
ब्रेकफास्ट के बाद भी नहीं बनी बात? डीके-सिद्धा की मुलाकात के बाद भी संशय के बादल
कर्नाटक में सीएम की कुर्सी का किस्सा दिलचस्प होता जा रहा है। हालांकि सीएम सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम ने डीके शिवकुमार ने ब्रेकफास्ट पर मामला सुलझाने की कोशिश की। लेकिन अंदरखाने की खबरें कांग्रेस को परेशान करने वाली हो सकती हैं।
कर्नाटक में सीएम की कुर्सी का किस्सा दिलचस्प होता जा रहा है। हालांकि सीएम सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम ने डीके शिवकुमार ने ब्रेकफास्ट पर मामला सुलझाने की कोशिश की। लेकिन अंदरखाने की खबरें कांग्रेस को परेशान करने वाली हो सकती हैं। जानकारी के मुताबिक भले ही दोनों बड़े नेता भले ही ब्रेकफास्ट के बाद मुस्कुराए, हाथ मिलाया और मीडिया से बात की। लेकिन अंदर की गांठ अभी तक ज्यों की त्यों बनी हुई है।
सुलझा नहीं है सवाल
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक एकजुटता के प्रदर्शन के बावजूद यह बात अनसुलझी है कि ढाई साल के बाद सीएम बदलेगा या नहीं। इसके मुताबिक नाश्ते की बैठक के बाद सियासी तापमान में गिरावट तो आई है, लेकिन नेतृत्व का सवाल सुलझा नहीं है। लगभग दो महीने से यहां पर असहमति बनी हुई है। वहीं, भाजपा भी हालात पर नजर रखे हुए है।
गौरतलब है कि सिद्धारमैया और शिवकुमार ने बंद दरवाजों के बीच बैठक की। सूत्रों के मुताबिक इस दौरान सिद्धारमैया ने डीके शिवकुमार से कहा है कि वह 2028 में होने वाले चुनाव के बाद ही मुख्यमंत्री पद ले सकते हैं। गौरतलब है कि पिछले चुनाव में एक गुप्त समझौता हुआ है। इसके मुताबिक ढाई साल के बाद सिद्धारमैया को सीएम की कुर्सी छोड़नी होगी। फिर इस पद पर डीके शिवकुमार के बैठने की बात थी। पिछले कुछ दिनों से इसी को लेकर दोनों पक्षों में टकराव की स्थिति बनी हुई है। शीर्ष नेतृत्व के दखल के बाद दोनों नेताओं ने ब्रेकफास्ट मीटिंग की थी।
भाजपा की क्या प्रतिक्रिया
भाजपा ने चेतावनी दी है कि अगर कांग्रेस की आंतरिक लड़ाई जारी रही तो वह अविश्वास प्रस्ताव ला सकती है। इसका जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि पार्टी विधानसभा में बीजेपी और जेडी(एस) का सामना करने की तैयारी कर रही है।





