मोदी के दौरे से पहले भारत का इजरायल को झटका, वेस्ट बैंक पर नहीं दिया दोस्त का साथ; लताड़ा भी
पीएम मोदी के इजरायल दौरे से ठीक पहले भारत ने संयुक्त राष्ट्र में वेस्ट बैंक पर इजरायल के कब्जे की कड़ी निंदा की है। भारत ने इजरायली कदमों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया। जानिए इस कूटनीतिक कदम के मायने।

इजरायल का सदाबहार दोस्त होने के बावजूद भारत ने उसके एक कदम की तीखी आलोचना की है। मामला फिलिस्तीन के वेस्ट बैंक से जुड़ा है जिस पर इजरायल कब्जा करता जा रहा है। अब भारत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम उठाते हुए 100 से अधिक देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ मिलकर वेस्ट बैंक पर इजरायल के नियंत्रण को मजबूत करने के प्रयासों की कड़े शब्दों में निंदा की है। यह घटनाक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगले सप्ताह होने वाली इजरायल यात्रा से ठीक पहले सामने आया है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत का कड़ा रुख
भारत ने उस संयुक्त बयान का समर्थन किया है जिसमें वेस्ट बैंक में इजरायल की गतिविधियों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया गया है। भारत ने बुधवार देर रात, समय सीमा समाप्त होने से ठीक पहले इस निंदा प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए।
बयान की मुख्य बातें:
अवैध उपस्थिति का विरोध: बयान में कहा गया है कि वेस्ट बैंक में इजरायल की उपस्थिति को बढ़ाने के एकतरफा फैसले और उपाय पूरी तरह से 'अवैध' हैं।
एनेक्सेशन (विलय) का विरोध: देशों ने किसी भी प्रकार के विलय या कब्जे के प्रयासों का पुरजोर विरोध किया है।
डेमोग्राफिक बदलाव: बयान में 1967 के बाद से कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों (पूर्वी यरुशलम सहित) की जनसांख्यिकीय संरचना, चरित्र और स्थिति को बदलने के किसी भी प्रयास को खारिज किया गया है।
शांति के लिए खतरा: हस्ताक्षरित देशों का मानना है कि इजरायल के ये कदम क्षेत्र में शांति और स्थिरता के प्रयासों को कमजोर करते हैं।
पीएम मोदी की इजरायल यात्रा और कूटनीति
यह बयान ऐसे समय में आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले सप्ताह इजरायल के ऐतिहासिक दौरे पर जाने वाले हैं। अपनी इस यात्रा के दौरान पीएम मोदी के इजरायली संसद को संबोधित करने की भी संभावना है।
भारत के इस कदम को एक संतुलित कूटनीति के रूप में देखा जा रहा है। भारत और इजरायल के बीच रक्षा और तकनीक में गहरे संबंध हैं। हालांकि भारत ऐतिहासिक रूप से 'टू-स्टेट सॉल्यूशन' का समर्थक रहा है और वेस्ट बैंक पर भारत का यह स्टैंड उसकी पुरानी विदेश नीति के अनुरूप ही है।
इससे पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के सदस्यों ने भी बुधवार को गाजा में लागू युद्धविराम समझौते को स्थायी बनाने की अपील की और वेस्ट बैंक में इजरायल के नियंत्रण विस्तार की कोशिशों को दो-राष्ट्र समाधान की संभावनाओं के लिए गंभीर खतरा बताया। यह बैठक अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल पर होने वाली बोर्ड ऑफ पीस की पहली उच्चस्तरीय बैठक से ठीक एक दिन पहले हुई।
हालांकि इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने सुरक्षा परिषद को इजरायल विरोधी जुनून से ग्रस्त बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया का ध्यान संयुक्त राष्ट्र की बैठक पर नहीं, बल्कि वॉशिंगटन में होने वाली बोर्ड ऑफ पीस बैठक पर रहेगा। सार ने दोहराया कि इजरायल का बाइबिल की भूमि पर ऐतिहासिक और प्रलेखित अधिकार है।
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