फिर करीब आ रहे भारत और चीन, पहली बार हुई यह खास मीटिंग; जिनपिंग कर सकते हैं दौरा

Apr 18, 2026 06:24 am ISTAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, शांघाई
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2024 में लद्दाख विवाद सुलझने के बाद भारत और चीन के बीच पहली SCO द्विपक्षीय वार्ता संपन्न हुई। व्यापार, सुरक्षा और ब्रिक्स (BRICS) में बढ़ते सहयोग के साथ-साथ आतंकवाद और संप्रभुता पर जानें भारत का स्पष्ट रुख।

फिर करीब आ रहे भारत और चीन, पहली बार हुई यह खास मीटिंग; जिनपिंग कर सकते हैं दौरा

द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने के प्रयासों और हाल ही में दोनों देशों के बीच सुधरे संबंधों के बीच, भारत और चीन ने 16-17 अप्रैल को अपनी पहली शंघाई सहयोग संगठन (SCO) द्विपक्षीय वार्ता आयोजित की। साल 2024 में पूर्वी लद्दाख में हुए सैन्य गतिरोध के सुलझने के बाद से यह कदम दोनों देशों के बीच सुधरते कूटनीतिक रिश्तों की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

बैठक के मुख्य विषय और चर्चा

विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा जारी बयान के अनुसार दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने SCO नेताओं द्वारा लिए गए निर्णयों को लागू करने और संगठन की भविष्य की रूपरेखा को लेकर अपने-अपने विचार साझा किए। भारत और चीन ने SCO से जुड़े मामलों में आपसी विचार-विमर्श और सहयोग को लगातार जारी रखने और उसे और अधिक मजबूत करने पर सहमति जताई है।

दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने संयुक्त रूप से विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज से मुलाकात की। इस दौरान सुरक्षा, व्यापार, कनेक्टिविटी (संपर्क) और दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी संबंधों सहित SCO ढांचे के भीतर सहयोग की व्यापक समीक्षा की गई।

बहुपक्षीय मंचों (BRICS और SCO) पर बढ़ता सहयोग

साल 2024 में सीमा विवाद सुलझने के बाद से दोनों देश ब्रिक्स (BRICS) और SCO जैसे अंतरराष्ट्रीय और बहुपक्षीय मंचों पर साथ मिलकर काम कर रहे हैं। पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी SCO शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए चीन गए थे।

आगामी उच्च स्तरीय दौरे

बीजिंग ने भारत की मौजूदा ब्रिक्स अध्यक्षता के लिए अपना पूर्ण समर्थन जताया है। इसके तहत, चीनी विदेश मंत्री वांग यी 14-15 मई को ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए भारत का दौरा कर सकते हैं। इसके अलावा, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भी सितंबर में होने वाले मुख्य ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए भारत आने की उम्मीद है।

SCO को लेकर भारत का स्पष्ट रुख

भारत इस यूरेशियन समूह (SCO) में अपनी सदस्यता को अत्यधिक महत्व देता है और इसके उद्देश्यों को लेकर उसका रुख बिल्कुल स्पष्ट है। भारत का मानना है कि SCO का प्राथमिक और मूल उद्देश्य क्षेत्र में आतंकवाद, कट्टरपंथ और उग्रवाद का डटकर मुकाबला करना है।

भारत क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिए SCO को एक महत्वपूर्ण मंच मानता है। लेकिन भारत की स्पष्ट शर्त है कि इस तरह की कोई भी पहल सदस्य देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सिद्धांतों का पालन करे, जो कि SCO चार्टर का भी मुख्य हिस्सा है।

पीएम मोदी का कड़ा संदेश

भारत के इसी रुख को दोहराते हुए पिछले साल तियानजिन में SCO शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा था कि जो कनेक्टिविटी संप्रभुता को दरकिनार करती है, वह अंततः अपना भरोसा और अर्थ दोनों खो देती है।

Amit Kumar

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अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।

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