दुश्मनों को टेंशन देने का प्लान, भारत खरीदेगा 100 से ज्यादा राफेल विमान; कितना होगा खर्च

Nisarg Dixit लाइव हिन्दुस्तान
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भारतीय वायु सेना के पास अभी सिर्फ लगभग 30 लड़ाकू विमान स्क्वाड्रन हैं, जबकि उसकी स्वीकृत संख्या 42 है। पाकिस्तान और बांग्लादेश, और पाकिस्तान और चीन के बीच बढ़ते गठजोड़ के साथ, खतरे की आशंका और बढ़ गई है। पढ़ें पूरी खबर।

दुश्मनों को टेंशन देने का प्लान, भारत खरीदेगा 100 से ज्यादा राफेल विमान; कितना होगा खर्च

रक्षा बजट में इजाफा करने के बाद अब भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाने की तैयारी जोरों पर है। खबर है कि भारत अब फ्रांस के साथ 100 से ज्यादा राफेल विमान खरीदने के प्रस्ताव पर चर्चा करने जा रहा है। यह कदम ऐसे समय पर उठाया जा रहा है, जब भारत सीमा पर पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी मुल्कों से तल्ख रिश्तों का सामना कर रहा है।

बड़ी डील

फरवरी के तीसरे हफ्ते में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के दौरे से पहले रक्षा मंत्रालय भारतीय वायु सेना के लिए 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के 3.25 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव पर चर्चा कर सकता है। भारतीय वायु सेना के प्रस्ताव को पिछले महीने रक्षा खरीद बोर्ड ने शुरुआती मंजूरी दे दी थी। फ्रांसीसी राष्ट्रपति के 18 फरवरी को एआई शिखर सम्मेलन के लिए दिल्ली में रहेंगे।

समाचार एजेंसी एएनआई को रक्षा सूत्रों ने बताया कि इस प्रस्ताव पर अगले हफ्ते रक्षा मंत्रालय की एक उच्च-स्तरीय बैठक में चर्चा होने की संभावना है और इसे क्षेत्र में मौजूदा सुरक्षा स्थिति को देखते हुए भारतीय वायु सेना की ऑपरेशनल जरूरतों को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अभी क्या है स्थिति

भारतीय वायु सेना के पास अभी सिर्फ लगभग 30 लड़ाकू विमान स्क्वाड्रन हैं, जबकि उसकी स्वीकृत संख्या 42 है। पाकिस्तान और बांग्लादेश, और पाकिस्तान और चीन के बीच बढ़ते गठजोड़ के साथ, खतरे की आशंका और बढ़ गई है।

उम्मीद है कि यह प्रोजेक्ट भारतीय वायु सेना को लंबे समय तक 4.5-जेनरेशन-प्लस मल्टीरोल लड़ाकू विमान की जरूरत को पूरा करने में मदद करेगा। डील के तहत खरीदे जाने वाले 114 राफेल लड़ाकू विमानों में से लगभग 80 प्रतिशत भारत में बनाए जाने की योजना है।

सूत्रों ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के तहत भारतीय वायु सेना को 88 सिंगल-सीटर और 26 ट्विन-सीटर विमान मिलेंगे, जिनमें से ज्यादातर डसॉल्ट और भारतीय निजी क्षेत्र की कंपनियों के सहयोग से भारत में बनाए जाएंगे।

एक बार डील पूरी हो जाने के बाद, भारतीय वायु सेना के पास 150 राफेल का बेड़ा होगा, साथ ही भारतीय नौसेना के पास 26 विमान होंगे, जो फ्रांसीसी विमानों का एयरक्राफ्ट कैरियर-कम्पैटिबल वर्जन होगा।

भारत ने बढ़ाया रक्षा बजट

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को का बजट पेश किया, जिसमें रक्षा मंत्रालय के लिए सबसे अधिक 7.85 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह कुल बजट का 14.68 प्रतिशत और पिछले वर्ष के बजट से 15 प्रतिशत अधिक है। मंत्रालय ने कहा है कि मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से रक्षा मंत्रालय के बजट में निरंतर बढोतरी की गई है। वर्ष 2021-22 में रक्षा मंत्रालय का बजट 4.84 लाख करोड़ रुपये, 2022-23 में 5.25 लाख करोड़ रुपये, 2023-24 में 5.94 लाख करोड़ रुपये, 2024-25 में 6.2 लाख करोड़ रुपये और 2025-26 में 6.81 लाख करोड़ रुपये था।

पहली बार रिकॉर्ड करीब 1.03 लाख करोड़ रुपये की वृद्धि रक्षा के मद में हुई है। बता दें कि पिछली बढ़ोतरी सिर्फ नौ फीसदी की हुई थी। इस बार 15 फीसदी की वृद्धि के बावजूद रक्षा बजट जीडीपी के दो फीसदी ही है। वैसे चीन भी रक्षा पर दो प्रतिशत के करीब ही खर्च करता है, लेकिन उसकी जीडीपी का आकार बहुत बड़ा है।

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निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।

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