चीन-पाक की नींद उड़ाने की है तैयारी, INS अरिधमन के साथ आ रहा भारत का ‘न्यूक्लियर सबमरीन ट्रायड'

Feb 23, 2026 09:09 pm ISTDevendra Kasyap लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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भारत की समुद्री परमाणु प्रतिरोधक क्षमता इस समय एक अहम मोड़ पर है। मई 2026 तक तीसरी अरिहंत-श्रेणी की परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी आईएनएस अरिधमन के शामिल होने के साथ भारत सामरिक बल कमान के तहत तीन स्वदेशी एसएसबीएन संचालित करने की स्थिति में होगा।

चीन-पाक की नींद उड़ाने की है तैयारी, INS अरिधमन के साथ आ रहा भारत का ‘न्यूक्लियर सबमरीन ट्रायड'

भारत की समुद्री परमाणु प्रतिरोधक क्षमता इस समय एक अहम मोड़ पर है। मई 2026 तक तीसरी अरिहंत-श्रेणी की परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी आईएनएस अरिधमन के शामिल होने के साथ भारत सामरिक बल कमान के तहत तीन स्वदेशी एसएसबीएन संचालित करने की स्थिति में होगा। यह सफलता ऐसे समय में मिल रही है जब चीन हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी परमाणु और पारंपरिक पनडुब्बी ताकत तेजी से बढ़ा रहा है और पाकिस्तान चीन निर्मित वायु-स्वतंत्र प्रणोदन (एआईपी) युक्त आधुनिक पनडुब्बियां शामिल कर रहा है। ऐसे में भारत अपने न्यूक्लियर ट्रायड के सबसे सुरक्षित और गुप्त स्तंभ को लगातार सुदृढ़ कर रहा है। आकार में बड़ी, कम शोर वाली और लंबी दूरी की K-4 मिसाइलों से लैस अरिधमन हिंद महासागर की गहराइयों से विश्वसनीय द्वितीय-प्रहार क्षमता सुनिश्चित करेगा।

आईएनएस अरिहंत: समुद्री परमाणु प्रतिरोध की शुरुआत

अगस्त 2016 में सेवा में शामिल आईएनएस अरिहंत एडवांस्ड टेक्नोलॉजी वेसल कार्यक्रम के वर्षों के गोपनीय प्रयासों का परिणाम था। विशाखापत्तनम स्थित शिपबिल्डिंग सेंटर में निर्मित इस पनडुब्बी का विस्थापन लगभग 6000 टन है और यह 83 मेगावाट के स्वदेशी कॉम्पैक्ट लाइट वाटर रिएक्टर से संचालित होती है। लगभग 111.6 मीटर लंबी अरिहंत ने भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में ला खड़ा किया जो परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां संचालित करते हैं। इसकी प्रणोदन प्रणाली इसे लगभग असीमित दूरी तक संचालन की क्षमता देती है, जिसकी सीमा मुख्य रूप से चालक दल की आपूर्ति पर निर्भर करती है। यह जलमग्न अवस्था में करीब 24 समुद्री मील की गति से चल सकती है और लंबे समय तक गुप्त गश्त के लिए डिजाइन की गई है।

हथियार प्रणाली की बात करें तो इसमें चार वर्टिकल लॉन्च ट्यूब हैं, जिन्हें 750 किमी रेंज की 12 K-15 सागरिका मिसाइलों या 3500 किमी रेंज की चार K-4 मिसाइलों के लिए कॉन्फ़िगर किया जा सकता है। इसके अलावा छह 533 मिमी टॉरपीडो ट्यूब भी हैं। वर्ष 2018 में अरिहंत ने अपना पहला निवारक गश्ती मिशन पूरा कर भारत की समुद्री परमाणु निवारक क्षमता को औपचारिक रूप से स्थापित किया। इसने भूमि और वायु आधारित प्रणालियों के साथ भारत के परमाणु त्रिक को पूर्णता दी।

आईएनएस अरिघात: क्षमता में विस्तार

29 अगस्त 2024 को सेवा में शामिल आईएनएस अरिघात अरिहंत का अपडेट वर्जन है। लगभग 6000 टन विस्थापन के साथ यह अधिक परिष्कृत और आधुनिक प्रणालियों से लैस है। इसे भी विशाखापत्तनम में बनाया गया और विस्तृत समुद्री परीक्षणों के बाद नौसेना में शामिल किया गया। इसकी परमाणु प्रणोदन प्रणाली दबावयुक्त हल्के जल रिएक्टर पर आधारित है, जो कम ध्वनि के साथ लंबी जलमग्न तैनाती को संभव बनाती है।

