‘टीम नड्डा’ से ‘टीम नवीन’ कितनी अलग? क्या भाजपा बदल रही अपना पुराना अंदाज
भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार को संगठन स्तर पर बड़े बदलाव का ऐलान किया। पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन को नई टीम मिली है। पूर्व पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा की टीम की तुलना में नए अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम कई मायनों में अलग है।

भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार को संगठन स्तर पर बड़े बदलाव का ऐलान किया। पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन को नई टीम मिली है। पूर्व पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा की टीम की तुलना में नए अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम कई मायनों में अलग है। अब राष्ट्रीय स्तर की इस टीम में युवाओं को वरीयता दी गई है, हालांकि अनुभव को भी जगह मिली है। वैसे इस बात के संकेत तभी से मिल रहे थे, जब भाजपा ने 46 साल के नितिन नवीन को पार्टी के सबसे युवा अध्यक्ष के तौर पर जिम्मेदारी दी गई थी। आइए जानते हैं कि आखिर युवा चेहरों को टीम नितिन नवीन में जगह देने के पीछे क्या है मकसद। साथ ही यह भी जानेंगे कि जेपी नड्डा की टीम से यह टीम किस तरह से अलग है?
नड्डा का स्टाइल
जेपी नड्डा जनवरी 2020 में भाजपा के अध्यक्ष बने थे। उन्होंने यह जिम्मेदारी 2026 की शुरुआत तक संभाली। वह कार्यकारी पार्टी अध्यक्ष के तौर पर अमित शाह के साथ भी काम करते रहे। नड्डा के भाजपा अध्यक्ष रहते हुए पार्टी ने 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ा। इसके अलावा कई अन्य राज्यों के चुनाव में भी पार्टी उतरी थी। नड्डा का स्टाइल काफी लो प्रोफाइल वाला और संगठन पर नियंत्रण के नियंत्रण पर नजर रखना वाला था। इसके अलावा उम्मीदवारों के चयन और गठबंधन को संगठित रखने में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई।
नड्डा के नेतृत्व में कैसी थी भाजपा
नड्डा के नेतृत्व में बीजेपी का राष्ट्रीय संगठन भरोसेमंद राष्ट्रीय सचिवों के छोटे समूह के जरिए सख्त केंद्रीय नियंत्रण पर निर्भर था। इस दौरान पार्टी महासचिव बीएल संतोष, की भूमिका भी काफी अहम थी। पार्टी ने अपनी नेतृत्व व्यवस्था में रणनीतिक बदलाव भी किए। कुछ हाई प्रोफाइल नेताओं को अहम पदों से हटाया गया था, जबकि अपेक्षाकृत कम मशहूर नामों को प्रमोट किया गया। जेपी नड्डा कई बार भाजपा के लिए संकटमोचक की भूमिका में भी नजर आए। इसके अलावा उन्होंने कुछ अहम मौकों पर पार्टी के लिए निगोशिएशन भी किया। इसी साल कॉकरोच जनता पार्टी आंदोलन के दौरान भी वह ऐसी ही भूमिका में दिखे। उन्होंने सोनम वांगचुक का अनशन तुड़वाया था।
नितिन नवीन की खासियत
अगर बात करें भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की तो वह बिहार से पांच बार विधायक रह चुके हैं। जनवरी 2026 में संगठन के चुनाव, ‘संगठन पर्व’ के दौरान उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। पार्टी के अंदर उन्हें नई पीढ़ी के नेता के तौर पर प्रोजेक्ट किया जा रहा है। नितिन नवीन की भूमिका को साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों के साथ-साथ 2029 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए भी अहम बताया जा रहा है।
नवीन की युवा टीम
दूसरी तरफ टीम नितिन नवीन के नेतृत्व में भाजपा बदलाव की तरफ बढ़ती दिखाई दे रही है। नई राष्ट्रीय टीम की औसत आयु 55 से कम रहने की उम्मीद है। इसमें 40 और 50 की उम्र वाले नेता ज्यादा हैं। इसके अलावा, महिलाओं की बढ़ती संख्या, ओबीसी, एससी और एसटी को भी भरपूर प्रतिनिधित्व मिला है। हालांकि युवा जोश के साथ-साथ अनुभव को भी टीम में वरीयता दी गई है। बीएल संतोष संगठन के महासचिव बने हुए हैं। वहीं, वसुंधरा राजे, राम माधव और अन्य जैसे अनुभवी नेताओं को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में शामिल किया गया है। भाजपा ने अपने राज्य इकाइयों का भी पुनर्गठन शुरू कर दिया है। चुनावी माहौल वाले उत्तर प्रदेश में, सभी छह क्षेत्रीय प्रमुखों को बदल दिया गया और उपाध्यक्षों, महासचिवों और सचिवों की नई टीम की घोषणा की गई।
कैसे हुआ है बदलाव
गौरतलब है कि भाजपा ने सोमवार को पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में अपनी नई राष्ट्रीय टीम में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी सहित 10 महिलाओं और अल्पसंख्यक समुदायों के छह नेताओं को जगह दी। पार्टी नेताओं ने राष्ट्रीय पदाधिकारियों की नयी टीम को अनुभवी प्रशासनिक और संगठनात्मक अनुभव, युवा जोश, भौगोलिक विविधता और व्यापक सामाजिक समावेश का एक रणनीतिक संयोजन बताया। देश के विभिन्न हिस्सों से पार्टी की 10 अनुभवी महिला नेताओं को राष्ट्रीय टीम में जगह दी गई है। राष्ट्रीय महासचिव बनाई गईं ईरानी के अलावा, राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया, पूर्व केंद्रीय मंत्री डी. पुरंदेश्वरी और राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की पूर्व प्रमुख रेखा वर्मा उपाध्यक्ष नियुक्त की गई हैं। कविता पाटीदार और संगीता यादव को राष्ट्रीय सचिव नियुक्त किया गया है।
ऐसी है नई टीम
रूप कुमारी चौधरी को भाजपा महिला मोर्चा का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जबकि प्रीति गांधी को सोशल मीडिया सह-संयोजक बनाया गया है। पार्टी ने कहाकि भारत के हर प्रमुख धर्म को सम्मान और उचित स्थान देने के लिए, राष्ट्रीय टीम में एक सिख सदस्य, दो ईसाई सदस्य तथा मुस्लिम, जैन और पारसी समुदाय से एक-एक सदस्य को शामिल किया गया है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के पूर्व कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। कुंवर बासित अली को अल्पसंख्यक मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया है। कांग्रेस के दिवंगत नेता एके एंटनी के पुत्र अनिल एंटनी राष्ट्रीय सचिव के पद पर बने रहेंगे। पंजाब के पूर्व वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल को भाजपा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
पार्टी ने कहाकि नई नियुक्तियों से देश भर के 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लोगों को प्रतिनिधित्व मिला है। भाजपा ने एक बयान में कहाकि इस तरह की संतुलित नियुक्तियों से नये राष्ट्रीय अध्यक्ष (नितिन नवीन) की कार्यकारिणी टीम को देश के विशाल भौगोलिक विस्तार और क्षेत्रीय बारीकियों की गहरी समझ के साथ काम करने में मदद मिलेगी। पार्टी ने इस बात पर जोर दिया कि पूर्वोत्तर इलाके पर खास ध्यान दिया गया है। त्रिपुरा, असम और नगालैंड से तीन क्षेत्रीय नेताओं की नियुक्ति और संबित पात्रा की अध्यक्षता में पूर्वोत्तर समन्वय प्रकोष्ठ को जारी रखने के जरिए इस इलाके को खास अहमियत दी गई है।


