख और पूर्व रॉ चीफ भी शामिल हैं।

भारत में किसने-किसने उठाई बातचीत की आवाज?

हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के एक बड़े नेता, भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख और देश की खुफिया एजेंसी के पूर्व प्रमुख ने पाकिस्तान के साथ बातचीत के दरवाजे खोलने का समर्थन किया है।

दत्तात्रेय होसबाले (RSS के सरकार्यवाह)

आरएसएस में नंबर दो की हैसियत रखने वाले दत्तात्रेय होसबाले ने कहा है कि भारत को पाकिस्तान के साथ बातचीत के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। उनका मानना है कि तनाव के बावजूद कूटनीतिक रिश्ते, व्यापार और वीजा प्रक्रिया जैसी चीजें पूरी तरह बंद नहीं होनी चाहिए। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का उदाहरण देते हुए कहा कि वाजपेयी जी ने भी बस से लाहौर जाकर बातचीत की कोशिशें की थीं। होसबाले के अनुसार- बातचीत की एक खिड़की हमेशा खुली रहनी चाहिए।

उनसे पूछा गया कि भारत को पाकिस्तान और उसके आतंकवाद को लगातार प्रायोजित करने के रवैए से कैसे निपटना चाहिए। उन्होंने 26/11, पुलवामा और पहलगाम जैसे आतंकवादी हमलों का हवाला देते हुए कहा, ''देखिए, (कूटनीतिक रूप से) हर संभव प्रयास किया जा चुका है, लेकिन पाकिस्तान लगातार छोटी-छोटी उकसावे वाली हरकतें करता रहता है।''

उन्होंने कहा कि व्यापार और वाणिज्य, वीजा जारी करना बंद नहीं होना चाहिए क्योंकि ''संवाद के लिए हमेशा एक खिड़की (खुली) रहनी चाहिए''। होसबाले ने कहा कि इसी वजह से कूटनीतिक संबंधों को बनाए रखा गया है। उन्होंने कहा कि वहां के शिक्षाविदों, खिलाड़ियों, वैज्ञानिकों और सामुदायिक नेताओं को आगे आना चाहिए, क्योंकि उनके राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व में भारत के प्रति कुछ दूरी और नकारात्मकता विकसित हो गई है।

जनरल एम.एम. नरवणे (पूर्व सेना प्रमुख)

भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने आरएसएस नेता के बयान का पूरी तरह से समर्थन किया है। उन्होंने 'पीपल-टू-पीपल कॉन्टैक्ट' यानी दोनों देशों के आम लोगों के बीच सीधे संपर्क पर जोर दिया है। जनरल नरवणे का कहना है कि दोनों तरफ के आम इंसान की बुनियादी जरूरतें रोटी, कपड़ा और मकान और संघर्ष एक जैसे हैं। आम आदमी का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं होता। उनका मानना है कि, "जब दो देशों के लोगों के बीच दोस्ती होती है, तो देशों के बीच भी दोस्ती हो जाती है।" उन्होंने खेल और 'ट्रैक-2 कूटनीति' के जरिए दूरियां मिटाने की बात कही। हालांकि उन्होंने हालांकि स्पष्ट किया कि बातचीत का मतलब यह नहीं है कि हम सैन्य बल का प्रयोग नहीं कर सकते।

ए.एस. दुलत (पूर्व RAW चीफ)

भारत की बाहरी खुफिया एजेंसी 'रॉ' (RAW) के पूर्व प्रमुख अमरजीत सिंह दुलत हमेशा से बातचीत के पक्षधर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने एक बार फिर खुलकर इसका समर्थन किया है। दुलत का मानना है कि पाकिस्तान को कूटनीतिक रूप से अलग-थलग करने या सैन्य सख्ती की नीति से भारत को कोई खास रणनीतिक फायदा नहीं हुआ है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बंदूक और युद्ध से यह समस्या कभी खत्म नहीं होगी, इसलिए "बातचीत करने में आखिर हर्ज क्या है? जब बातचीत होती है, तो कोई न कोई रास्ता जरूर निकलता है।"

पाकिस्तान का क्या जवाब आया है?

