'बहुत सारी खामियां हैं, फिर से सोच लीजिए'; भारत ने US से प्रस्तावित 12.5% ​​टैरिफ हटाने को कहा

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भारत ने कहा कि उसने इस मुद्दे पर हमेशा गंभीरता व पारदर्शिता के साथ सहयोग किया है और उसके संवैधानिक व अंतरराष्ट्रीय दायित्व भी जबरन श्रम के खिलाफ हैं। इसलिए भारत पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का कोई उचित आधार नहीं बनता।

'बहुत सारी खामियां हैं, फिर से सोच लीजिए'; भारत ने US से प्रस्तावित 12.5% ​​टैरिफ हटाने को कहा

भारत ने अमेरिका की ओर से प्रस्तावित 12.5 प्रतिशत टैरिफ का कड़ा विरोध किया है। नई दिल्ली की ओर से कहा गया कि दोनों देशों के बीच व्यापार से जुड़े किसी भी विवाद का समाधान एकतरफा कदमों के बजाय द्विपक्षीय व्यापार बातचीत के जरिए किया जाना चाहिए। भारत ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि से अपने प्रस्ताव पर फिर से विचार करने की अपील की है। यह मामला यूएसटीआर की धारा 301 के तहत की गई उस जांच से जुड़ा है, जिसमें जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात को लेकर कई देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा गया है।

भारत का कहना है कि उसने इस मुद्दे पर हमेशा गंभीरता व पारदर्शिता के साथ सहयोग किया है और उसके संवैधानिक व अंतरराष्ट्रीय दायित्व भी जबरन श्रम के खिलाफ हैं। इसलिए भारत पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का कोई उचित आधार नहीं बनता। वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय में संयुक्त सचिव बृज मोहन मिश्रा ने सार्वजनिक सुनवाई के दौरान भारत का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि यूएसटीआर की रिपोर्ट और उसके निष्कर्षों में कई कानूनी और तथ्यात्मक कमियां हैं। अमेरिकी व्यापार कानून की धारा 301 के तहत किसी देश पर कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य आवश्यक होते हैं, लेकिन भारत के मामले में ऐसा कोई सबूत प्रस्तुत नहीं किया गया है।

जबरन श्रम के आरोप पर क्या बोला भारत

रिपोर्ट में केवल कुछ देशों के उदाहरणों और व्यापक व्यापार आंकड़ों के आधार पर यह मान लिया गया कि जबरन श्रम से बने उत्पाद अमेरिका तक पहुंच रहे हैं। भारत का कहना है कि यह निष्कर्ष बिना किसी देश-विशिष्ट या क्षेत्र-विशिष्ट साक्ष्य के निकाला गया है और इससे अमेरिकी उद्योग को नुकसान होने का दावा भी प्रमाणित नहीं किया गया है। भारत ने यह भी साफ किया कि अगर अमेरिका को किसी विशेष मुद्दे पर चिंता है तो उसका समाधान आपसी बातचीत और परामर्श के जरिए निकाला जा सकता है।

वाशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास में प्रथम सचिव श्रेयंस गुप्ता ने कहा कि भारत में आयात होने वाला चावल बहुत सीमित मात्रा में होता है और वह केवल कुछ विशेष किस्मों की मांग को पूरा करने के लिए मंगाया जाता है। भारत से अमेरिका निर्यात होने वाले चावल की तुलना में आयातित चावल का मूल्य 3 प्रतिशत से भी कम है। उन्होंने बताया कि भारत में ऐसे कड़े प्रावधान हैं, जिनके तहत जबरन श्रम से उत्पादित आयातित चावल को भारत से दोबारा अमेरिका निर्यात करने की इजाजत नहीं है। इसलिए भारतीय चावल को प्रस्तावित अतिरिक्त शुल्क से छूट दी जानी चाहिए।

Niteesh Kumar

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Niteesh Kumar

पत्रकार नीतीश कुमार 8 साल से अधिक समय से मीडिया इंडस्ट्री में एक्टिव हैं। जनसत्ता डिजिटल से बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर शुरुआत हुई। लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ने से पहले टीवी9 भारतवर्ष और दैनिक भास्कर डिजिटल में भी काम कर चुके हैं। पत्रकार नीतीश कुमार को खबरें लिखने के साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग का शौक है। लाइव हिन्दुस्तान यूट्यूब चैनल के लिए लोकसभा चुनाव 2024, दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 और बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की कवरेज कर चुके हैं। फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान के लिए नेशनल और इंटरनेशनल सेक्शन की खबरें लिखते हैं। पत्रकार नीतीश कुमार को ब्रेकिंग न्यूज लिखने के साथ खबरों का गहराई से विश्लेषण करना पसंद है। राजनीति से जुड़ी खबरों पर मजबूत पकड़ और समझ रखते हैं। समसामयिक राजनीतिक मुद्दों पर कई सारे लंबे लेख लिख चुके हैं। पत्रकार नीतीश कुमार ने पत्रकारिता का पढ़ाई IIMC, दिल्ली (2016-17 बैच) से हुई। इससे पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी के महाराजा अग्रसेन कॉलेज से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन किया। पत्रकार नीतीश कुमार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के रहने वाले हैं। राजनीति, खेल के साथ सिनेमा में भी दिलचस्पी रखते हैं। फिल्में देखना और रिव्यू करना व उन पर चर्चा करना हॉबी है।

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