
पाकिस्तान फिर बेनकाब; श्रीलंका को राहत प्लेन भेजने में देरी के आरोप पर भारत ने लताड़ा, क्या कहा
प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा कि 1 दिसंबर 2025 को दोपहर 1 बजे इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग को अनुरोध मिला। मानवीय सहायता की तत्काल आवश्यकता को देखते हुए भारत ने उसी दिन शाम 5:30 बजे अनुमति दे दी।
श्रीलंका में चक्रवात दित्वा से बाढ़ और भूस्खलन ने भयानक तबाही मचाई, जिसमें 334 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इस संकट के बीच पाकिस्तान ने मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए अपने विमान को भारतीय हवाई क्षेत्र से गुजरने की इजाजत मांगी। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया कि भारत ने 60 घंटे से अधिक देरी की, जिससे राहत उड़ान में बाधा आई। हालांकि, भारतीय विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के बयान को हास्यास्पद और झूठा प्रचार बताया है।
प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा कि 1 दिसंबर 2025 को दोपहर 1 बजे इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग को अनुरोध मिला। मानवीय सहायता की तत्काल आवश्यकता को देखते हुए भारत ने उसी दिन शाम 5:30 बजे अनुमति दे दी, जो प्रस्तावित यात्रा कार्यक्रम के अनुसार थी। उन्होंने कहा, 'मात्र 4 घंटे में प्रक्रिया पूरी की गई, जो न्यूनतम नोटिस अवधि से भी कम है।' अधिकारियों ने जोर दिया कि सभी ओवरफ्लाइट अपील अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के अनुसार निपटाए जाते हैं। पाक मीडिया के दावों को फर्जी करार देते हुए भारत ने कहा कि यह एंटी-इंडिया मिसइनफॉर्मेशन का एक और प्रयास है।
भारत ने श्रीलंका को 53 टन राहत सामग्री भेजी
ऑपरेशन सागर बंधु के तहत भारत ने श्रीलंका को 53 टन से अधिक राहत सामग्री भेजी, जिसमें नौसेना के जहाजों से 9.5 टन इमरजेंसी राशन, वायुसेना के विमानों से 31.5 टन तंबू, कंबल, दवाएं और आईएनएस सुकन्या से 12 टन सामग्री शामिल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीलंकाई लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की और हर संभव मदद का आश्वासन दिया। पाकिस्तान के विपरीत भारत ने बिना शर्त सहायता प्रदान की, जो क्षेत्रीय एकजुटता का प्रतीक है। यह विवाद दर्शाता है कि कैसे प्राकृतिक आपदा के समय भी पाकिस्तान झूठा राजनीतिक प्रचार करने लगता है, लेकिन भारत की त्वरित कार्रवाई ने श्रीलंका के भाईचारे को मजबूत किया।