अरिघात में भी चार वर्टिकल लॉन्च ट्यूब हैं, लेकिन इसे मुख्य रूप से लंबी दूरी की K-4 मिसाइलों के लिए अनुकूलित माना जाता है। इससे हिंद महासागर की गहराइयों से रणनीतिक लक्ष्यों तक पहुंच संभव होती है और भारत की जवाबी क्षमता मजबूत होती है। इसमें स्वदेशी सोनार प्रणाली यूएसएचयूएस और पंचेंद्रिया शामिल हैं। दो एसएसबीएन के संचालन से रोटेशनल तैनाती संभव होती है, जिससे निरंतर प्रतिरोध सुनिश्चित किया जा सकता है।

आईएनएस अरिधमन: 7000 टन का लेटेस्ट वर्जन

आईएनएस अरिधमन अब तक का सबसे उन्नत और बड़ा संस्करण है। लगभग 7000 टन विस्थापन के साथ इसमें महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं। सबसे बड़ा बदलाव वर्टिकल लॉन्च ट्यूबों की संख्या चार से बढ़ाकर आठ करना है। इससे यह 24 K-15 या आठ K-4 मिसाइलें ले जाने में सक्षम होगा। भविष्य में 6000 किमी रेंज की K-5 मिसाइल को भी शामिल किए जाने की संभावना है।

अरिधमन उन्नत 83 मेगावाट रिएक्टर, सात ब्लेड वाले कम-शोर प्रोपेलर और ध्वनि-अवरोधक तकनीक से लैस है। इसकी जलमग्न गति लगभग 24 समुद्री मील और सतह पर 12-15 समुद्री मील है। बढ़े हुए आकार से बेहतर कमान-नियंत्रण, चालक दल की सुविधाएं और उन्नत युद्ध प्रणाली संभव हुई है। तीन एसएसबीएन के साथ भारत कम से कम एक पनडुब्बी को हर समय गश्त पर रख सकेगा।

व्यापक परमाणु और पारंपरिक ढांचा

भारत का एसएसबीएन बेड़ा सामरिक बल कमान के अधीन है और इसका संचालन विशाखापत्तनम के पास उच्च-सुरक्षा प्रोजेक्ट वर्षा नौसैनिक अड्डे से होगा। समुद्री घटक परमाणु त्रिक का सबसे सुरक्षित हिस्सा माना जाता है, क्योंकि समुद्र में तैनात पनडुब्बियों का पता लगाना बेहद कठिन होता है।

2027-28 तक रूस की अकुला-श्रेणी की चक्र III परमाणु हमलावर पनडुब्बी भी शामिल होने की उम्मीद है, जो जहाज-रोधी और पनडुब्बी-रोधी अभियानों पर केंद्रित होगी। इसके साथ ही प्रोजेक्ट-75I के तहत छह नई पीढ़ी की एआईपी-सक्षम डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां भी बनाई जा रही हैं, जिनका निर्माण मझगांव डॉक में होगा।

चीन और पाकिस्तान से तुलना

अगर चीन और पाकिस्तान से तुलना किया जाए तो इस वक्त चीन के पास 50 से अधिक डीजल-इलेक्ट्रिक और 10 से अधिक परमाणु पनडुब्बियां हैं, जिनमें जिन-श्रेणी की एसएसबीएन शामिल हैं। उसकी हिंद महासागर में मौजूदगी लगातार बढ़ रही है। पाकिस्तान आठ युआन-श्रेणी एआईपी पनडुब्बियां शामिल कर रहा है।

नंबर गेम में भारत पीछे हो सकता है, लेकिन गुणात्मक दृष्टि से उसकी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हो रही है। अरिधमन और चक्र III जैसे प्लेटफॉर्म भारत की रणनीतिक गहराई, सहनशक्ति और गुप्त संचालन क्षमता को और सुदृढ़ करेंगे। भारत का लक्ष्य न्यूनतम लेकिन विश्वसनीय प्रतिरोध सुनिश्चित करना है, ताकि किसी भी परिस्थिति में प्रभावी जवाबी कार्रवाई की क्षमता बनी रहे।

Devendra Kasyap

लेखक के बारे में

Devendra Kasyap

देवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।

देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।

मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।

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