भारत को मनाना आसान नहीं, ट्रेड डील पर ऐसा क्यों बोले अमेरिकी अधिकारी? समझौते पर क्या उम्मीद
ग्रीर ने कहा कि भारत लंबे समय से अपने कृषि बाजार की सुरक्षा करता आया है और इस समझौते में भी वह इसे बचाने की कोशिश करेगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कुछ ऐसे क्षेत्र हैं, जहां दोनों देश आपसी सहमति बना सकते हैं।

भारत और अमेरिका के बीच चल रही ट्रेड डील के दौरान अमेरिका ने माना है कि कृषि के मामले में भारत को मनाना आसान नहीं है। अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमीसन ग्रीर ने हाल ही में यह बात कही है। उन्होंने कहा है कि भारत हमेशा से अपने कृषि क्षेत्र की रक्षा करता आया है और आगे भी ऐसा ही करने की उम्मीद है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब हाल ही में भारतीय टीम व्यापार समझौते पर बातचीत के लिए अमेरिका पहुंची है। बता दें कि पिछले छह महीने में यह इस तरह की पहली बैठक है।
अमेरिकी अधिकारी ने यह बातें अमेरिकी संसद की हाउस वेज एंड मीन्स कमिटी में ट्रंप प्रशासन की 2026 ट्रेड पॉलिसी पर हुई सुनवाई के दौरान कही। यहां कांग्रेसमैन रैंडी फीनस्ट्रा ने भारत के कृषि बाजार में अमेरिका की पहुंच और एनिमल फीड प्रोडक्ट जैसे ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स (DDGs), सोयाबीन मील और एथेनॉल के एक्सपोर्ट को लेकर सवाल उठाए। फीनस्ट्रा एक ऐसे जिले का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो अमेरिका में अंडे, मकई, सोयाबीन, पोर्क और बायोफ्यूल उत्पादन के लिए जाना जाता है।
क्या बोले अमेरिकी अधिकारी?
जैमीसन ग्रीर ने कमेटी से कहा, ''भारत एक कठिन चुनौती है... उन्होंने लंबे समय से अपने कृषि बाजारों की रक्षा की है।'' उन्होंने कहा, '' वे इस समझौते का काफी हिस्सा सुरक्षित रखना चाहते हैं। हालांकि, कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जहां मुझे लगता है कि हम आपसी सहमति बना सकते हैं। डीडीजीएस (डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स) इसका एक अच्छा उदाहरण है।'' यह इसलिए भी अहम है क्योंकि 7 फरवरी को हुए अंतरिम द्विपक्षीय समझौते के तहत भारत ने अमेरिका से DDGs के सीमित आयात की इजाजत दी थी, जो उसकी सालाना 5 करोड़ टन खपत का करीब 1 फीसदी है। संयुक्त बयान में यह भी कहा गया था कि भारत अमेरिकी औद्योगिक सामान और कई खाद्य और कृषि उत्पादों पर टैरिफ घटाएगा या खत्म करेगा, जिसमें DDGs और रेड सॉरघम जैसे एनिमल फीड प्रोडक्ट शामिल हैं।
भारत ने क्या बताया?
इस बीच भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को कहा है ट्रेड डील को लेकर बातचीत जारी है। उन्होंने कहा कि दोनों देश एक संतुलित, आपसी फायदे वाला और भविष्य को ध्यान में रखने वाला समझौता करने की दिशा में काम कर रहे हैं, ताकि 2030 तक 500 अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य को हासिल किया जा सके। यह लक्ष्य 2024 के करीब 212 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार से दोगुना से ज्यादा होगा।
किन मुद्दों पर चल रही बात?
सूत्रों के मुताबिक, यह बातचीत दो मुख्य मुद्दों पर आगे बढ़ रही है। पहला, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद एक मजबूत और कानूनी रूप से सही टैरिफ ढांचा तैयार करना और दूसरा, चीन, वियतनाम, बांग्लादेश, श्रीलंका और इंडोनेशिया जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले भारत को बेहतर स्थिति दिलाना। भारतीय प्रतिनिधिमंडल के शुक्रवार तक नई दिल्ली लौटने की उम्मीद है और दोनों देशों के बीच यह बातचीत आगे भी जारी रह सकती है।
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लेखक के बारे में
Jagriti Kumariजागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।
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