पाकिस्तान ने भेजे सैफ अली खान के चाचा, भारत की ओर से कौन हुआ शामिल? ट्रैक-2 वार्ता का राज खुला
India Pakistan Track 2 talks: भारत और पाकिस्तान के बीच कोलंबो में सीक्रेट 'ट्रैक-2' वार्ता हुई है। राम माधव और पूर्व सेना प्रमुख नरवणे समेत दोनों देशों के दिग्गजों ने कई अहम मुद्दों पर चर्चा की।

भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 के सैन्य संघर्ष के बाद एक बार फिर पर्दे के पीछे से यानी बैक-चैनल कूटनीतिक बातचीत शुरू हो गई है। हाल ही में श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में दोनों देशों के राजनेताओं, पूर्व सैन्य अधिकारियों और राजनयिकों ने एक 'ट्रैक-2' वार्ता में हिस्सा लिया। इस बैठक में सीमा पार आतंकवाद और तनाव कम करने जैसे कई गंभीर और अहम मुद्दों पर चर्चा की गई है। खास बात ये रही कि पाकिस्तान की ओर से इस बातचीत के लिए पूर्व ISI अधिकारी व बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान के चाचा भी शामिल हुए।
कोलंबो में जुटा दोनों देशों का प्रतिनिधिमंडल
लंदन स्थित थिंक टैंक 'इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज' (IISS) की ओर से कोलंबो में इस हफ्ते एक क्षेत्रीय सुरक्षा सम्मेलन का आयोजन किया गया था। हिल्टन कोलंबो होटल में भारत और पाकिस्तान के प्रतिनिधियों ने डेढ़ दिनों तक अलग-अलग चर्चाएं कीं। इस सुरक्षा सम्मेलन में भारत और पाकिस्तान के अलावा मालदीव, श्रीलंका और ब्रिटेन (UK) के प्रतिनिधि भी शामिल हुए थे।
भारत की ओर से किसने लिया हिस्सा?
इस बैक-चैनल बैठक में भारत की तरफ से कई प्रमुख चेहरों ने भाग लिया।
राम माधव: 'इंडिया फाउंडेशन' के अध्यक्ष और 2014 से 2020 तक बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव रहे।
जनरल एमएम नरवणे: पूर्व भारतीय सेना प्रमुख (2019-2022)।
रुचि घनश्याम: ब्रिटेन में पूर्व भारतीय दूत। वह 90 के दशक के अंत में इस्लामाबाद स्थित उच्चायोग में काम करने वाली पहली महिला राजनयिकों में से एक थीं।
पाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन था?
पाकिस्तान की तरफ से इस बैठक में एक सेवारत (वर्किंग) राजनयिक सहित कई अहम चेहरे शामिल हुए।
सज्जाद हैदर खान: पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय में सेवारत राजनयिक (महानिदेशक, दक्षिण एशिया और सार्क)।
शेरी रहमान: पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (PPP) की नेता, पूर्व मंत्री और अमेरिका में पाकिस्तान की पूर्व राजदूत।
मेजर जनरल (रिटायर्ड) इस्फंदयार अली खान पटौदी: पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) में काम कर चुके पूर्व अधिकारी और एक मैकेनाइज्ड डिवीजन के कमांडर। खास बात यह है कि वह बॉलीवुड स्टार सैफ अली खान के चाचा भी हैं।
किन अहम मुद्दों पर हुई चर्चा?
सूत्रों के मुताबिक, कोलंबो में हुई इस ट्रैक-2 चर्चा का कोई बहुत बड़ा या अहम नतीजा निकलकर सामने नहीं आया है। हालांकि, इस दौरान कई संवेदनशील मुद्दों पर मंथन किया गया।
- आतंकवाद और सीमा पार बहने वाली नदियों के पानी का बंटवारा।
- संकट या इमरजेंसी के समय दोनों देशों के बीच संचार (कम्युनिकेशन) को मजबूत करना।
- दोनों देशों के बीच भविष्य में तनाव को बढ़ने से रोकना।
सम्मेलन के दौरान आईआईएसएस (IISS) की ओर से एक खास डिनर भी आयोजित किया गया था। इस डिनर में 21-24 जून तक श्रीलंका के दौरे पर आए अमेरिकी विदेश विभाग के सहायक सचिव (दक्षिण और मध्य एशियाई मामले) एस पॉल कपूर भी शामिल हुए। कुछ चुनिंदा भारतीय और पाकिस्तानी प्रतिनिधि भी इस डिनर में मौजूद थे।
मई 2025 के संघर्ष के बाद से जारी हैं बैठकें
पिछले साल अप्रैल में हुए पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत ने पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था। इसके बाद मई 2025 में दोनों देशों के बीच चार दिनों तक संघर्ष ('ऑपरेशन सिंदूर') चला था। इस तनातनी के बाद से अब तक दोनों देशों के रणनीतिकारों, पूर्व राजनयिकों और सांसदों के बीच कम से कम चार बैक-चैनल बैठकें हो चुकी हैं। ऐसी पहली बैठक पिछले साल जुलाई में लंदन में हुई थी।
'आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं'
वर्तमान में भारत और पाकिस्तान के बीच कोई औपचारिक या आधिकारिक स्तर की बातचीत नहीं हो रही है। हालांकि, दोनों देशों के डीजीएमओ (DGMOs) के बीच हॉटलाइन चालू है और हर मंगलवार को दोनों तरफ के अधिकारियों की बात होती है। कोलंबो में हुई इस बैठक पर भारतीय अधिकारियों ने कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन एक अधिकारी ने साफ किया, "हमारा रुख स्पष्ट है- आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते। इस संपर्क का किसी आधिकारिक बातचीत से कोई लेना-देना नहीं है।"
चूंकि पाकिस्तान की तरफ से एक सेवारत अधिकारी बैठक में मौजूद था, इसलिए कुछ लोगों ने इसे 'ट्रैक-1.5' वार्ता बताने की कोशिश की। हालांकि, इसे सिरे से खारिज कर दिया गया क्योंकि भारत की तरफ से इसमें कोई भी वर्किंग अधिकारी शामिल नहीं था।
आरएसएस ने भी किया था बातचीत का समर्थन
मई के महीने में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ पदाधिकारी दत्तात्रेय होसबोले ने एक इंटरव्यू में कहा था कि सरकार को पाकिस्तान के सैन्य और राजनीतिक प्रतिष्ठान के कार्यों के खिलाफ भारत की सुरक्षा और सम्मान की रक्षा करनी चाहिए, लेकिन साथ ही बातचीत के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं करने चाहिए। इसके कुछ दिनों बाद पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे ने भी इस बयान का समर्थन करते हुए कहा था कि ट्रैक-2 कूटनीति या खेल आयोजनों के जरिए दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बनाए रखना जरूरी है।
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