'अपनी लाहौर वाली एडवाइजरी तो पढ़ लो...' पाकिस्तान के बाढ़ वाले दावे पर भारत ने सुनाया
पाकिस्तान के 'जानबूझकर बाढ़ लाने' के आरोपों पर भारत ने करारा जवाब दिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि चिनाब में उफान भारी बारिश से हुआ है। सिंधु जल संधि पर भी सख्त रुख कायम रखा।

पाकिस्तान में आई बाढ़ और भारी बारिश के कारण मची तबाही के बीच पाकिस्तानी मीडिया ने आरोप लगाया था कि भारत जानबूझकर उनके मुल्क में बाढ़ ला रहा है। अब भारत ने इन दावों को पूरी तरह से खारिज करते हुए करारा जवाब दिया है। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को इन आरोपों को 'बेबुनियाद' करार देते हुए कहा कि चिनाब नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी सिर्फ और सिर्फ भारी मानसूनी बारिश का नतीजा है।
पाकिस्तानी मीडिया के दावों की कैसे खुली पोल
पाकिस्तान के प्रमुख अखबार 'डॉन' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, खैबर पख्तूनख्वा, गिलगित-बाल्टिस्तान, पीओके और पंजाब में मूसलाधार बारिश, अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन के कारण कम से कम 37 लोगों की मौत हो चुकी है। वहां घर, फसलें, मवेशी और सड़कें पूरी तरह तबाह हो गई हैं। अपनी इस नाकामी को छिपाने के लिए पाकिस्तानी मीडिया ने यह राग अलापना शुरू कर दिया कि भारत जानबूझकर उनके यहां बाढ़ ला रहा है।
शुक्रवार को साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इन दावों पर पलटवार किया। उन्होंने स्पष्ट किया, "पाकिस्तानी मीडिया की यह रिपोर्ट कि भारत जानबूझकर बाढ़ ला रहा है, पूरी तरह बेबुनियाद और तथ्यों के विपरीत है। 20 से 23 जुलाई 2026 के बीच जम्मू और आसपास के जलग्रहण क्षेत्रों में भारी मॉनसूनी बारिश हुई है, जिसका सीधा असर चिनाब नदी के बहाव पर पड़ा है।"
खुद पाकिस्तान का डेटा दे रहा गवाही
भारत ने पाकिस्तान के ही आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए उसके झूठे दावों की हवा निकाल दी। जायसवाल ने बताया कि खुद पाकिस्तान के 'बाढ़ पूर्वानुमान प्रभाग' (लाहौर) ने 22 जुलाई 2026 को जारी अपनी एडवाइजरी में चिनाब नदी के बढ़ते जलस्तर का कारण ऊपरी इलाकों में हुई भारी बारिश को बताया था।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी एक प्राकृतिक और मौसमी प्रक्रिया है। मौसम की वजह से आई इस बाढ़ को 'भारत की साजिश' बताकर पेश करने की कोशिश तथ्यात्मक रूप से गलत है।
'भारत ने नहीं दी चेतावनी'- इस दावे का भी मिला सटीक जवाब
पाकिस्तानी अखबार में एक अधिकारी के हवाले से यह भी आरोप लगाया गया था कि भारत ने नदी के बहाव को लेकर पाकिस्तान को पहले से कोई जानकारी नहीं दी। इस पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस दौरान नदी का बहाव इतने खतरनाक या असाधारण स्तर तक पहुंचा ही नहीं था कि जिसके लिए किसी विशेष 'बाढ़ चेतावनी' को जारी करने की नौबत आए।
भारत ने स्पष्ट किया कि जलस्तर मानसूनी परिस्थितियों के ही अनुरूप था और खुद पाकिस्तान के अधिकारियों ने भी यह माना है। ऐसे में भारत पर जानकारी छिपाने का आरोप लगाना पूरी तरह निराधार है। हालांकि, भारत ने यह जरूर कहा कि पिछले साल की तरह इस बार भी मानवीय आधार पर कूटनीतिक चैनलों के जरिए 'हाई-फ्लड डेटा' पाकिस्तान के साथ साझा किया जाएगा।
सिंधु जल संधि पर भारत का सख्त रुख बरकरार
सिंधु जल संधि के सवाल पर भारत ने अपना कड़ा रुख बरकरार रखा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, "IWT पर भारत का रुख नहीं बदला है। जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद से अपना समर्थन पूरी तरह और स्थायी रूप से वापस नहीं ले लेता, तब तक यह संधि स्थगित रहेगी।" गौरतलब है कि पिछले साल अप्रैल में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद से ही भारत ने इस संधि को स्थगित रखा है।


