होर्मुज खुलवाने के लिए भारत को आया बुलावा, कौन हो रहा बैठक में शामिल; खत्म होगा संकट?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलवाने पर चर्चा करने वाली अहम बैठक के बारे में पुष्टि करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि यूके ने बातचीत के लिए भारत सहित कई देशों को आमंत्रित किया है। विदेश सचिव इस बैठक में शामिल हो रहे हैं।

अमेरिका-ईरान युद्ध की वजह से लगभग महीनेभर से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) बंद है। बिना इजाजत होर्मुज पार करने वाले जहाजों पर ईरान मिसाइलें बरसाकर उन्हें समुद्र की तलहटी पर डुबो दे रहा है। दुनियाभर के देश इस चिंता में डूबे हुए हैं कि कैसे होर्मुज को खुलवाया जाए, जिससे ऊर्जा संकट से राहत मिल सके। इस बीच, ब्रिटेन ने इसे फिर से खुलवाने के लिए इंटरनेशनल लेवल पर बैठक आयोजित की है, जिसमें विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों को बुलाया गया है। इसमें भारत को भी न्योता दिया गया है और केंद्र सरकार की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिसरी शामिल हो रहे हैं।
होर्मुज पर चर्चा करने वाली इस अहम बैठक के बारे में पुष्टि करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ''ब्रिटेन ने बातचीत के लिए भारत सहित कई देशों को आमंत्रित किया है। विदेश सचिव इस बैठक में शामिल हो रहे हैं।'' ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या इस बैठक से सफलता मिलेगी और होर्मुज खुलने पर कोई सहमति बन पाएगी या नहीं। अगर होर्मुज खुल जाता है तो दुनियाभर में ऊर्जा संकट कम हो जाएगा। इसी रास्ते से पहले 20 फीसदी कच्चा तेल जाता था।
ब्रिटेन गुरुवार को एक बैठक की मेजबानी कर रहा है, जिसका मकसद ऐसे देशों का एक गठबंधन बनाना है जो होर्मुज को फिर से खोलने के तरीकों पर विचार कर सकें। यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद उठाया जा रहा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि इस महत्वपूर्ण जलमार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करना अन्य देशों की जिम्मेदारी है। ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर इस वर्चुअल बैठक की अध्यक्षता कर रही हैं। इस बैठक में भारत, फ्रांस, जर्मनी, इटली, कनाडा और संयुक्त अरब अमीरात सहित लगभग 35 देश शामिल होंगे, और इसका उद्देश्य इस क्षेत्र में नौवहन की स्वतंत्रता को बहाल करने के तरीकों पर चर्चा करना है। इस बैठक में अमेरिका शामिल नहीं होगा।
'यह युद्ध हमारा नहीं'
युद्ध की शुरुआत से ही ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने लगातार अपने देश को इस संघर्ष में घसीटने से इनकार किया है। उन्होंने कहा है कि यह हमारा युद्ध नहीं है और इसमें शामिल होना ब्रिटिश राष्ट्रीय हितों के खिलाफ है। युद्ध के शुरुआती दिनों में, स्टार्मर ने ईरान पर हमले करने के लिए यूके के सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करने के अमेरिका के अनुरोधों को भी ठुकरा दिया था। बाद में इस रुख में बदलाव आया और तब से ब्रिटेन ने अमेरिका को ईरान के खिलाफ रक्षात्मक हमलों के लिए कुछ खास सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी। हालांकि, स्टार्मर अब भी इस बात पर जोर देते हैं कि ब्रिटेन युद्ध की स्थिति में नहीं है।
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