
तब तो मेरे राज्य में मेरी ही विश्वसनीयता नहीं रहेगी... कर्नाटक में कलह के बीच खरगे का क्यों छलका दर्द?
यह दूसरी बार है जब मल्लिकार्जुन खरगे ने अपनी ही पार्टी यानी कांग्रेस से इस मुद्दे को जल्द से जल्द सुलझाने के लिए दबाव डाला है। पिछले हफ्ते उन्होंने संसद के शीतकालीन सत्र से पहले इस संकट का निकारण करने की बात कही थी।
Karnataka Crisis Siddaramaiah vs DK Shivakumar: दक्षिणी राज्य कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस में छिड़े घमासान के बीच पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने हफ्ते भर के अंदर दूसरी बार इस संकट का हल करने के लिए दबाव डाला है। इससे पहले उन्होंने कहा था कि 1 दिसंबर तक ये मसला सुलझा लिया जाएगा लेकिन अभी तक इस मुद्दे का हल नहीं निकल सका है। हां, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच ब्रेकफास्ट पर चर्चा जरूर हुई है और मामले को फिलहाल थोड़े दिनों के लिए आगे टाला गया है। ऐसी सूरत में खरगे का दर्द छलक आया है।
सूत्रों के हवाले से NDTV की रिपोर्ट में कहा गया है कि खरगे ने उस वादे को पूरा करने की मांग की है, जो 2023 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव जीतने के बाद सत्ता साझाकरण के लिए सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच पांच साल का कार्यकाल के बराबर बंटवारे के लिए किया गया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि खरगे ने कर्नाटक संकट का हल करने के लिए तर्क देते हुए कहा कि “वह वादा मेरी मौजूदगी में किया गया था... और उसका सम्मान किया जाना चाहिए। नहीं तो, मेरे अपने राज्य में ही मेरी कोई विश्वसनीयता नहीं रह जाएगी।”
खरगे ने दूसरी बार डाला दबाव
यह दूसरी बार है जब मल्लिकार्जुन खरगे ने अपनी ही पार्टी यानी कांग्रेस से इस मुद्दे को जल्द से जल्द सुलझाने के लिए दबाव डाला है। पिछले हफ्ते उन्होंने संसद के शीतकालीन सत्र से पहले इस संकट का निकारण करने की बात कही थी और कहा था कि सोनिया जी और राहुल जी के साथ मिलकर और चर्चा कर इस सियासी संकट को हल कर लिया जाएगा। इसके बाद कांग्रेस ने शनिवार को सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच एक ब्रेकफास्ट मीटिंग करवाई थी।
मंगलवार को भी बेंगलुरु में ब्रेकफास्ट मीटिंग
सूत्रों ने बताया कि अब मंगलवार को भी बेंगलुरु में ब्रेकफास्ट मीटिंग होने जा रही है। इस बार DKS के घर पर दूसरा ब्रेकफास्ट होगा। इस ब्रेकफास्ट पर फिर से दोनों नेता मिलेंगे, ताकि उस बदलाव पर बात की जा सके। इससे पहले शनिवार को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के आवास पर सुबह के नाश्ते पर दोनों के बीच मीटिंग हुई थी।
बदलाव के पक्ष में नहीं राहुल गांधी?
सूत्र यह भी बता रहे हैं कि DKS को कांग्रेस की कोर लीडरशिप से मिलने के लिए दो हफ़्ते के अंदर दिल्ली बुलाया जाएगा। ताकि उन्हें यह 'भरोसा' दिया जा सके कि उनकी सत्ता हस्तांतरण की कोशिशें कामयाब होंगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि कांग्रेस इस झगड़े के दूरगामी परिणामों को भी देख रही है क्योंकि इसी तरह का झगड़ा राजस्थान में भी सचिन पायलट और अशोक गहलोत रे बीच हो चुका है। चर्चा इस बात की भी है कि राहुल गांधी फिलहाल कर्नाटक में मुख्यमंत्री बदलने को तैयार नहीं हैं। उन्हें मिड टर्म बदलाव पार्टी के लिए हितकर नहीं लग रहा है।





