भारत में ही रूस पर दबाव बनाने की ताकत, यूक्रेन युद्ध के बीच किसने की PM मोदी से अपील

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विदेश मंत्री ने भारत और एस्टोनिया के बीच लगातार मजबूत हो रहे द्विपक्षीय और राजनीतिक संबंधों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच डिजिटल सहयोग, स्टार्टअप और इनोवेशन के क्षेत्र में असीमित संभावनाएं हैं।

भारत में ही रूस पर दबाव बनाने की ताकत, यूक्रेन युद्ध के बीच किसने की PM मोदी से अपील

रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष पर अभी तक पूर्ण विराम की स्थिति नहीं बन सकी है। दुनिया के कई देशों को भारत से उम्मीद है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि रूस और भारत के पुराने मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन की गहरी दोस्ती से भी दुनिया के कई देशों को उम्मीद है। एस्टोनिया के विदेश मंत्री मार्गस साकना ने भी कहा है कि भारत के पास यूक्रेन संघर्ष को समाप्त कराने के लिए रूस पर दबाव बनाने की क्षमता है, भारत ही दोनों देशों के बीच समझौता करा सकता है। उन्होंने कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को युद्धविराम पर विचार करना चाहिए।

साकना ने कहा कि एस्टोनिया 2027 में यूक्रेन पुनर्निर्माण सम्मेलन का आयोजन करने वाला है। उन्होंने कहा कि भारत भी युद्धग्रस्त देश के पुनर्निर्माण में भागीदार बन सकता है। क्षेत्र में शांति लाने में भारत की भूमिका के सवाल पर,बोले चार साल से जंग छिड़ी है। आपको बता दें कि रूस और यूक्रेन के बीच जारी सैन्य संघर्ष अब अपने पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है।

पुतिन पर दबाव बढ़ाए भारत: मार्गस साकना

समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए एस्टोनियाई विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि हालांकि उनका देश यूरोप में जल्द से जल्द शांति चाहता है, लेकिन रूस ने अब तक यूक्रेन में अपने आक्रामक लक्ष्यों को बदलने का कोई संकेत नहीं दिया है। ऐसे में भारत का हस्तक्षेप निर्णायक साबित हो सकता है। साकना ने कहा, "हम यूरोप में शांति चाहते हैं, लेकिन हम यह भी जानते हैं कि दुर्भाग्य से रूस अपने लक्ष्यों को बदलने के लिए तैयार नहीं है। इस स्थिति में भारत एक बहुत बड़ी भूमिका निभा रहा है। अगर भारत रूस पर अधिक दबाव बनाता है तो हमें उम्मीद है कि पुतिन अपना रास्ता बदलेंगे और अंततः यूरोप में शांति का मार्ग प्रशस्त होगा।"

विदेश मंत्री ने भारत और एस्टोनिया के बीच लगातार मजबूत हो रहे द्विपक्षीय और राजनीतिक संबंधों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच डिजिटल सहयोग, स्टार्टअप और इनोवेशन के क्षेत्र में असीमित संभावनाएं हैं।

आपको बता दें कि एस्टोनिया की जनसंख्या मात्र 13 लाख है, वहीं भारत की आबादी 140 करोड़ से अधिक है। साकना के अनुसार, दोनों देशों में भले ही हजार गुना का अंतर हो, लेकिन डिजिटल ऑपरेशंस और तकनीक के मामले में यह पैमाना या आकार मायने नहीं रखता।

उन्होंने भारतीय उद्यमियों को एस्टोनिया के बेहतरीन स्टार्टअप इकोसिस्टम और ई-रेजीडेंसी प्रोग्राम का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने बताया कि भारत के हजारों लोग पहले से ही एस्टोनिया के इस डिजिटल बिज़नेस नेटवर्क का हिस्सा हैं, जहां बिना किसी कागजी लालफीताशाही के टैक्स और व्यापारिक प्रक्रियाएं बेहद आसान हैं। हाल ही में एस्टोनिया के राष्ट्रपति ने भी भारत में आयोजित एआई (AI) कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की थी।

यूक्रेन युद्ध अपने अंत के करीब- पुतिन का दावा

एस्टोनियाई विदेश मंत्री के बयान के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी इस युद्ध को लेकर एक बड़ा दावा किया है। मॉस्को में विजिलेंस डे परेड के बाद मीडिया से बात करते हुए पुतिन ने कहा कि यूक्रेन के साथ चल रहा यह संघर्ष अब अपने अंत के करीब है। हालांकि, पुतिन ने इस पूरे संकट के लिए पश्चिमी देशों के ग्लोबलिस्ट संभ्रांत वर्ग को जिम्मेदार ठहराया।

पुतिन ने दावा किया कि साल 2022 में इस्तांबुल में यूक्रेन के साथ एक समझौता लगभग तय हो गया था और यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडल ने इस पर सहमति भी दे दी थी। लेकिन बाद में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन और ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री के दबाव में आकर यूक्रेन ने इस पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। पुतिन ने तंज कसते हुए कहा कि पश्चिमी देशों को लगता था कि वे कुछ ही महीनों में रूस को पूरी तरह तोड़ देंगे और उसकी संप्रभुता नष्ट कर देंगे, लेकिन वे अपने इस इरादे में पूरी तरह नाकाम रहे और अब खुद इस दलदल में फंस चुके हैं। रूसी राष्ट्रपति ने उम्मीद जताई कि यूरोप में जल्द ही राजनीतिक समझदारी वापस लौटेगी और शांति स्थापित होगी।

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Himanshu Jha

लेखक के बारे में

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बिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।


एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।


हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।


काम के इतर, हिमांशु को सिनेमा का विशेष शौक है। वे विशेष रूप से सियासी और क्राइम बेस्ड वेब सीरीज़ देखना पसंद करते हैं, जो कहीं न कहीं समाज और सत्ता के समीकरणों को समझने की उनकी जिज्ञासा को भी प्रदर्शित करता है।

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