पटरी पर लौट रहे भारत-चीन संबंध, बीजिंग में हुई बैठक से आई बड़ी खबर; किस बात पर बनी सहमति?
भारत-चीन के बीच बीजिंग में WMCC की अहम बैठक हुई, जिसमें LAC पर शांति बहाली और रिश्तों को सामान्य बनाने पर रचनात्मक चर्चा हुई। जल्द ही दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों (SR) की बड़ी बैठक चीन में होगी। पूरी खबर पढ़ें।

पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर स्थिति को लेकर भारत और चीन के बीच कूटनीतिक स्तर पर एक और बड़ा कदम उठाया गया है। बुधवार को चीन की राजधानी बीजिंग में दोनों देशों के बीच वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोआर्डिनेशन (WMCC) की अहम बैठक हुई। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने गुरुवार को इस बातचीत को बेहद 'रचनात्मक' और 'दूरदर्शी' करार दिया। इस दौरान दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि सीमा पर शांति और स्थिरता से ही समग्र रिश्तों को सामान्य बनाने का रास्ता खुल सका है।
गलवान के बाद रिश्तों को सुधारने की कवायद
साल 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद से ही दोनों एशियाई दिग्गजों के रिश्ते बेहद तनावपूर्ण दौर से गुजर रहे थे। यह सैन्य गतिरोध करीब चार साल तक चला। हालांकि, पिछले एक साल में दोनों देशों ने आपसी संबंधों को फिर से पटरी पर लाने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों पक्षों ने भारत-चीन सीमा क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने सीमा पर शांति बनाए रखने की दिशा में हुई प्रगति पर संतोष जताया और माना कि इसी प्रगति के कारण द्विपक्षीय संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य करने में मदद मिली है।
बीजिंग की बैठक में किन मुद्दों पर हुई चर्चा?
इस बैठक में परिसीमन (डिलिमिटेशन), सीमा प्रबंधन, नए तंत्र के निर्माण और सीमा-पार सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर गहन चर्चा हुई। भारतीय पक्ष ने सीमा पार बहने वाली नदियों (ट्रांस-बॉर्डर रिवर्स) पर अगले विशेषज्ञ-स्तरीय तंत्र की बैठक जल्द बुलाने पर विशेष जोर दिया।
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में बताया कि दोनों देश 24वीं विशेष प्रतिनिधि (SR) वार्ता के तहत बनी सहमतियों के आधार पर कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर नियमित संपर्क बनाए रखने के लिए भी राजी हुए हैं।
किन अधिकारियों ने किया नेतृत्व?
इस कूटनीतिक बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (पूर्वी एशिया) सुजीत घोष ने किया। वहीं, चीनी दल की कमान वहां के विदेश मंत्रालय के सीमा और महासागरीय मामलों के विभाग की महानिदेशक हाओ यानकी ने संभाली। इसके अलावा, सुजीत घोष ने चीनी विदेश मंत्रालय के एशियाई मामलों के विभाग के निदेशक लियू जिनसोंग से भी मुलाकात की और चीनी सहायक विदेश मंत्री होंग लेई से शिष्टाचार भेंट की।
जल्द होगी विशेष प्रतिनिधियों की बैठक
बीजिंग की इस बैठक में दोनों देशों ने चीन में होने वाली अगली विशेष प्रतिनिधियों (SR) की बैठक के लिए "ठोस तैयारी" करने पर सहमति जताई है। गौरतलब है कि पिछले साल अगस्त में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच नई दिल्ली में SR स्तर की वार्ता हुई थी, जिसमें सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए कई अहम नतीजे सामने आए थे।
डेपसांग, डेमचोक और शीर्ष नेतृत्व की कूटनीति
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत और चीन अपने तनावपूर्ण संबंधों को सुधारने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। कई दौर की कूटनीतिक और सैन्य वार्ताओं के बाद, दोनों देशों ने पूर्वी लद्दाख में LAC के कई टकराव बिंदुओं से अपने सैनिकों को पीछे हटाया है।
अक्टूबर 2024 में, दोनों पक्षों ने पूर्वी लद्दाख के आखिरी दो टकराव बिंदुओं- डेपसांग और डेमचोक के लिए 'डिसएंगेजमेंट' यानी सैनिकों की वापसी के समझौते को अंतिम रूप दिया था। इस समझौते के कुछ ही दिनों बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कजान में मुलाकात की और रिश्तों को बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए।
इससे पहले, पिछले साल अगस्त में पीएम मोदी शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए चीन के तियानजिन शहर गए थे। वहां भी SCO समिट से इतर मोदी और शी जिनपिंग के बीच व्यापक चर्चा हुई थी। उस मुलाकात में पीएम मोदी ने स्पष्ट किया था कि भारत आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर चीन के साथ अपने संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
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