भारत के प्रभावशाली हलकों से आ रही इन आवाजों पर पाकिस्तान सरकार की ओर से भी ताजा प्रतिक्रिया आई है। पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता 'ताहिर अंद्राबी' ने भारत से आ रही इन आवाजों का स्वागत किया है। उन्होंने इसे एक सकारात्मक घटनाक्रम बताया है। पाकिस्तान ने उम्मीद जताई है कि भारत में "समझदारी की जीत होगी" और युद्ध भड़काने वाली बयानबाजी की जगह ऐसी शांतिपूर्ण आवाजें और मुखर होंगी।

पाकिस्तान ने यह भी साफ किया है कि उसे भारत सरकार (आधिकारिक स्तर) की तरफ से अभी तक बातचीत का कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं मिला है। इसके साथ ही पाकिस्तान ने दोहराया है कि उसकी नीति हमेशा कूटनीति और बातचीत की रही है। अंद्राबी ने हालांकि दोनों देशों के बीच परोक्ष माध्यम से संवाद की पुष्टि या खंडन करने से इनकार किया।

उन्होंने कहा, ''पर्दे के पीछे या किसी अन्य माध्यम से बातचीत के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है और इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता। अगर मैं इस पर टिप्पणी करूं तो पर्दे के पीछे बातचीत का अर्थ ही खत्म हो जाएगा, क्योंकि यह पूरी तरह गोपनीय प्रक्रिया होती है।''

अंद्राबी ने यह भी कहा कि पाकिस्तान का मानना ​​है कि सभी के लिए शांति, सुरक्षा और साझा समृद्धि को आगे बढ़ाने के संबंध में रचनात्मक साझेदारी और ईमानदार संवाद आवश्यक हैं। उन्होंने कहा, ''क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक सद्भाव की दिशा में मार्ग प्रशस्त करने के लिए हम कूटनीति, संप्रभुता के सम्मान और सार्थक अंतरराष्ट्रीय जुड़ाव के सिद्धांतों के प्रति दृढ़ता से प्रतिबद्ध हैं।''

महबूबा ने पाकिस्तान के साथ संवाद के संबंध में होसबाले की टिप्पणी का स्वागत किया

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले की टिप्पणी का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि मुद्दों को सुलझाने के लिए बातचीत के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है। महबूबा ने यहां पत्रकारों से कहा, ''हम इसका स्वागत करते हैं। यह पीडीपी के रुख को पुष्ट करता है, विशेषकर (पार्टी के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद) सईद के रुख को, कि अगर जम्मू-कश्मीर में शांति कायम करनी है, तो पाकिस्तान के साथ बातचीत का द्वार हमेशा खुला रहना चाहिए। बातचीत जारी रहनी चाहिए, क्योंकि इसके अलावा कोई और रास्ता नहीं है।''

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के प्रसिद्ध कथन ''आप दोस्त बदल सकते हैं, लेकिन पड़ोसी नहीं'' का हवाला देते हुए, मुफ्ती ने कहा कि अगर आरएसएस सरकार्यवाह (महासचिव) ने यह कहा होता कि भारत को पाकिस्तान से बात करने की जरूरत है तो यह अच्छी बात होती। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजराइल भी बातचीत के जरिए ईरान के साथ मुद्दों को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं।

क्या बोल शशि थरूर?

कांग्रेस सांसद शशि थरूर का रुख हमेशा से नपा-तुला रहा है। अप्रैल में थरूर ने कहा था कि भारत का मुख्य हित 'शांति' स्थापित करने में है। थरूर का मानना है कि हम पूरी तरह से बातचीत से कटकर नहीं रह सकते। उन्होंने कहा कि "हमें सक्रिय भूमिका निभानी होगी, जब पड़ोस में आग लगी हो तो हम सिर्फ मूक दर्शक नहीं बने रह सकते।" हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भले ही बातचीत हो, लेकिन इससे पाकिस्तान के पुराने गुनाह (आतंकवाद) धुल नहीं जाएंगे।

लगता है कि होसबाले की अमेरिका यात्रा का उन पर और आरएसएस पर असर हुआ है: कांग्रेस

कांग्रेस ने RSS सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले द्वारा पाकिस्तान के संदर्भ में की गई टिप्पणी को लेकर कटाक्ष करते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि उनकी हालिया अमेरिका यात्रा का उन पर और आरएसएस दोनों पर असर हुआ है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा, "ऐसा प्रतीत होता है कि होसबाले की हालिया अमेरिकी यात्रा ने उन पर और साथ ही आरएसएस पर भी प्रभाव डाला है। जरा कल्पना करें कि विभिन्न टीवी चैनलों सहित भक्त ब्रिगेड कैसे आसमान सिर पर उठा चुके होते, अगर...।" रमेश के अनुसार, इस अमेरिका यात्रा के दौरान होसबाले के एक सहयोगी (राम माधव) ने स्वीकार किया था कि प्रधानमंत्री ने वही किया जो अमेरिका उनसे कराना चाहता था।

