संकट में है भारत का जीपीएस सिस्टम, खराब हो गई एक सैटलाइट की एटॉमिक घड़ी

Mar 16, 2026 09:00 am ISTAnkit Ojha लाइव हिन्दुस्तान
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भारत के तीन नेविगेशन सैटलाइट इस समय ठीक से काम कर रहे हैं। वहीं एक सैटलाइनट एक्सपायर हो रहा है। उसकी एटॉमिक क्लॉक भी खराब हो गई है। ऐसे में जीपीएस को लेकर संकट खड़ा हो सकता है। 

संकट में है भारत का जीपीएस सिस्टम, खराब हो गई एक सैटलाइट की एटॉमिक घड़ी

भारत का सैटलाइट नेविगेशन सिस्टम NavIC अब संकट का सामना कर रहा है। इस वजह से जीपीएस सिस्टम पर बड़ा प्रभाव पड़ रहा है। इसरो ने बताा है कि IRNSS-1F सैटलाइट जो कि मार्च 2016 में लॉन्च किया गया था. उसकी उम्र 10 मार्च को पूरी हो गई है। ऐसे में सैटलइट पर एटमिक क्लॉक चलनी बंद हो गई है। फिलहाल यह सैटलाइट ऑर्बिट में रहेगा औ एक तरफा संदेश भेजता रहेगा। हालांकि इससे नेविगेट करना संभव नहीं होगा।

दरअसल धरती पर उत्तरोत्तर स्थिति का पता लगाने के लिए कम से कम चार सैटलाइट्स की जरूरत होती है। हालांकि इस समय तीन सैटलाइट ही ठीक से काम कर रहे हैं। इनमें आईआरएनएसएस-1बी शामिल है जो कि अप्रैल 2014 में लॉन्च किया गया था। इसके अलावा आईआरएनएसएस-1एल अप्रैल 2018 में लॉन्च किया गया था। एनवीएस-01 और आईआरएनएसएस मई 2023 का सैटलाइट शामिल है।

आईआरएनएस -1बी की 10 साल की आयु पूरी हो चुकी है। अब यह एक्स्ट्रा टाइम में काम कर रहा है। एनवीएस-01 अभी सबसे ज्यादा ठीक से काम करने वाला और नया सैटलाइट है। हालांकि एक ही सैटलाइट अपने दम पर नेविगेशन सिस्टम नहीं चला सकता है।

क्या होती है एटमिक क्लॉक

किसी भी सैटलाइट की धड़कन एटमिक क्लॉक को ही माना जाता है। यह एटम्स की नेचुरल वाइब्रेशन को मापती है और ट्रैकिंग का काम करती है। जब सैटलाइट से हमारे फोन तक सिग्नल आते हैं तो यह क्लॉक इसके बीच लगने वाले समय का पता गाती है। अगर इसके कैलकुलेशन में थोड़ी भी कमी होती है तो आपको सही लोकेशन नहीं मिल पाती है और सैकड़ों मीटर का अंतर आ जाता है।

पहली बार एनवीएस-01 में देसी एटमिक क्लॉक का इस्तेमाल किया गया है। इससे पहले दूसरे देशों में बनी एटमिक क्लॉक ही लगाई जाती थी। जुलाई 2025 में 11 NavIC सैटलाइट सिस्टम को कक्षा में स्थापित थे। इनमें से चार नेविगेशन ऐंट टाइमिंग सर्विस के लिए काम कर रहे हैं। चार का इस्तेमाल ब्रॉडकास्ट के लिए किया जाता है। एक को डीकमीशन करदिया गया था। वहीं दो अपनी सही कक्षा में पहंच ही नहीं पाए थे। 13 मार्च 2026 को आईआरएनएसएस-1एफ के फेल होने के बाद पीएनटी की संख्या चार से कम होकर तीन ही रह गई है।

एनवीएस-02 को जनवरी 2025 में लॉन्च किया गया था लेकिन यह सही कक्षा में स्थापित नहीं हो पाया। इलेक्ट्रिकल गड़बड़ी की वजह से इसका इंजन भी काम करना बंद कर चुका है। ऐसे में यह सैटलाइट काम नहीं कर पा रहा है। यह सैटलाइट नेविगेशन की सेवा देने में कारगर नहीं है।

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लेखक के बारे में

Ankit Ojha

विद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।


राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।


अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।

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