
भारत ने निकाल ली चीन की काट? क्रिटिकल मिनरल्स पर ये चार देश कराएंगे बेड़ा पार; जानें- क्या है तैयारी
भारत के खान मंत्रालय के नेतृत्व में यह कूटनीतिक पहल आगे बढ़ रही है। एक सूत्र के अनुसार, फ्रांस, नीदरलैंड्स और ब्राज़ील के साथ बातचीत जारी है, जबकि कनाडा के साथ समझौता सक्रिय विचाराधीन है।
भारत ने जरूरी खनिजों के लिए पड़ोसी देश चीन पर से अपनी निर्भरता कम करने के लिए ब्राज़ील, कनाडा, फ्रांस और नीदरलैंड्स के साथ बड़ा कदम बढ़ाया है। भारत इन चारों देशों के साथ जरूरी मिनरल्स की खोज, उसे निकालने, उसकी प्रोसेसिंग और रीसाइक्लिंग करने के लिए मिलकर समझौते करने के लिए बातचीत कर रहा है। भारत की यह कवायद, एनर्जी ट्रांज़िशन और जरूरी कच्चा माल हासिल करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इन चर्चाओं का केंद्र मुख्य रूप से लिथियम और रेयर अर्थ एलिमेंट्स हैं, जो इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी निर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा और आधुनिक तकनीकों के लिए बेहद आवश्यक माने जाते हैं। भारत इन देशों से उन्नत खनिज-प्रसंस्करण तकनीक तक पहुँच भी चाहता है। सूत्रों के अनुसार, यह बातचीत फिलहाल गोपनीय स्तर पर चल रही है।
चीन के दबदबे से बाहर निकलने की रणनीति
यह पहल ऐसे समय पर सामने आई है, जब दुनिया भर में कई अहम खनिजों के खनन और प्रसंस्करण पर चीन का प्रभुत्व बना हुआ है। वहीं भारत अब आपूर्ति शृंखलाओं में विविधता लाकर किसी एक देश पर निर्भरता कम करने की रणनीति अपना रहा है। ऊर्जा संक्रमण को गति देने और बढ़ती औद्योगिक व बुनियादी ढांचा जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत को इन खनिजों की दीर्घकालिक आपूर्ति सुनिश्चित करनी होगी। खनन विशेषज्ञों के हवाले से TOI की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन पर अत्यधिक निर्भरता भारत के लिए रणनीतिक जोखिम है, हालांकि उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि खनन परियोजनाएँ समय लेने वाली होती हैं और केवल खोज प्रक्रिया में ही 5 से 7 साल तक लग सकते हैं और हर परियोजना व्यावसायिक उत्पादन तक नहीं पहुँच पाती हैं।
जर्मनी मॉडल अपनाने की तैयारी
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत जनवरी में जर्मनी के साथ किए गए क्रिटिकल मिनरल्स समझौते के कुछ प्रावधानों को दोहराने पर विचार कर रहा है। उस समझौते में न केवल खोज और प्रसंस्करण, बल्कि तीसरे देशों में खनिज परिसंपत्तियों के अधिग्रहण और विकास का प्रावधान भी शामिल है।
खान मंत्रालय की अगुवाई, कनाडा समझौते पर खास नजर
भारत के खान मंत्रालय के नेतृत्व में यह कूटनीतिक पहल आगे बढ़ रही है। एक सूत्र के अनुसार, फ्रांस, नीदरलैंड्स और ब्राज़ील के साथ बातचीत जारी है, जबकि कनाडा के साथ समझौता सक्रिय विचाराधीन है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के मार्च की शुरुआत में भारत आने की संभावना है। इस दौरान यूरेनियम, ऊर्जा, खनिज और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े कई समझौतों पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। कनाडा के प्राकृतिक संसाधन विभाग ने पहले ही संकेत दिया है कि दोनों देश आने वाले हफ्तों में क्रिटिकल मिनरल्स सहयोग को औपचारिक रूप देने पर सहमत हैं।
वैश्विक स्तर पर भी तेज हुई कोशिशें
इससे पहले भारत अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ क्रिटिकल मिनरल्स समझौते कर चुका है, जबकि पेरू और चिली के साथ भी व्यापक द्विपक्षीय वार्ताएँ चल रही हैं। यह प्रयास उस वैश्विक रुझान का हिस्सा है, जिसमें कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाएँ रेयर अर्थ्स के लिए चीन पर निर्भरता घटाने की कोशिश कर रही हैं। गौरतलब है कि 2023 में भारत ने लिथियम सहित 20 से अधिक खनिजों को अपनी ऊर्जा सुरक्षा और दीर्घकालिक आर्थिक जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण घोषित किया था। स्पष्ट है कि आने वाले वर्षों में ये खनिज केवल संसाधन नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक ताकत का भी अहम आधार बनने वाले हैं और भारत इस दौड़ में पीछे नहीं रहना चाहता।

लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।