पहलगाम हमले के बाद क्या बदल गया कि पाकिस्तान से बातचीत हो: मनीष तिवारी

कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने भी होसबाले की पाकिस्तान से संबंधित टिप्पणी को लेकर कहा कि पहलगाम हमले के बाद से अब तक ऐसा क्या बदलाव आया कि पाकिस्तान के साथ बातचीत की जरूरत महसूस हो रही है। उन्होंने यह सवाल भी किया कि क्या संघ को ऐसी किसी ''बड़ी शक्ति" द्वारा प्रोत्साहित किया जा रहा है, जो आज सारे गलत कारणों से पाकिस्तान की कृतज्ञ बनी हुई है। होसबाले की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए तिवारी ने कहा, ''22 अप्रैल, 2025 से अब तक क्या बदलाव आया है कि बातचीत होनी चाहिए। 22 अप्रैल, 2025 को पाकिस्तान में मौजूद और पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादियों ने पहलगाम की बैसरन घाटी में निर्दोष नागरिकों का नरसंहार किया था।''

उन्होंने सवाल किया कि क्या पाकिस्तान ने कोई संकेत दिया है कि वे अपने प्रधानमंत्रियों और सैन्य नेताओं द्वारा की गई अपनी पिछली उन प्रतिबद्धताओं का सम्मान करेंगे कि पाकिस्तान आतंकवाद को राज्य की नीति के साधन के रूप में इस्तेमाल नहीं करेगा।

तिवारी ने अमेरिका का संदर्भ देते हुए कहा, ''तो, आप किस उद्देश्य से जुड़ना चाहते हैं? क्या यह केवल इसलिए है क्योंकि आपको कुछ उन बड़ी शक्तियों द्वारा प्रोत्साहित किया जा रहा है, जो आज सभी गलत कारणों से पाकिस्तान की कृतज्ञ हैं। इसलिए आपको उनके साथ बातचीत शुरू करने की आवश्यकता पड़ गई।''

फारूक अब्दुल्ला ने किया समर्थन

नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने दत्तात्रेय होसबाले की पाकिस्तान के साथ संवाद की वकालत करने वाली टिप्पणियों का समर्थन करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि युद्ध कोई विकल्प नहीं है। जम्मू कश्मीर के तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके अब्दुल्ला ने यहां पत्रकारों से बातचीत में पूर्व सेना प्रमुख एम एम नरवणे द्वारा होसबाले के बयान का समर्थन किए जाने का भी स्वागत किया।

नेकां अध्यक्ष ने कहा, ''यह बहुत बड़ा कदम है कि आरएसएस नेता ने पाकिस्तान के साथ बातचीत की बात कही है और पूर्व सेना प्रमुख ने भी उनके बयान का समर्थन किया है। मुझे खुशी है कि अब कोई यह सोच रहा है कि युद्ध कोई विकल्प नहीं है। यह संवाद का प्रश्न है, जो हमारी समस्याओं के समाधान के लिए हमेशा होना चाहिए।''

(इनपुट एजेंसी)

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डिजिटल पत्रकारिता की बदलती लहरों के बीच समाचारों की तह तक जाने की ललक अमित कुमार को इस क्षेत्र में खींच लाई। समकालीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पैनी नजर रखने के साथ-साथ अमित को जटिल विषयों के गूढ़ विश्लेषण में गहरी रुचि है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले अमित को मीडिया जगत में एक दशक का अनुभव है। वे पिछले 4 वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।


अमित न केवल समाचारों के त्वरित प्रकाशन में माहिर हैं, बल्कि वे खबरों के पीछे छिपे 'क्यों' और 'कैसे' को विस्तार से समझाने वाले एक्सप्लेनर लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं। डिजिटल पत्रकारिता के नए आयामों, जैसे कि कीवर्ड रिसर्च, ट्रेंड एनालिसिस और एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन को वे बखूबी समझते हैं। उनकी पत्रकारिता की नींव 'फैक्ट-चेकिंग' और सत्यापन पर टिकी है। एक मल्टीमीडिया पत्रकार के तौर पर अमित का सफर देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ रहा है। उन्होंने अमर उजाला, वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे बड़े मीडिया घरानों के साथ काम किया है।


अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।

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