India EU Deal: भारत संग ट्रेड डील और डोनाल्ड ट्रंप को सीधा संदेश, नए दोस्तों की तलाश में क्यों है यूरोप?
भारत ने पिछले चार साल में नौ ट्रेड समझौते किए हैं। इनमें से तीन समझौते ट्रंप के दूसरी बार शपथ लेने के बाद 2025 में हुए हैं। इन देशों में ब्रिटेन, ओमान और न्यूजीलैंड के नाम शामिल हैं।
भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने सोमवार को प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लिए आधिकारिक स्तर की बातचीत पूरी कर ली है। इस ऐतिहासिक समझौते से ना सिर्फ दोतरफा व्यापार को बढ़ावा मिलने बल्कि आर्थिक संबंध मजबूत बनाने का भी अवसर मिलेगा। यह समझौता ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका की व्यापार और सुरक्षा नीतियों के कारण दुनिया में नए भू-राजनीतिक उथल-पुथल देखने को मिल रहा है।
यूरोप और अमेरिका के बीच संबंधों में आई नई दरारों के बीच इस समझौते से पहले मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा की शिखर वार्ता की मेजबानी करेंगे। कोस्टा और वॉन डेर लेयेन ने सोमवार को कर्तव्य पथ पर आयोजित 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की थी। शिखर सम्मेलन से पहले वॉन डेर लेयेन ने कहा है कि एक सफल भारत दुनिया को अधिक स्थिर, समृद्ध एवं सुरक्षित बनाता है। इससे पहले बहुप्रतीक्षित भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते को यूरोपीय संघ ‘मदर ऑफ ऑल द डील्स’ का नाम दे रहा है। ऐसे में सवाल यह हैं कि आखिर यूरोप इस डील को इतनी तवज्जों क्यों दे रहा है?
यूरोप को भारत की जरूरत
ईयू के नेता इस समझौते को लेकर काफी आक्रामक रुख में दिख रहे हैं। इससे यह संकेत भी मिल रहे हैं कि समूह भारत के साथ किसी भी तरह समझौते तक पहुंचने की जल्दबाजी में है। विशेषज्ञों के मुताबिक ईयू के लिए भारत के साथ ट्रेड डील करना जरूरत बन गया है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि यूरोप इस समय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों को लेकर सबसे ज्यादा परेशान है।
अमेरिका ने ग्रीनलैंड हासिल करने के अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए नाटो सहयोगियों पर ही टैरिफ लगाने की धमकी दी है। वहीं यूक्रेन युद्ध के मामले में भी यूरोप खुद को अलग-थलग महसूस कर रहा है क्योंकि अमेरिका सीधे रूस से बातचीत कर रहा है। यह नाटो के लिए असहज स्थिति है।
क्या चाहता है यूरोपीय संघ?
जानकारों की मानें भारत और EU के बीच होने वाला समझौता भारत में नए बाजार खोलेगा, बाधाएं हटाएगा और क्लीन टेक्नोलॉजी, फार्मास्यूटिकल्स और सेमीकंडक्टर जैसे अहम सेक्टर में सप्लाई चेन को मजबूत करेगा। ईयू भारत के साथ ट्रेड, सुरक्षा और रक्षा, क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन और लोगों के बीच सहयोग को मजबूत करने का मौका देख रहा है। इस डील के मुख्य आधार सस्टेनेबिलिटी, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन होंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, ईयू यूरोपीय कारों और वाइन पर लगने वाले टैरिफ में कटौती चाहता है।
रिपोर्ट के मुताबिक भारत ईयू से आयात होने वाली कारों पर टैरिफ को 110 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत करने की योजना बना रहा है। भारत हर साल 2 लाख पेट्रोल और डीजल कारों की सीमा तय करेगा। आने वाले सालों में टैरिफ को और घटाने की भी योजना है, जिससे यूरोपीय कार कंपनियों को बंपर फायदा होगा। यह यूरोप के लिए बड़ा मौका है, क्योंकि भारत कार बिक्री के मामले में अमेरिका और चीन के बाद तीसरे नंबर पर है। भारत में हर साल करीब 44 लाख कारें बिकती हैं, जिनमें फिलहाल ईयू की हिस्सेदारी सिर्फ 4 प्रतिशत है।
ट्रंप को भी मैसेज
इस बीच यूरोपीय काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने सोमवार को कहा है कि भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुआ यह समझौता टैरिफ के खिलाफ एक संदेश भेजता है। कोस्टा ने अमेरिका की व्यापार नीतियों से पैदा हुई अराजकता की ओर इशारा करते हुए कहा, “ऐसे समय में जब संरक्षणवाद चरम पर है और कुछ देशों ने टैरिफ बढ़ाने का फैसला किया है, भारत-EU FTA दुनिया को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश देगा कि हम टैरिफ के बजाय ट्रेड एग्रीमेंट में ज्यादा विश्वास करते हैं।"





