गलत और सिर्फ अटकलबाजी… AI-171 के पायलट को जिम्मेदार ठहराने वाले दावे पर AAIB की दो टूक
AAIB ने कहा कि वह एयरक्राफ्ट (एक्सीडेंट और घटनाओं की जांच) रूल्स, 2025, और ICAO एनेक्स 13 के तहत भारत की जिम्मेदारियों के अनुसार सख्ती से जांच कर रहा है, जो एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट जांच के लिए इंटरनेशनल स्टैंडर्ड को कंट्रोल करता है।

देश के विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो यानी एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने गुरुवार को एयर इंडिया फ्लाइट AI-171 हादसे को लेकर इटली के एक अखबार की उस रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि विमान के पायलट ने ही जानबूझकर फ्यूल स्विच बंद कर दिए थे। ब्यूरो ने साफ कहा कि यह रिपोर्ट गलत और केवल अटकलों पर आधारित है और अभी जांच जारी है, इसलिए किसी भी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। AAIB ने कहा कि पिछले साल अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया विमान हादसे की जांच अभी जारी है।
दरअसल, इटली के अखबार Corriere della Sera ने दावा किया था कि जांच में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि हादसा किसी “जानबूझकर किए गए कृत्य” का परिणाम था और तकनीकी खराबी को खारिज कर दिया था लेकिन AAIB ने इन दावों को नकारते हुए कहा कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है और अंतिम रिपोर्ट बाद में जारी की जाएगी।
अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक जांच जारी
AAIB ने बताया कि यह जांच भारत के Aircraft Accident Investigation Rules 2025 और अंतरराष्ट्रीय विमानन संस्था ICAO के Annex-13 नियमों के अनुसार की जा रही है। इन नियमों के तहत विमान दुर्घटना की जांच पूरी तरह तकनीकी और सबूतों के आधार पर होती है, न कि किसी पर दोष तय करने के लिए। ब्यूरो ने यह भी स्पष्ट किया कि शुरुआती रिपोर्ट में केवल उस समय उपलब्ध तथ्यों को रखा गया था। अंतिम रिपोर्ट में ही दुर्घटना के असली कारण और सुरक्षा से जुड़ी सिफारिशें दी जाएंगी।
मीडिया संगठन दिखाएं जिम्मेदारी और गंभीरता
AAIB ने मीडिया संगठनों से जिम्मेदारी दिखाने की अपील करते हुए कहा कि अपुष्ट खबरें जनता में डर और भ्रम पैदा कर सकती हैं और जांच प्रक्रिया को भी प्रभावित कर सकती हैं। विमान हादसों की जांच में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एजेंसियां मीडिया को जल्द निष्कर्ष निकालने से बचने की सलाह देती रही हैं और कहा जाता रहा है कि अंतिम रिपोर्ट आने तक इंतजार करना जरूरी होता है।
बड़े हादसों में जांच कई चरणों में होती है
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के बड़े हादसों में जांच कई चरणों में होती है — जिसमें तकनीकी डेटा, ब्लैक बॉक्स रिकॉर्डिंग, मानव कारक और मौसम जैसी कई चीजों का विश्लेषण किया जाता है। इसलिए किसी एक संभावना के आधार पर निष्कर्ष निकालना गलत हो सकता है। सरकार और जांच एजेंसियों ने दोहराया है कि अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही सही तस्वीर सामने आएगी और तब तक किसी भी तरह की अटकल से बचना जरूरी है।
पिछले साल हुई थी दुर्घटना
बता दें कि पिछले साल 12 जून को अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट एआई-171 दुर्घटनाग्रस्त हो गयी थी। उड़ान भरते ही विमान ऊंचाई हासिल नहीं कर सका और एक मेडिकल कॉलेज के छात्रावास की इमारत से टकरा गया। विमान में आग लग गयी। विमान में सवार 241 लोगों और जमीन पर मौजूद 19 लोगों की मौत हो गयी थी। चामत्कारिक रूप से एक मात्र यात्री मामूली चोटों के साथ जीवित बचा था। एएआईबी का कहना है कि उसने तात्कालिक साक्ष्यों और जानकारी के आधार पर प्राथमिक रिपोर्ट साझा की थी। जांच पूरी होने पर अंतिम रिपोर्ट जारी की जायेगी।

लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।




